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Chandigarh News: सरकार को धीरेंद्र ब्रह्मचारी की संपत्ति का कब्जा लेने का आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द

Tue, 06 Aug 2024 05:07 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 06 Aug 2024 05:07 AM IST
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High Court cancels order to government to take possession of Dhirendra Brahmachari's property
-सिंगल बेंच के समक्ष याचिका दाखिल करने वाली कंपनी पर लगाया एक लाख जुर्माना
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अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। स्वर्गीय योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी की पूरी संपत्ति का कब्जा लेने के राज्य सरकार को जारी सिंगल बेंच के आदेश को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की खंडपीठ ने रद्द कर दिया है। साथ ही याचिका दाखिल करने वाली कंपनी पर हाईकोर्ट ने एक लाख रुपये जुर्माना लगाया है। धीरेंद्र ब्रह्मचारी की अपर्णा आश्रम सोसायटी की जमीन को लेकर गुरुग्राम में सिविल जज (जूनियर डिविजन) मोहिनी की ओर से अपने आदेशों में कहा गया था कि अपर्णा आश्रम सोसायटी की इस जमीन में केएस पठानिया किसी तरह का हस्तक्षेप न करें। न यहां किसी तरह का नया निर्माण किया जाए और न ही कोई और पेशकश करें। उस समय केएस पठानिया ने इस जमीन को बेचने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्री करने की अनुमति मांगी थी। मामले में हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर कहा गया था कि निचली अदालत के आदेश के बावजूद भूमि को बेचा जा रहा है। अवमानना याचिका सुनने वाली एकल पीठ ने 7 मई को पारित आदेश में कहा था कि सोसायटी की स्थापना स्वामी धीरेंद्र ब्रह्मचारी नामक संन्यासी ने की थी। चूंकि वे संन्यासी थे इसलिए उन्होंने दुनिया के सामने घोषणा की थी कि उन्होंने संसार त्याग दिया है। ऐसे व्यक्ति का कोई कानूनी उत्तराधिकारी नहीं हो सकता, जिसने संसार त्याग दिया हो। ऐसी स्थिति में छोड़ी गई संपत्ति संन्यासी की मृत्यु के बाद राज्य की संपत्ति मानी जानी चाहिए। सिंगल बेंच ने कहा था कि धीरेंद्र ब्रह्मचारी और उनके द्वारा स्थापित सोसायटी की पूरी संपत्ति राज्य के पक्ष में चली जानी चाहिए। इस आदेश से व्यथित होकर कंपनी ने अवमानना अपीलीय खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की थी। अपीलकर्ताओं ने तर्क दिया था कि जब संपत्ति के स्वामित्व से संबंधित विवाद विभिन्न न्यायिक मंचों पर लंबित है, तो अवमानना अदालत को उक्त संपत्तियों को राज्य के पक्ष में संपत्ति जारी करने का कोई अधिकार नहीं है। खंडपीठ ने कहा कि एकल न्यायाधीश ने ऐसा आदेश पारित करते समय सिविल न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को अतिक्रमण किया है। खंडपीठ ने कहा कि एकल अवमानना बेंच का फैसला गलत तरीके से दिया गया व प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का भी उल्लंघन है। जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की खंडपीठ ने अपने विस्तृत आदेश में यह भी माना है कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं को अवमानना याचिका दायर करने के बजाय विशिष्ट राहत अधिनियम के तहत सिविल मुकदमा दायर करना चाहिए था। पीठ ने अवमानना याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ताओं पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। खंडपीठ ने यह आदेश रेडॉक्स टैडेक्स प्राइवेट लिमिटेड की अपील पर सुनवाई करते हुए पारित किए हैं।
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