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हरियाणा का लाल मणिपुर में शहीद, तिरंगे में लौटेगा घर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 17 Jan 2015 11:55 PM IST
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असम राइफल में तैनात पूंडरी के गांव टयोंठा का जवान शुक्रवार को भारत मां की सेवा करते हुए कुर्बान हो गया। गांव टयोंठा अनंतराम का बेटा पवन कुमार मणिपुर में तैनात था। शुक्रवार को ड्यूटी के दौरान शहीद हो गया। हालांकि उसकी मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है। उधर, मौत की खबर मिलते ही पूरे टयोंठा गांव में मातम छा गया।
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पवन का पार्थिव शरीर रविवार दोपहर तक गांव पहुंचेंगे। राजकीय सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा। पेशे से किसान स्व. अनंतराम के तीन बेटे और तीन लड़कियां हैं। तीनों बेटे सेना में हैं।
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संयोग की बात है कि तीनों ही भाई असम राइफल में भर्ती हुए। पवन का बड़ा भाई रामबीर रिटायर हो चुका है। जबकि उससे छोटे पवन व सबसे छोटे सुशील मणिपुर में तैनात थे। शुक्रवार सुबह तीनों भाइयों में सबसे छोटे सुशील कुमार ने ही घर पर फोन करके पवन के शहीद होने का समाचार दिया। सुशील के फोन के बाद घर और गांव में मातम छा गया। हालांकि अभी तक पवन की मौत के असली कारण पता नहीं चल सका है।
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घरवाले पवन के इंतजार में थे, आई मौत की खबर
मार्च 1998 में सेना में भर्ती हुआ पवन खुशमिजाज और घर का लाड़ला थे। मार्च 2003 में उसकी शादी हुई, लेकिन अब तक उसकी कोई संतान नहीं थी। पवन के बड़े भाई रामबीर ने बताया कि वीरवार शाम को पवन ने फोन पर घरवालों से बात की थी और कहा कि उसकी छुट्टी मंजूर हो गई है। लेकिन वहां पहाड़ गिरने के कारण रास्ता बंद है, इसलिए तीन-चार दिन बाद ही वह घर आ पाएगा। घरवाले पवन का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उसकी मौत की खबर आने के बाद किसी को इस बात का यकीन नहीं हो रहा कि पवन अब कभी नहीं आएगा।
बूढ़ी आंखें लाल की बाट में दरवाजे पर लगाए है टकटकी
पवन की मां भंती देवी और उसके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बूढ़ी आंखें अब भी अपने लाल की बाट में दरवाजे पर टकटकी लगाए हैं। बेटे के गम रोते-रोते कहती हैं, पवन जरूर आवैगा। भगवान को यदि उठाना ही था, तो उसे उठा लेता। बेटे ने तो अभी कुछ भी नहीं देखा था।