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हाईकोर्ट ने पंजाब-हरियाणा और चंडीगढ़ के सभी थाने के सीसीटीवी का ब्यौरा किया तलब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 18 Sep 2018 10:57 PM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के सभी पुलिस थानों में सीसीटीसी कैमरा लगाने और इनका चलना सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने अभी तक लगे कैमरों का ब्योरा तलब कर लिया है। तीनों राज्यों को इस बारे में 23 अक्तूबर तक स्टेटस रिपोर्ट सौंपनी होगी।
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रविवार को जालंधर के मकसूदां पुलिस थाने में किए गए बम धमाकों की चर्चा के साथ केस की सुनवाई आरंभ हुई। याची ने कहा कि सीसीटीवी कैमरों के खराब होने के कारण आरोपियों को पकड़ा नहीं जा सका है। चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी एवं जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने इस पर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से उनके राज्यों के पुलिस थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की जानकारी मांग ली है।
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याचिका में अरोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट ने डीके बसु केस में हिरासत में टॉर्चर पर रोक लगाने के लिए जारी दिशा निर्देशों को तत्काल लागू किये जाने की हाईकोर्ट से मांग की है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के तहत गिरफ्तार किए जाने वालों को कुछ अधिकार दिए गए हैं और जेलों में कैमरे इत्यादि के संबंध में निर्देश तय किए थे। अब अरोड़ा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के दो वर्षों बाद भी सरकारों ने इस दिशा में कुछ किया ही नहीं है और हिरासत में अब भी लोगों को यातनाएं दी जा रही हैं।
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जेलों की जांच को महिला समेत तीन नॉन आफिशियल सदस्य नियुक्त करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने जेलों की जांच के लिए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को नॉन-ऑफिशियल सदस्यों की नियुक्ति के भी आदेश दिए हैं। इसमें राज्य विधान सभा के तीन सदस्य जिनमे एक महिला शामिल हो उनकी नियुक्ति की जा सकती है। राज्य मानवाधिकार आयोग द्वारा एक सदस्य के नाम का नामांकन किया जाए और दो सदस्य गैर सरकारी संस्थाओं से होंगे जिनमे एक महिला होनी चाहिए।
यह नॉन-ऑफिशियल सदस्य जेलों का दौरा कर उनकी जांच करेंगे। हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को इन नॉन-ऑफिशियल सदस्यों की 23 अक्तूबर से पहले नियुक्ति कर इसकी जानकारी हाईकोर्ट को दिए जाने के आदेश दे दिए हैं।