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बुजुर्ग मां को 5000 रुपये नहीं दूंगा: याचिका लेकर हाईकोर्ट पहुंचा बेटा, कोर्ट ने कहा-ये कलयुग का उदाहरण

Fri, 28 Feb 2025 11:26 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 28 Feb 2025 11:26 AM IST
सार

संगरूर की फैमिली कोर्ट ने एक युवक को अपनी 77 साल की बुजुर्ग मां को पांच हजार रुपये भत्ता देने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ युवक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

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High Court imposed fine on man challenging order of giving maintenance allowance to his old mother
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अपनी 77 वर्षीय मां को पांच हजार रुपये भरण-पोषण भत्ता दिए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली बेटे के याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आश्चर्य जताया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह कलयुग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने इस न्यायालय की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। कोर्ट ने याची पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।  
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1992 में हो गई थी पति की माैत

77 वर्षीय महिला के पति की 1992 में मृत्यु हो गई थी। उसके परिवार में एक बेटा और एक विवाहित बेटी है। एक बेटे की भी माैत हो चुकी है। जो अपनी विधवा और दो बेटों को पीछे छोड़ गया है। पति की मृत्यु के बाद 77 वर्षीय महिला की 50 बीघा जमीन उसके बेटे और उसके मृतक बेटे के बेटों के पास चली गई। 1993 में उसे उसके भूत, वर्तमान और भविष्य के भरण-पोषण के लिए एक लाख रुपये दिए गए। इसके बाद वह अपनी बेटी के साथ रहने लगी। उसे 5 हजार रुपये के भरण-पोषण के आदेश को चुनौती देते हुए उसके बेटे ने तर्क दिया कि चूंकि वह उसके साथ नहीं रह रही थी, इसलिए पारिवारिक अदालत आदेश पारित नहीं कर सकती थी।

बुजुर्ग के पास आय का स्त्रोत नहीं

हालांकि, मां का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने तर्क दिया कि उसके पास आय का कोई स्रोत नहीं है और वह अपनी बेटी की दया पर जीने को मजबूर है, क्योंकि उसके पास उसे पालने के लिए कोई अन्य विकल्प नहीं है। अदालत ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण मामला बताया और कहा कि एक बार जब यह पाया गया कि बुजुर्ग महिला के पास आय का कोई स्रोत नहीं है, तो उसके बेटे के लिए याचिका दायर करने का कोई आधार नहीं है। 

अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि वास्तव में यह न्यायालय की अंतरात्मा को झकझोरता है कि बेटे ने अपनी ही मां के खिलाफ 5 हजार रुपये के भरण-पोषण भत्ते के निर्धारण को चुनौती देते हुए वर्तमान याचिका दायर की है, हालांकि वह अपने पिता की संपत्ति का उत्तराधिकारी है। हाईकोर्ट ने याची पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाते हुए उसे तीन महीने के भीतर अपनी मां के नाम पर यह राशि संगरूर के पारिवारिक न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के समक्ष जमा कराने का आदेश दिया है।
 
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