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हुडा की पॉलिसी गलत साबित हुई तो रद्द हो जाएंगी सभी FIR: हाईकोर्ट

Thu, 08 Dec 2016 11:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 08 Dec 2016 11:09 AM IST
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High Court, HUDA multiple allotment of plots, Haryana government, haryana news
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में हुडा के प्लाटों की मल्टीपल अलॉटमेंट मामले में हरियाणा सरकार और हुडा घिर गई है। बुधवार को हाईकोर्ट ने साल 1987 की दो पॉलिसी को लेकर याची की ओर से उठाए गए सवालों पर स्पष्ट किया है कि याची ने इन पॉलिसी के वैध होने पर ही सवाल उठाया हैं। ऐसे में या तो सरकार और हुडा साबित करें कि यह पॉलिसी सही नियमों के अनुसार तैयार हुई हैं। यदि ऐसा नहीं हुआ तो अलॉटमेंट से जुड़ी सभी एफआईआर रद कर दी जाएंगी।
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सुनवाई के दौरान याची पक्ष ने हुडा की 1987 में बनाई गई दो पॉलिसी को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा किया। याची ने कहा कि नौ जनवरी और पांच मई 1987 की पॉलिसी आरक्षण को लेकर मुख्य हैं, जिनमें अलॉटमेंट से जुड़ी शर्त थी। पॉलिसी को बनाने का अधिकार हुडा के प्रशासक के पास नहीं है। बावजूद इसके मुख्य प्रशासक ने खुद ही इन पॉलिसी को बनवाया और मंजूरी दे दी। इस लिहाज से यह पॉलिसी ही सही नहीं है।
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कहा गया कि रिव्यू करने के बाद संशोधित पॉलिसी लागू की गई है। जबकि हुडा के पास रिव्यू करने का अधिकार ही नहीं है। यह काम विधायिका का है। लैंड डिस्पोजल एक्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि एक्ट में किसी भी तरह से किसी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का प्रावधान ही नहीं है। इसके तहत जमीन वापस ली जा सकती है और पैसा देने से इनकार किया जा सकता है, लेकिन मामले में एफआईआर दर्ज करवाई जा रही हैं। इस तरह पॉलिसी खारिज करने की अपील की गई। हाईकोर्ट ने हुडा से मामले पर जवाब तलब किया है।
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मल्टीपल अलॉटमेंट से जुड़ी हुडा की पॉलिसी पर हाईकोर्ट ने किया स्पष्ट

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सरकार की सफाई, हुडा की तरफ से वेरिफिकेशन के बाद होगी कार्रवाई
हरियाणा सरकार ने बुधवार को हाईकोर्ट में स्पष्ट किया कि मामले में लाभार्थियों के खिलाफ कार्रवाई हुडा की तरफ से वेरिफिकेशन के बाद ही की जाएगी। पुलिस मामले में खुद कोई कार्रवाई नहीं करेगी। हुडा की तरफ से शिकायत मिलने के बाद ही उचित कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए प्रत्येक जिले में स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम का गठन किया गया है। टीम में उन पुलिस अफसरों को ही लिया गया है, जो इस तरह के मामलों की जांच करने में सक्षम हैं। 

याची का आरोप, डराकर की जा रही उगाही
याची की ओर से कहा गया कि अभी तक मामले में केवल आम लोगों को ही निशाना बनाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने इस पर पूछा कि तीन साल से मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। फिर भी सरकार अफसरों को बचाने में क्यों जुटी है। हरियाणा सरकार ने कहा कि अभी तक 602 केस दर्ज किए गए हैं। केस में 19 अनट्रेस हैं और 81 को बाद में कैंसिल कर दिया गया। वहीं 502 मामलों में आगे की जांच जारी है। कुछ मामलों में चालान पेश किए जा चुके हैं। याची की ओर से कहा गया कि अभी तक जो कार्रवाई की गई है, वह पैसा वसूली का जरिया बनी है। लोगों को गिरफ्तारी के नाम पर डराया जा रहा है और उगाही की जा रही है।
 
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