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समय पर हेपेटाइटिस सी की जांच कराएंगे तो नहीं होगी ये बीमारी
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 20 Apr 2016 12:13 PM IST
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- फोटो : getty images
विश्व में सबसे ज्यादा लीवर हेपेटाइटिस सी वायरस की वजह से खराब होते हैं। यह एक ऐसा वायरस है, जो एक बार शरीर में दाखिल हो गया तो लीवर को नष्ट कर देता है। 90 प्रतिशत मामलों में इसका कोई लक्षण नजर नहीं आता। दस से पांच प्रतिशत केस में ही हेपेटाइटिस के लक्षण सामने आते हैं।
पीजीआई हीप्टोलाजी डिपार्टमेंट के विशेषज्ञों के मुताबिक इससे बचने का एक ही उपाय है कि लोग समय-समय पर जांच करवाते रहें। खासकर उन इलाकों के लोगों को, जहां इस बीमारी की आशंका सबसे ज्यादा है। डिपार्टमेंट के प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह ने बताया कि पंजाब व हरियाणा के कुछ इलाकों में हेपेटाइटिस सी काफी तेजी से फैला है।
चेकअप करवाते रहें, ताकि बीमारी जल्दी पकड़ में आए
पंजाब के संगरूर, मालेरकोटला, अमृतसर और हरियाणा के रतिया, कैथल और कुरुक्षेत्र से हेपेटाइटिस सी के काफी मरीज हैं। न्यू ओपीडी में इन इलाकों से आने वाले मरीजों की संख्या काफी अधिक होती है। यहां के लोगों को चाहिए कि वे अपनी हेपेटाइटिस सी की जांच करवाएं। यदि शुरुआत में बीमारी पकड़ में आ जाए तो उसका 100 प्रतिशत इलाज संभव है।
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मालेरकोटला में 30 प्रतिशत से ज्यादा लोग पॉजिटिव
कुछ समय पहले मालेरकोटला में एक कैंप लगाया गया था, जहां 30 प्रतिशत से ज्यादा लोग हेपेटाइटिस सी पॉजिटिव पाए गए थे। हेपेटाइटिस सी का टेस्ट मात्र 150-200 रुपये में हो जाता।
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पीजीआई हीप्टोलाजी डिपार्टमेंट के विशेषज्ञों के मुताबिक इससे बचने का एक ही उपाय है कि लोग समय-समय पर जांच करवाते रहें। खासकर उन इलाकों के लोगों को, जहां इस बीमारी की आशंका सबसे ज्यादा है। डिपार्टमेंट के प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह ने बताया कि पंजाब व हरियाणा के कुछ इलाकों में हेपेटाइटिस सी काफी तेजी से फैला है।
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चेकअप करवाते रहें, ताकि बीमारी जल्दी पकड़ में आए
पंजाब के संगरूर, मालेरकोटला, अमृतसर और हरियाणा के रतिया, कैथल और कुरुक्षेत्र से हेपेटाइटिस सी के काफी मरीज हैं। न्यू ओपीडी में इन इलाकों से आने वाले मरीजों की संख्या काफी अधिक होती है। यहां के लोगों को चाहिए कि वे अपनी हेपेटाइटिस सी की जांच करवाएं। यदि शुरुआत में बीमारी पकड़ में आ जाए तो उसका 100 प्रतिशत इलाज संभव है।
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मालेरकोटला में 30 प्रतिशत से ज्यादा लोग पॉजिटिव
कुछ समय पहले मालेरकोटला में एक कैंप लगाया गया था, जहां 30 प्रतिशत से ज्यादा लोग हेपेटाइटिस सी पॉजिटिव पाए गए थे। हेपेटाइटिस सी का टेस्ट मात्र 150-200 रुपये में हो जाता।
इन कारणों से होता है हेपेटाइटिस सी
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- फोटो : getty images
हेपेटाइटिस सी संक्रमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन, संक्रमित इंजेक्शन के इस्तेमाल, एचआईवी पीड़ित से सेक्स समेत अन्य कारणों से होता है।
ऐसे बचाएं अपने लीवर को
1. अधिक मात्रा में शराब न पीएं
2. नीडल के माध्यम से ड्रग्स न लें।
3. अच्छे ब्लड बैंक से ही ब्लड लें।
4. शुगर और वजन को कंट्रोल रखें।
5. टीबी का इलाज चल रहा है तो लीवर की जांच करवाते रहें।
ऐसे बचाएं अपने लीवर को
1. अधिक मात्रा में शराब न पीएं
2. नीडल के माध्यम से ड्रग्स न लें।
3. अच्छे ब्लड बैंक से ही ब्लड लें।
4. शुगर और वजन को कंट्रोल रखें।
5. टीबी का इलाज चल रहा है तो लीवर की जांच करवाते रहें।
बीमारी बढ़ती जा रही, हीप्टोलाजिस्ट की कमी
कैंसर के मरीजों का आधुनिक मशीनों से होगा इलाज
- फोटो : demo pic
जिस हिसाब से लीवर की बीमारी बढ़ रही है, उसके मुकाबले हीप्टोलाजिस्ट (लीवर के डॉक्टर) की संख्या काफी कम है। पीजीआई में छह साल पहले ही हीप्टोलॉजिस्ट की पढ़ाई शुरू हुई है। एम्स अब तक इसका कोर्स शुरू नहीं कर सका है। उत्तर भारत में पीजीआई के अलावा दिल्ली के आईएलबीएस में इसकी पढ़ाई की जाती है। रोहतक पीजीआई में भी सिर्फ एक ही हीप्टोलॉजिस्ट है। हालांकि इन इलाकों में गेस्ट्रोएंट्रोलाजी के डॉक्टर ही इन मरीजों को देखते हैं।
डॉक्टरों की ट्रेनिंग के लिए शुरू किया इको प्रोग्राम
डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया है कि डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए इको प्रोग्राम शुरू किया गया है। इसके तहत फिजीशियन को हेपेटाइटिस सी के डाइग्नोज व ट्रीटमेंट की ट्रेनिंग देने का प्रोग्राम शुरू किया गया है। हरियाणा व पंजाब के डॉक्टरों को ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि उनका इलाज उन्हीं इलाकों में हो सके। इससे पीजीआई में भीड़ भी कम होगी और मरीजों को उनके इलाके में ही इलाज मिल पाएगा। हरियाणा व पंजाब में सेंटरों की पहचान की जा रही है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पीजीआई के डॉक्टर उन्हें ट्रेनिंग देंगे।
डॉक्टरों की ट्रेनिंग के लिए शुरू किया इको प्रोग्राम
डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया है कि डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए इको प्रोग्राम शुरू किया गया है। इसके तहत फिजीशियन को हेपेटाइटिस सी के डाइग्नोज व ट्रीटमेंट की ट्रेनिंग देने का प्रोग्राम शुरू किया गया है। हरियाणा व पंजाब के डॉक्टरों को ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि उनका इलाज उन्हीं इलाकों में हो सके। इससे पीजीआई में भीड़ भी कम होगी और मरीजों को उनके इलाके में ही इलाज मिल पाएगा। हरियाणा व पंजाब में सेंटरों की पहचान की जा रही है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पीजीआई के डॉक्टर उन्हें ट्रेनिंग देंगे।