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पंजाब सरकार को झटका: बिक्रम मजीठिया को मिली अंतरिम जमानत, हाईकोर्ट ने दिए जांच में शामिल होने के आदेश

Mon, 10 Jan 2022 03:51 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 10 Jan 2022 03:51 PM IST
सार

बिक्रम मजीठिया के खिलाफ मोहाली में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में मजीठिया ने पहले मोहाली की जिला अदालत में याचिका दायर कर अग्रिम जमानत की मांग की थी। मोहाली की अदालत से याचिका खारिज होने के बाद मजीठिया ने हाईकोर्ट की शरण ली थी।

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Akali leader Bikram Majithia gets anticipatory bail
बिक्रम मजीठिया की अग्रिम जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को पंजाब सरकार को झटका देते हुए ड्रग्स केस में फंसे वरिष्ठ अकाली नेता व विधायक बिक्रम सिंह मजीठिया को अंतरिम जमानत दे दी है। साथ ही अदालत ने अकाली नेता को जांच में सहयोग करने का आदेश दिया है। मजीठिया ने अग्रिम जमानत मांगी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत दी है। अग्रिम के लिए हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से जवाब मांगा है। 

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20 दिसंबर को उनके खिलाफ पंजाब पुलिस ने नशे की तस्करी के आरोप में विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। उसके बाद से मजीठिया लापता चल रहे थे। पुलिस ने कई जगह छापे मारे लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं आए। हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में मजीठिया ने कहा कि उनके खिलाफ एफआईआर राजनीतिक दुर्भावना और रंजिश के तहत दर्ज करवाई गई है। 
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सत्ताधारी दल ने चुनाव में इसका फायदा उठाने के लिए ऐसा किया है। वहीं पंजाब सरकार की ओर से कहा गया कि यह केस तथ्यों के आधार पर दर्ज किया गया है और मजीठिया से पूछताछ जरूरी है। पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट से अपील की है कि मजीठिया की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज किया जाए। सोमवार को मजीठिया की ओर से मुकुल रोहतगी और पंजाब सरकार के लिए सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट पी चिदंबरम ने बहस की। 

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मोहाली में दर्ज किया गया था केस

मजीठिया के खिलाफ मोहाली में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में मजीठिया ने पहले मोहाली की जिला अदालत में याचिका दायर कर अग्रिम जमानत की मांग की थी। मोहाली की अदालत से याचिका खारिज होने के बाद मजीठिया ने हाईकोर्ट की शरण ली है। मजीठिया ने याचिका में कहा कि उनके खिलाफ यह एफआईआर राजनीतिक दुर्भावना और रंजिश के तहत दर्ज करवाई गई है।



राज्य में सत्ताधारी दल ने आगामी चुनाव में इसका फायदा उठाने के लिए ऐसा किया है। याची ने कहा कि उस पर लगे सभी आरोप निराधार हैं। वहीं पंजाब सरकार की ओर से कहा गया कि यह केस तथ्यों के आधार पर दर्ज किया गया है और मजीठिया से पूछताछ जरूरी है। ऐसे में पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट से अपील की थी कि मजीठिया की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज किया जाए।

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