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स्वास्थ्य केंद्रों की खुद उखड़ रही सांस, खाक होगा मरीजों का इलाज

Fri, 15 Oct 2021 02:18 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 15 Oct 2021 02:18 AM IST
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Health centers themselves are getting out of breath, patients will be treated
फोटो- करुण, अमित और वीणा के ट्रैक पर
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स्वास्थ्य केंद्रों की उखड़ रही सांस, यहां कैसे होगा मरीजों का इलाज
-कहीं गिर रहा छप्पर तो कहीं बिल्डिंगों की हालत जर्जर
स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने की सड़क की हालत भी खस्ता
क्रॉसर
ये है हकीकत : खुड्डालाहौरा में छप्पर गिर जाने से डॉक्टर ने बैठने से किया इनकार
उन्हें जीएमएसएच-16 किया जा चुका है स्थानांतरित
- स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थिति खराब, कहीं स पर्क मार्ग ध्वस्त तो कहीं बिल्डिंग जर्जर अवस्था में
- स्वास्थ्य विभाग का दावा हवा हवाई, क्षेत्र की जनता को नहीं मिल पा रहा इलाज
वीणा तिवारी
चंडीगढ़। सरकारी अस्पतालों में मरीजों का दबाव कम करने के लिए स्वास्थ्य केन्द्रों को बेहतर करने की योजना बनाई जा रही है। पुराने केंद्रों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का नाम देकर विकसित करने का दावा किया जा रहा है। लेकिन हकीकत में स्वास्थ्य केन्द्र अपनी बदहाल स्थिति से कराह रहे हैं। किसी केंद्र की छत टपक रही है तो छप्पर गिर रहा है, कहीं मरीजों को बैठने तक की जगह नहीं है। लोगों की शिकायतों पर भी सुनवाई नहीं हो रही है। इन बदहाल स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रतिदिन सैकड़ों मरीज इलाज कराने व टीका लगवाने पहुंच रहे हैं, लेकिन उनकी सुविधा की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है।
इन केंद्रों की सुध कौन लेगा
1. खुड्डालाहौरा
दो कमरे में चल रहा स्वास्थ्य केंद्र, दीवार जर्जर, गिर रहा है प्लास्टर
स्वास्थ्य केंद्र के नाम पर खुड्डालाहौरा में दो कमरे वाला भवन आवंटित किया गया है। एक कमरे में एएनएम बैठती हैं और दूसरे में डॉक्टर, फार्मासिस्ट और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी। यहां भी मरीजों को इलाज कराने से पहले अपनी बारी आने तक केंद्र के बाहर ही इंतजार करना पड़ता है। केंद्र की दीवार जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह से प्लास्टर झड़कर गिर रहा है।
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डर के मारे 2015 से केंद्र पर नहीं बैठते डॉक्टर
केंद्र की स्थिति इतनी जर्जर है कि वहां डॉक्टर और कर्मचारी ड्यूटी करने से डरते हैं। 2015 में छप्पर गिर जाने के बाद से वहां तैनात डॉक्टर ने केंद्र में बैठने से इनकार कर दिया। उन्हें जीएमएसएच-16 में स्थानांतरित किया जा चुका है। उनकी जगह कोई और डॉक्टर तैनात नहीं किया गया है। 10 हजार की आबादी वाले इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।
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2. हल्लोमाजरा स्वास्थ्य केंद्र
डगर बड़ी कठिन इन केन्द्रों की
हल्लोमाजरा स्वास्थ्य केंद्र के बाहर की सड़क दो साल से खराब पड़ी है। बरसात के दौरान यहां से गुजरना मुश्किल होता है। कई मरीज गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। बिना बरसात के भी वहां 12 महीने जलभराव रहता है। लोगों का कहना है कि सरकारी सुविधा के नाम पर केवल दावे किए जाते हैं, हकीकत कुछ और होती है। यही हाल सारंगपुर स्वास्थ्य केंद्र को जाने वाले मार्ग का है। लोगों का कहना है कि सरकारी सुविधा के नाम पर केवल दावे किए जाते हैं।
3. दड़वा स्वास्थ्य केंद्र
भवन की दयनीय हालत, मरीजों के लिए बैठने की जगह तक नहीं
दड़वा स्वास्थ्य केंद्र को ऐसे स्थान पर बनाया गया है, जहां मरीजों के बैठने तक के लिए जगह नहीं है। मरीजों को केंद्र के बाहर ही पेड़ की छांव में बैठना पड़ रहा है। केंद्र के पास ही आए दिन सार्वजनिक आयोजन होते हैं। शोर के बीच इलाज करने व करवाने वालों को परेशानी झेलनी पड़ती है। भवन को देखकर लगता ही नहीं कि यह चंडीगढ़ जैसे आधुनिक शहर का स्वास्थ्य केंद्र है। भवन में फंगल भी लग चुका है। जानकारी के अनुसार 2016 के बाद से यहां सफेदी भी नहीं हुई है।
क्या कहते हैं लोग
केंद्रों की हालत बदतर, कोई देखने वाला नहीं
सरकार जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने की योजनाएं बना रही है, उसका लाभ ही नहीं मिल रहा। जिसे देखों वो अपनी जेब भरने में लगा हुआ है। स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति इतनी बदतर है कि वहां जाने की बजाय निजी अस्पताल में इलाज कराना ज्यादा बेहतर लगता है।
-मोहित बटवाल, धनास
सुविधा देने की बात कही जाती, लेकिन मिलता कुछ नहीं
जनता से टैक्स लेकर सुविधाएं देने की बात कही जाती है, लेकिन मिलता कुछ नहीं। चंडीगढ़ जैसे आधुनिक शहर में स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति इतनी बदहाल है तो अन्य जगह पर क्या होगा, इसका अनुमान लगाया जा सकता है।

रवि राणा, सेक्टर 52
कोट...
जर्जर स्वास्थ्य केंद्र के संदर्भ में निदेशक स्वास्थ्य को निर्देशित किया गया है कि संबंधित केंद्रों की सूची बनाकर इंजीनियरिंग विभाग के साथ बैठक कर मरम्मत की रूपरेखा शीघ्र तैयार करें।
यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव
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