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Highcourt: पुलिस हिरासत में हुई थी युवती की मौत, एसआईटी की जांच में खामी बता हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपी जांच
Wed, 20 Mar 2024 10:42 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 20 Mar 2024 10:42 AM IST
सार
हाईकोर्ट ने सीबीआई को तीन महीने में जांच की रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मामला लुधियाना का हैं, जहां एक युवती को धाेखाधड़ी के मामले में पुलिस ने हिरासत में लिया था। मृतका के मंगेतर ने पुलिस पर युवती की बर्बर पिटाई का आरोप लगाया था। इसके बाद जांच पंजाब पुलिस की एसआईटी को सौंपी गई थी।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
पुलिस हिरासत में युवती की मौत के मामले में पंजाब पुलिस की एसआईटी की ओर से की गई जांच में भी खामियां बताते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अब जांच सीबीआई को सौंप दी है। सीबीआई को तीन महीने में जांच की रिपोर्ट पेश करने का हाईकोर्ट ने आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए मुकुल गर्ग ने बताया कि लुधियाना में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले में पूछताछ के लिए याची व उसकी मंगेतर रमनदीप कौर को अगस्त 2017 को पुलिस ने उठाया था। इसके बाद उसकी मंगेतर को बेदर्दी से पीटा गया और उसकी मौत हो गई। याची के परिजनों ने जब उच्चाधिकारियों को शिकायत दी तो तुरंत लीपापोती शुरू कर दी गई और इसे आत्महत्या का मामला बना दिया गया। याचिका दाखिल होने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर 2019 में एसआईटी गठित की गई थी। एसआईटी ने इस मामले में गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करते हुए जांच शुरू की थी।
पंजाब सरकार ने बताया कि याची ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया था कि मृतका का उसके अलावा कोई भी नहीं था, जबकि एसआईटी के सामने कहा कि युवती के परिजनों का इंतजार किए बगैर जबरन उसका अंतिम संस्कार करवा दिया गया। ऐसे में बयान में बदलाव की दलील देते हुए सीबीआई को जांच न सौंपने की अपील की गई।
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हाईकोर्ट ने एसआईटी की रिपोर्ट देखी तो पाया कि इसमें उस चाकू का जिक्र ही नहीं था जिसकी इस मामले में बेहद अहम भूमिका थी। मृतका के दोनों हाथों की कलाई कटी हुई थी। चाकू मृतका के अंतवस्त्रों में प्राप्त हुआ था जिसे एएसआई सुखदेव सिंह को सौंपा गया था। इसके बाद यह गायब हो गया और इस बारे में न तो पुलिस ने जांच की और न ही एसआईटी ने। बड़ा सवाल यह है कि पुलिस हिरासत में रमनदीप कौर के पास चाकू पहुंचा कहां से और पोस्टमार्टम के बाद वह चाकू गायब कहां हो गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि एसआईटी की जांच में काफी खामियां रहीं और ऐसे में लोगों का कानून पर विश्वास बना रहे इसलिए निष्पक्ष जांच जरूरी है। हाईकोर्ट ने इस मामले जांच सीबीआई को सौंपते हुए तीन महीने में रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए मुकुल गर्ग ने बताया कि लुधियाना में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले में पूछताछ के लिए याची व उसकी मंगेतर रमनदीप कौर को अगस्त 2017 को पुलिस ने उठाया था। इसके बाद उसकी मंगेतर को बेदर्दी से पीटा गया और उसकी मौत हो गई। याची के परिजनों ने जब उच्चाधिकारियों को शिकायत दी तो तुरंत लीपापोती शुरू कर दी गई और इसे आत्महत्या का मामला बना दिया गया। याचिका दाखिल होने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर 2019 में एसआईटी गठित की गई थी। एसआईटी ने इस मामले में गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करते हुए जांच शुरू की थी।
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पंजाब सरकार ने बताया कि याची ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया था कि मृतका का उसके अलावा कोई भी नहीं था, जबकि एसआईटी के सामने कहा कि युवती के परिजनों का इंतजार किए बगैर जबरन उसका अंतिम संस्कार करवा दिया गया। ऐसे में बयान में बदलाव की दलील देते हुए सीबीआई को जांच न सौंपने की अपील की गई।
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हाईकोर्ट ने एसआईटी की रिपोर्ट देखी तो पाया कि इसमें उस चाकू का जिक्र ही नहीं था जिसकी इस मामले में बेहद अहम भूमिका थी। मृतका के दोनों हाथों की कलाई कटी हुई थी। चाकू मृतका के अंतवस्त्रों में प्राप्त हुआ था जिसे एएसआई सुखदेव सिंह को सौंपा गया था। इसके बाद यह गायब हो गया और इस बारे में न तो पुलिस ने जांच की और न ही एसआईटी ने। बड़ा सवाल यह है कि पुलिस हिरासत में रमनदीप कौर के पास चाकू पहुंचा कहां से और पोस्टमार्टम के बाद वह चाकू गायब कहां हो गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि एसआईटी की जांच में काफी खामियां रहीं और ऐसे में लोगों का कानून पर विश्वास बना रहे इसलिए निष्पक्ष जांच जरूरी है। हाईकोर्ट ने इस मामले जांच सीबीआई को सौंपते हुए तीन महीने में रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।