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10 हजार करोड़ के वैट रिफंड घोटाले में आया नया मोड़, दो अफसर नपेंगे अब
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 27 May 2017 01:25 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा के 10618 करोड़ के बहुचर्चित वैट रिफंड घोटाले में नया मोड़ आ गया है। दो अफसर घेरे में आए हैं और उन पर गाज गिर सकती है। शिकायतकर्ता कैथल निवासी सतबीर किछाणा की तीन अप्रैल 2015 को सौंपी शिकायत पर लोकायुक्त जस्टिस एनके अग्रवाल की अदालत ने जांच कराने का निर्णय लिया है। 141/2015 में किछाणा ने वैट रिफंड घोटाले में प्रदेश के अधिकांश डिप्टी टैक्सेशन आफिसर (डीटीसी) और एक्साइज एंड टैक्सेशन आफिसर (ईटीओ) के भी शामिल होने का संदेह जताया है,
साथ ही शिकायत के साथ कुछ दस्तावेज भी सौंपे है। किछाणा के अनुसार वैट रिफंड घोटाले की गहन जांच हो तो यह एक लाख करोड़ से अधिक का निकलेगा। उन्होंने लोकायुक्त से इसकी जांच नए सिरे से एसआईटी गठित कर करवाने की मांग की है। 2015 में दी गई शिकायत अभी तक ठंड बस्ते में थी, लेकिन लोकायुक्त ने किछाणा की दलीलों को मानते हुए उसे स्वीकार कर रजिस्ट्रार को जांच करने के लिए कहा है।
इस मामले में जिन दर्जनों ईटीओ और डीटीसी पर वैट रिफंड घोटाले में संलिप्त होने के आरोप किछाणा ने लगाए हैं, रजिस्ट्रार उन्हें जांच में शामिल होने के लिए समन करेंगे। लोकायुक्त जस्टिस एनके अग्रवाल जांच 23 मई को रजिस्ट्रार को सौंपी है।
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सिर्फ दस प्रतिशत के पास लाइसेंस
शिकायतकर्ता सतबीर किछाणा ने बताया कि रेवाड़ी, फरीदाबाद, गुरुग्राम, बहादुरगढ़, सोनीपत व मानेसर में लगभग 776 डेवलपर्स, बिल्डर्स और कांट्रेक्टर्स भवन निर्माण में सक्रिय हैं, लेकिन सरकार से लाइसेंस मात्र दस प्रतिशत ने ही लिया हुआ है। यह सब भी अधिकारियों के साथ साठगांठ कर टैक्स न भरकर सरकार को राजस्व में चूना लगा रहे हैं। इसमें भी बड़े घोटाले का अंदेशा है। उन्हें लोकायुक्त से न्याय की पूरी उम्मीद है।
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साथ ही शिकायत के साथ कुछ दस्तावेज भी सौंपे है। किछाणा के अनुसार वैट रिफंड घोटाले की गहन जांच हो तो यह एक लाख करोड़ से अधिक का निकलेगा। उन्होंने लोकायुक्त से इसकी जांच नए सिरे से एसआईटी गठित कर करवाने की मांग की है। 2015 में दी गई शिकायत अभी तक ठंड बस्ते में थी, लेकिन लोकायुक्त ने किछाणा की दलीलों को मानते हुए उसे स्वीकार कर रजिस्ट्रार को जांच करने के लिए कहा है।
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इस मामले में जिन दर्जनों ईटीओ और डीटीसी पर वैट रिफंड घोटाले में संलिप्त होने के आरोप किछाणा ने लगाए हैं, रजिस्ट्रार उन्हें जांच में शामिल होने के लिए समन करेंगे। लोकायुक्त जस्टिस एनके अग्रवाल जांच 23 मई को रजिस्ट्रार को सौंपी है।
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सिर्फ दस प्रतिशत के पास लाइसेंस
शिकायतकर्ता सतबीर किछाणा ने बताया कि रेवाड़ी, फरीदाबाद, गुरुग्राम, बहादुरगढ़, सोनीपत व मानेसर में लगभग 776 डेवलपर्स, बिल्डर्स और कांट्रेक्टर्स भवन निर्माण में सक्रिय हैं, लेकिन सरकार से लाइसेंस मात्र दस प्रतिशत ने ही लिया हुआ है। यह सब भी अधिकारियों के साथ साठगांठ कर टैक्स न भरकर सरकार को राजस्व में चूना लगा रहे हैं। इसमें भी बड़े घोटाले का अंदेशा है। उन्हें लोकायुक्त से न्याय की पूरी उम्मीद है।