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Punjab: पिता से जमीन लेकर छोड़ा बेसहारा, हाईकोर्ट ने बेटे को लगाई फटकार, हर माह तीन हजार रुपये देने का आदेश
Tue, 05 Jul 2022 09:22 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Tue, 05 Jul 2022 09:22 PM IST
सार
याची ने दलील दी कि वह मनरेगा में मजदूरी करता है। ऐसे में तीन हजार रुपये प्रतिमाह का भुगतान नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि गुजारे के लिए तीन हजार रुपये कम से कम जरूरी है। याची के भाई ने पिता को आश्रय देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी की है, ऐसे में अब बारी याची की है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
पिता से छह कनाल जमीन लेने के बाद उन्हें बेसहारा छोड़ने वाले बेटे को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने अब बेटे को आदेश दिया है कि वह पिता को गुजारे के लिए हर माह तीन हजार रुपये दे। याचिका दाखिल करते हुए पंजाब के फतेहगढ़ साहिब निवासी बेटे ने हाईकोर्ट को बताया कि उनके पिता ने मैंटेनेंस ऑफ पैरेंट्स एंड वेलफेयर और सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत गुजारा भत्ता दिलाने की अपील की थी।
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अपील पर पिता के पक्ष में फैसला सुनाया जिसे याची ने हाईकोर्ट की एकल बेंच में चुनौती दी। एकल बेंच ने याची के खिलाफ फैसला सुनाया जिसके बाद याची ने खंडपीठ में अपील की थी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि याची के पिता ने अपने दोनों बेटों में अपनी जमीन बांट दी है। याची के पिता के पास अब गुजारे का कोई जरिया नहीं बचा है।
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याची के भाई ने पिता को आश्रय दिया है और ऐसे में अब याची की जिम्मेदारी बनती है कि वह पिता के गुजारे के लिए उन्हें तीन हजार रुपये प्रतिमाह दे। याची ने दलील दी कि वह मनरेगा में मजदूरी करता है। ऐसे में तीन हजार रुपये प्रतिमाह का भुगतान नहीं कर सकता।
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कोर्ट ने कहा कि गुजारे के लिए तीन हजार रुपये कम से कम जरूरी है। याची के भाई ने पिता को आश्रय देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी की है, ऐसे में अब बारी याची की है। हाईकोर्ट ने अपील को सिरे से खारिज करते हुए याची को आदेश दिया कि वह पिता को यह राशि हर माह गुजारे के लिए उपलब्ध करवाए।