{"_id":"6a83420e8fa51ea9e872d2ca26b078a7","slug":"hc-directs-punjab-to-argue-on-174-crpc-in-ashutosh-maharaj-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"आशुतोष महाराज प्रकरणः 174 सीआरपीसी पर टिका मामला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आशुतोष महाराज प्रकरणः 174 सीआरपीसी पर टिका मामला
सुमेश ठाकुर/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 18 Mar 2014 04:29 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज का मामला अब 174 सीआरपीसी और पंजाब पुलिस रूल 1934 के नियम 29.31 पर टिक गया है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को सुझाव दिया कि अभी तक इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है और न ही इस मामले की कोई जांच चल रही है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीआरपीसी 174 के तहत पुलिस अधिकारी अपने स्तर पर कार्रवाई कर सकता है और मौत के कारणों को जान सकता है। वहीं पंजाब पुलिस रूल 29.31 के तहत मामले पर जांच बैठाई जा सकती है ताकि ये पता चल पाए कि मौत जहर देने के कारण, हिंसा या फिर दूसरे कारणों से हुई है।
हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की मजिस्ट्रियल जांच भी हो सकती है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई के दौरान वह कोर्ट के इन सुझावों पर अपनी दलीलें पेश करे।
विज्ञापन
वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट ने याची पक्ष को भी निर्देश दिया कि वह याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर अपनी बहस पूरी करे। मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च निर्धारित की गई है।
विज्ञापन
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को सुझाव दिया कि अभी तक इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है और न ही इस मामले की कोई जांच चल रही है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीआरपीसी 174 के तहत पुलिस अधिकारी अपने स्तर पर कार्रवाई कर सकता है और मौत के कारणों को जान सकता है। वहीं पंजाब पुलिस रूल 29.31 के तहत मामले पर जांच बैठाई जा सकती है ताकि ये पता चल पाए कि मौत जहर देने के कारण, हिंसा या फिर दूसरे कारणों से हुई है।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की मजिस्ट्रियल जांच भी हो सकती है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई के दौरान वह कोर्ट के इन सुझावों पर अपनी दलीलें पेश करे।
विज्ञापन
वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट ने याची पक्ष को भी निर्देश दिया कि वह याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर अपनी बहस पूरी करे। मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च निर्धारित की गई है।