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हरियाणा महिला आयोग की पूर्व चेयरमैन को हाईकोर्ट से बड़ा झटका
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 26 May 2017 09:30 AM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
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हाईकोर्ट ने हरियाणा महिला आयोग की पूर्व चेयरमैन कमलेश पांचाल की याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में पांचाल ने अपने कार्यकाल में विस्तार की मांग की थी।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में पांचाल ने बताया कि उनकी नियुक्ति 22 मई 2014 को एक अधिसूचना के तहत हुड्डा सरकार ने अध्यक्ष पद पर की थी।
हरियाणा महिला आयोग एक्ट-2002 के तहत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का कार्यकाल अधिकतम तीन साल या रिटायरमेंट की आयु 60 की उम्र (जो भी पहले हो) लागू है। लेकिन 4 अगस्त 2015 को भाजपा सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर दोनों के कार्यकाल का समय घटाकर इनको पद मुक्त करने का आदेश जारी कर दिया।
राज्य सरकार के इस फैसले को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। नियमों के अनुसार, उनका कार्यकाल तीन साल या 60 साल की उम्र (जो भी पहले हो) तक है। सरकार ने 22 मई 2014 को उनकी नियुक्ति की थी। ऐसे में उनको कार्यकाल से पहले हटाना गलत है। याचिका में आरोप लगाया गया कि हरियाणा सरकार को यह अधिकार नहीं है कि वह उनके कार्यकाल की अवधि में कटौती करे।
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हाईकोर्ट ने उनकी याचिका का निपटारा करते हुए हरियाणा सरकार के आदेश पर रोक लगा दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि 4 अगस्त से कोर्ट का फैसला आने तक अगले वर्ष 17 मई 2016 तक उनको काम नहीं करने दिया गया। अत: उनको इस समय अवधि के बदले इतने समय का सेवा विस्तार दिया जाए और उनके वेतन-भत्ते जारी किए जाएं।
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि सेवा विस्तार की मांग के बारे में कोई आदेश नहीं दे सकते। कोर्ट ने सरकार को सेवा से वंचित रखने की अवधि के दौरान पांचाल के बनते वेतन और भत्ते जारी करने का निर्देश दिया है।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में पांचाल ने बताया कि उनकी नियुक्ति 22 मई 2014 को एक अधिसूचना के तहत हुड्डा सरकार ने अध्यक्ष पद पर की थी।
हरियाणा महिला आयोग एक्ट-2002 के तहत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का कार्यकाल अधिकतम तीन साल या रिटायरमेंट की आयु 60 की उम्र (जो भी पहले हो) लागू है। लेकिन 4 अगस्त 2015 को भाजपा सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर दोनों के कार्यकाल का समय घटाकर इनको पद मुक्त करने का आदेश जारी कर दिया।
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राज्य सरकार के इस फैसले को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। नियमों के अनुसार, उनका कार्यकाल तीन साल या 60 साल की उम्र (जो भी पहले हो) तक है। सरकार ने 22 मई 2014 को उनकी नियुक्ति की थी। ऐसे में उनको कार्यकाल से पहले हटाना गलत है। याचिका में आरोप लगाया गया कि हरियाणा सरकार को यह अधिकार नहीं है कि वह उनके कार्यकाल की अवधि में कटौती करे।
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हाईकोर्ट ने उनकी याचिका का निपटारा करते हुए हरियाणा सरकार के आदेश पर रोक लगा दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि 4 अगस्त से कोर्ट का फैसला आने तक अगले वर्ष 17 मई 2016 तक उनको काम नहीं करने दिया गया। अत: उनको इस समय अवधि के बदले इतने समय का सेवा विस्तार दिया जाए और उनके वेतन-भत्ते जारी किए जाएं।
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि सेवा विस्तार की मांग के बारे में कोई आदेश नहीं दे सकते। कोर्ट ने सरकार को सेवा से वंचित रखने की अवधि के दौरान पांचाल के बनते वेतन और भत्ते जारी करने का निर्देश दिया है।