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मोरनी गैंगरेपः हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, हरियाणा सरकार को जारी किया नोटिस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 27 Jul 2018 10:23 AM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
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मोरनी गैंगरेप मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने संज्ञान लेकर हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया है। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए हरियाणा पुलिस को जांच की स्टेटस रिपोर्ट दस दिन के भीतर दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी एवं जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने मामले का संज्ञान लेते हुए कोर्ट में मौजूद हरियाणा के असिस्टेंट एडवोकेट जनरल को इस मामले में सरकार से निर्देश लेकर 13 अगस्त को हलफनामा दायर करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि पिछले कई दिनों से मामला अखबारों की सुर्खियों में है। मामला एक महिला से जुड़ा है, जिसके आरोप बेहद गंभीर हैं।
इससे पहले पीड़िता ने चीफ जस्टिस के नाम लिखे पत्र में कहा है कि पंचकूला पुलिस शुरू से ही इस मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया है। जब पीड़िता अपनी शिकायत लेकर पंचकूला पुलिस में गई तो उसने शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसने चंडीगढ़ पुलिस को शिकायत दी थी और मनीमाजरा में जीरो एफआईआर के तहत मामला दर्ज किया गया था। अब इस केस की जांच पंचकूला पुलिस कर रही है, जिस पर उसे बिल्कुल भरोसा नहीं है।
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पीड़िता ने कहा कि जिस प्रकार पुलिस पर दबाव बनाया जा रहा है, उससे उसे खतरा है कि कहीं पंचकूला पुलिस उसे मरवा न दे। पीड़िता ने कहा कि उसे नाम के लिए सुरक्षा दी गई है लेकिन सुरक्षा में तैनात जवान भी पंचकूला पुलिस के हैं। लिहाजा उसे चंडीगढ़ पुलिस की सुरक्षा दी जाए और जब भी पंचकूला पुलिस उसे पूछताछ के लिए बुलाए तो उसे चंडीगढ़ पुलिस की निगरानी में ही भेजा जाए। पीड़िता ने कहा कि वह चाहती है कि उसे इंसाफ मिले और पंचकूला पुलिस की जांच में यह संभव नहीं है। केवल चंडीगढ़ पुलिस ही निष्पक्ष जांच कर सकती है।
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चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी एवं जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने मामले का संज्ञान लेते हुए कोर्ट में मौजूद हरियाणा के असिस्टेंट एडवोकेट जनरल को इस मामले में सरकार से निर्देश लेकर 13 अगस्त को हलफनामा दायर करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि पिछले कई दिनों से मामला अखबारों की सुर्खियों में है। मामला एक महिला से जुड़ा है, जिसके आरोप बेहद गंभीर हैं।
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इससे पहले पीड़िता ने चीफ जस्टिस के नाम लिखे पत्र में कहा है कि पंचकूला पुलिस शुरू से ही इस मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया है। जब पीड़िता अपनी शिकायत लेकर पंचकूला पुलिस में गई तो उसने शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसने चंडीगढ़ पुलिस को शिकायत दी थी और मनीमाजरा में जीरो एफआईआर के तहत मामला दर्ज किया गया था। अब इस केस की जांच पंचकूला पुलिस कर रही है, जिस पर उसे बिल्कुल भरोसा नहीं है।
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पीड़िता ने कहा कि जिस प्रकार पुलिस पर दबाव बनाया जा रहा है, उससे उसे खतरा है कि कहीं पंचकूला पुलिस उसे मरवा न दे। पीड़िता ने कहा कि उसे नाम के लिए सुरक्षा दी गई है लेकिन सुरक्षा में तैनात जवान भी पंचकूला पुलिस के हैं। लिहाजा उसे चंडीगढ़ पुलिस की सुरक्षा दी जाए और जब भी पंचकूला पुलिस उसे पूछताछ के लिए बुलाए तो उसे चंडीगढ़ पुलिस की निगरानी में ही भेजा जाए। पीड़िता ने कहा कि वह चाहती है कि उसे इंसाफ मिले और पंचकूला पुलिस की जांच में यह संभव नहीं है। केवल चंडीगढ़ पुलिस ही निष्पक्ष जांच कर सकती है।