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पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा को राहत: प्लॉट अलॉटमेंट घोटाले में दर्ज मामला हाईकोर्ट ने किया रद्द
Fri, 20 Dec 2024 09:20 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 20 Dec 2024 09:20 PM IST
सार
पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा और 10 सरकारी अधिकारियों के खिलाफ एक औद्योगिक भूखंड को एक रियल एस्टेट कंपनी को हस्तांतरित करने और उसे टाउनशिप स्थापित करने की अनुमति देने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए विजिलेंस ब्यूरो की ओर से 5 जनवरी, 2023 को मोहाली में दर्ज एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है। एफआईआर में आईएएस अधिकारी नीलिमा समेत पंजाब राज्य औद्योगिक निर्यात निगम के 10 सरकारी अधिकारियों/ कर्मचारियों के नाम भी शामिल थे। यह मामला एक इंडस्ट्रियल प्लॉट को डेवलपर के साथ मिलकर टाउनशिप स्थापित करने की मंजूरी देने से जुड़ा है। इस केस में रियल एस्टेट फर्म गुलमोहर टाउनशिप के तीन मालिकों को भी नामजद किया गया था।
यह है मामला
पंजाब सरकार ने साल 1987 में आनंद लैंप्स लिमिटेड कंपनी को सेल डीड के माध्यम से 25 एकड़ जमीन अलॉट की थी। यह कंपनी बाद में सिगनीफाई इनोवेशन नामक फर्म में तब्दील हो गई। सिगनीफाई इनोवेशन कंपनी ने पंजाब स्टेट इंड्रस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (पीएसआईडीसी) से एनओसी लेकर इस प्लाॅट को गुलमोहर टाउनशिप को बेच दिया था। तत्कालीन उद्योग मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा ने गुलमोहर टाउनशिप के उक्त प्लाॅट को कई हिस्सों में बांटने के पत्र को एमडी पीएसआईडीसी को भेज दिया था और पीएसआईडीसी के अधिकारियों ने फाइलों को देखे बिना टाउनशिप बसाने की मंजूरी दे दी थी।
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गत वर्ष हाईकोर्ट ने अरोड़ा को जमानत दी थी। हाईकोर्ट में दायर याचिका में अरोड़ा ने आरोप लगाया थ कि उसे फंसाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने अब इस मामले में उनके खिलाफ एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया है।
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पंजाब सरकार ने साल 1987 में आनंद लैंप्स लिमिटेड कंपनी को सेल डीड के माध्यम से 25 एकड़ जमीन अलॉट की थी। यह कंपनी बाद में सिगनीफाई इनोवेशन नामक फर्म में तब्दील हो गई। सिगनीफाई इनोवेशन कंपनी ने पंजाब स्टेट इंड्रस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (पीएसआईडीसी) से एनओसी लेकर इस प्लाॅट को गुलमोहर टाउनशिप को बेच दिया था। तत्कालीन उद्योग मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा ने गुलमोहर टाउनशिप के उक्त प्लाॅट को कई हिस्सों में बांटने के पत्र को एमडी पीएसआईडीसी को भेज दिया था और पीएसआईडीसी के अधिकारियों ने फाइलों को देखे बिना टाउनशिप बसाने की मंजूरी दे दी थी।
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