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हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी: सीमन की गैर मौजूदगी का मतलब ये नहीं कि दुष्कर्म नहीं हुआ, सजा के खिलाफ अपील खारिज

Fri, 22 Dec 2023 08:13 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 22 Dec 2023 08:13 AM IST
सार

याची ने कहा कि इस मामले में उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे और न ही बच्चे के यौन अंग में सीमन पाए गए थे। ऐसे में लैंगिक संपर्क की संभावना ही नहीं रह जाती। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि लैंगिक संपर्क को साबित करने के लिए सीमन का होना आवश्यक शर्त नहीं है।

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High Court made clear that absence of semen cannot basis for rejecting possibility of Misdeed
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट किया कि सीमन की गैर मौजूदगी पीड़िता से लैंगिक संपर्क की संभावना खारिज करने का आधार नहीं हो सकती है। हाईकोर्ट ने आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी की सजा के खिलाफ अपील को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है। 

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नरवाना निवासी व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि उसके खिलाफ पोक्सो एक्ट में बच्ची के साथ दुष्कर्म को लेकर मामला दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक 2016 में याची पीड़िता को उसे अपने साथ ले गया था। जब पीड़िता बरामद हुई तो उसका मेडिको-लीगल टेस्ट किया गया। आरोपी ने पीड़िता से दुष्कर्म करने की बात स्वीकार की थी। रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों के बाद ट्रायल कोर्ट ने याची को दोषी पाया और नरवाना की अदालत ने उसे 12 साल कैद की सजा सुनाई थी। 
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याची ने कहा कि इस मामले में उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे और न ही बच्चे के यौन अंग में सीमन पाए गए थे। ऐसे में लैंगिक संपर्क की संभावना ही नहीं रह जाती। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि लैंगिक संपर्क को साबित करने के लिए सीमन का होना आवश्यक शर्त नहीं है। पाक्सो एक्ट के अनुसार किसी बच्चे के यौनअंग, मुंह या शरीर के किसी हिस्से में अन्य प्रकार की वस्तु का प्रवेश भी लैंगिक यौन हमले की श्रेणी में आता है। पीड़िता हालांकि बाल गवाह है लेकिन वह भरोसेमंद है, जिसने घटना के बारे में विस्तार से बताया। 
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अपीलकर्ता के वकील के तर्क खारिज करते हुए पीठ ने कहा सीमन के बिना भी यदि रिकॉर्ड पर साक्ष्य से पता चलता है कि किसी नाबालिग लड़की के यौनअंग में किसी वस्तु या शरीर के हिस्से का प्रवेश हुआ है, तो यह यौन अपराध है।

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