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सच बोलने का माद्दा रखें ः मुकुंद शर्मा
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मुकुंद शर्मा
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चंडीगढ़। पंजाब के मशहूर रंगकर्मी गुरशरण और मशहूर कॉमेडियन स्वर्गीय जसपाल भट्टी का काम मुझे इतना प्रभावित कर गया कि फिर कभी सच बोलने से घबराया नहीं। उन्हीं के काम का प्रभाव है जो उन्हें मंच या हर परिस्थिति में हमेशा सच बोलने की प्रेरणा देता रहा। कुछ इन बातों केसाथ टीवी व फिल्म जगत की जानी मानी शख्सियत बाल मुकुंद शर्मा मंगलवार को टीएफटी फेस्ट के दौरान सिटी के दर्शकों से रूबरू हुए। युवा रंगकर्मी सौरभ शर्मा ने उनसे सवालातों के सिलसिले को आगे बढ़ाया।
पंजाब के गांव लोहियां खास में जन्मे बाल मुकुंद ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही स्कूल से ही प्राप्त की और एग्रीकल्चर की पढ़ाई के लिए लुधियाना की पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। बचपन में अपने बड़े भाइयों के सानिध्य में ही उन्होंने ऐतिहासिक और धार्मिक नाटकों में भाग लेना शुरू कर दिया था। मैट्रिक में पूरे जिले में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले बाल मुकुंद कॉलेज में अपने पढ़ाई के दौरान पंजाबी रंगमंच के दिग्गजों जसविंदर भल्ला, गुरप्रीत सिंह तूर से मिले। उनके साथ के कारण हास्य व्यंग्य की शैलियों की तरफ आकर्षित हुए। 1982 में यूनिवर्सिटी में बीएससी की डिग्री लेते हुए गोल्ड मैडल हासिल करने वाले बाल मुकुंद शर्मा ने अपने सहपाठी जसविंदर भल्ला के साथ शुरू हुआ अपनी कला का सफर यूथ फेस्टिवल और अनेकों कार्यक्रमों में भी जारी रखा।
.. तो सरकारी प्रतिनिधि को मांगनी पड़ी माफी
क्या कभी समाज और व्यवस्था पर कटाक्ष कर उन्हें किसी की मुसीबत का सामना करना पड़ा, इस सवाल पर उन्होंने बताया कि दूरदर्शन पर नशे पर आधारित कटाक्ष की 175 कड़ियां एवं लगभग र्कई वर्ष छंकाटा की 27 कामयाब ऑडियो एवं वीडियो कैसेट बेहद चर्चित रही, परंतु इस प्रसिद्ध श्रंखला ‘छंकाटा’ में किया गया व्यंग्य सरकार को नागवार गुजरा था और उन्हें इसके लिए चेतावनी भी दी गयी, लेकिन उस वक्त जसपाल भट्टी सरीखे पंजाब के अन्य कलाकारों ने सरकार के इस कदम का पुरजोर विरोध किया जिसका नतीजा यह निकला कि सरकारी प्रतिनिधि को उनसे माफी मांगनी पड़ी।
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युवा कलाकार समय बरतें
डिजिटल प्लेटफार्म को युवा कलाकारों के लिए एक बेहतरीन प्लेटफार्म करार देते हुए कहा कि पहले के मुकाबले आजकल कलाकारों के लिए ज्यादा अवसर है, परंतु संयम की कमी चिंता का विषय है। मुंबई या बड़े एक्टिंग इंस्टीट्यूट की भेड़चाल में शामिल होने की जल्दी में युवाओं को सीखते रहने पर जोर देने की सलाह दी। साथ ही कहा कि उन्हें निरंतर अपने क्राफ्ट को शिद्दत से सीखने पर ध्यान देना चाहिए। पूरी ईमानदारी से की गई मेहनत कभी विफल नहीं जाती।
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पंजाब के गांव लोहियां खास में जन्मे बाल मुकुंद ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही स्कूल से ही प्राप्त की और एग्रीकल्चर की पढ़ाई के लिए लुधियाना की पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। बचपन में अपने बड़े भाइयों के सानिध्य में ही उन्होंने ऐतिहासिक और धार्मिक नाटकों में भाग लेना शुरू कर दिया था। मैट्रिक में पूरे जिले में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले बाल मुकुंद कॉलेज में अपने पढ़ाई के दौरान पंजाबी रंगमंच के दिग्गजों जसविंदर भल्ला, गुरप्रीत सिंह तूर से मिले। उनके साथ के कारण हास्य व्यंग्य की शैलियों की तरफ आकर्षित हुए। 1982 में यूनिवर्सिटी में बीएससी की डिग्री लेते हुए गोल्ड मैडल हासिल करने वाले बाल मुकुंद शर्मा ने अपने सहपाठी जसविंदर भल्ला के साथ शुरू हुआ अपनी कला का सफर यूथ फेस्टिवल और अनेकों कार्यक्रमों में भी जारी रखा।
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.. तो सरकारी प्रतिनिधि को मांगनी पड़ी माफी
क्या कभी समाज और व्यवस्था पर कटाक्ष कर उन्हें किसी की मुसीबत का सामना करना पड़ा, इस सवाल पर उन्होंने बताया कि दूरदर्शन पर नशे पर आधारित कटाक्ष की 175 कड़ियां एवं लगभग र्कई वर्ष छंकाटा की 27 कामयाब ऑडियो एवं वीडियो कैसेट बेहद चर्चित रही, परंतु इस प्रसिद्ध श्रंखला ‘छंकाटा’ में किया गया व्यंग्य सरकार को नागवार गुजरा था और उन्हें इसके लिए चेतावनी भी दी गयी, लेकिन उस वक्त जसपाल भट्टी सरीखे पंजाब के अन्य कलाकारों ने सरकार के इस कदम का पुरजोर विरोध किया जिसका नतीजा यह निकला कि सरकारी प्रतिनिधि को उनसे माफी मांगनी पड़ी।
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युवा कलाकार समय बरतें
डिजिटल प्लेटफार्म को युवा कलाकारों के लिए एक बेहतरीन प्लेटफार्म करार देते हुए कहा कि पहले के मुकाबले आजकल कलाकारों के लिए ज्यादा अवसर है, परंतु संयम की कमी चिंता का विषय है। मुंबई या बड़े एक्टिंग इंस्टीट्यूट की भेड़चाल में शामिल होने की जल्दी में युवाओं को सीखते रहने पर जोर देने की सलाह दी। साथ ही कहा कि उन्हें निरंतर अपने क्राफ्ट को शिद्दत से सीखने पर ध्यान देना चाहिए। पूरी ईमानदारी से की गई मेहनत कभी विफल नहीं जाती।