आने वाली है हार्ट, ब्रेन अटैक की सस्ती दवा
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हार्ट व ब्रेन अटैक की सबसे सस्ती व सबसे असरदार दवा जल्द आने की संभावना है। चंडीगढ़ स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबायल टेक्नोलॉजी (इमटेक) की दवा का पहला फेज सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। अब दूसरे फेज की तैयारी है।
दूसरे फेज में इसका ट्रायल इंसानों पर होगा। इसकी स्वीकृति भी ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने हाल ही में दे दी है। इमटेक के डायरेक्टर डॉ. गिरीश साहनी ने बताया कि यह भारत की पहली बायोथैरेपिक दवा है।
बाहर के देशों में इस स्तर की दवा का रेट कम से कम 30 से 40 हजार रुपये है। जब यह दवा बनकर तैयार होगी तो इसका मूल्य मात्र दो से चार हजार रुपये के बीच में होगा। ट्रायल की तैयारी शुरू कर दी गई है।
उन्होंने पूरी उम्मीद जताई कि यह दवा साल 2015 या 16 के शुरुआती दिनों में आ जाएगी। इस दवा के प्रयोग से हार्ट व ब्रेन स्ट्रोक के दौरान मरने वाले लाखों लोगों को बचाया जा सकेगा।
दवा का एक साइड इफेक्ट
डा. साहनी के मुताबिक, भारत में सबसे पहले इमटेक ने ही क्लाट बस्टर स्ट्रेप्टोनाइज इंजेक्शन की तकनीक तैयार की थी। बाजार में इस दवा के आने से लोगों को काफी फायदा पहुंचा।
कई मरीजों की जान बचाई गई। यह दवा धमनियों में जमा होने वाले रक्त के थक्के को हटाता है। दवा का एक साइड इफेक्ट भी था। इससे ब्लीडिंग का रिस्क बढ़ता था और यह पूरे शरीर में जाता था।
इसकी जगह टिश्यू प्लासमिनोजेन एक्टीवेटर (टीपीए) का प्रयोग किया जाता है। टीपीए सीधे क्लाट पर ही एक्टिव होता है। यानी जहां-जहां रक्त के थक्के जमा होंगे, उसे हटा देगा। यह काफी सेफ और असरदार है।
बाजार में इसकी कीमत करीब 30-40 हजार रुपये है, लेकिन इमटेक ने टीपीए के ही सामांतर कई गुना सस्ती दवा इजाद कर ली है। इसका पहला ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। अब दूसरे फेज के ट्रायल की तैयारी है। यह भी सीधे क्लाट पर एक्टिव होगा और करीब दो घंटे तक काम करेगा।
न्यू जर्सी की कंपनी नास्ट्रम को दिया था लाइसेंस
डॉ. साहनी के मुताबिक क्लाट बस्टर के नए वर्जन को बनाने लाइसेंस साल 2006 में न्यूजर्सी की एक कंपनी नास्ट्रम फार्माक्यूटिकल्स को दिया था।
पहले उन्होंने इंडिया की कई कंपनियों से संपर्क किया, लेकिन कोई भी इस टेक्नोलॉजी को लेने के लिए तैयार नहीं हुआ था। बाद में यूएस की कंपनी को लाइसेंस दे दिया गया।
इसके बाद इमटेक की देखरेख में ही इसको विकसित किया जा रहा है। सात साल की कड़ी मेहनत के बाद दवा का पहला ट्रायल सफलता पूर्वक पूरा किया गया।
कब काम करती है दवा
हृदय को रक्त आपूर्ति करने वाली धमनियों में जब रक्त के थक्के जम जाते हैं तो रक्त का प्रवाह पूरी तरह से या फिर आंशिक रूप से अवरुद्ध हो जाता है।
इससे हृदय को आक्सीजन की आपूर्ति नहीं होती। इससे हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। 80-90 प्रतिशत हार्ट अटैक का कारण खून का जमना होता है। हार्ट अटैक के बाद मरीजों को क्लाट बर्स्टिंग ड्रग दिया जाता है, जो रक्त के थक्के को हटाता है।
इससे खून का बहाव तेज होता है और मरीज को बचाया जाता है। इसके बाद प्राथमिक एंजियोप्लास्टी की जाती है। यदि मरीजों को क्लाट बर्स्टिंग ड्रग मौके पर न दिया जाए तो उनकी जान बचाना मुश्किल होता है।