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हरियाणा के 12 जिलों में सूखे का साया, भूजल स्तर में भी गिरावट

Fri, 13 May 2016 05:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Fri, 13 May 2016 05:44 PM IST
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haryana's 12 districts possessed by drought, decline in groundwater levels
सूखा

सुप्रीम कोर्ट की ओर से सूखे की रिपोर्ट मांगे जाने के बावजूद ढिलाई बरतने पर बार-बार फटकार झेल रहे प्रदेश के 12 जिलों पर सूखे का साया गहरा रहा है। इस बार भी मानसून मेहरबान नहीं हुआ तो हालात विकट हो सकते हैं। फिलहाल 12 जिलों में शामिल रोहतक, भिवानी, हिसार और महेंद्रगढ़ में मध्यम श्रेणी और फतेहाबाद, झज्जर, जींद, रेवाड़ी, सिरसा, यमुनानगर, मेवात और पलवल में आंशिक स्तर पर सूखा है।

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इन जिलों में सिंचाई पानी और पेयजल की गंभीर समस्या सामने आ रही है। महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और रोहतक, हिसार में सबसे बुरे हालात हैं। हिसार के सिवानी में सूखे की वजह से पलायन के हालात हैं। खेत सूने पड़े हैं और पशुओं के लिए चारे का संकट। बावजूद इसके अभी तक सरकार के स्तर पर जिला उपायुक्तों को सूखे से निपटने के लिए एहतियाती उपाय करने संबंधी गाइडलाइन नहीं मिली है।
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आंकड़ों पर गौर करें तो सूखा संभावित 12 जिलों में पिछले तीन सालों न केवल औसत बारिश में गिरावट आई है, इसके चलते भूजल स्तर भी गिरता जा रहा है। कई जिलों में फसलों की बुवाई का रकबा घटा और इसके चलते उत्पादन घटा है। महेंद्रगढ़ में इस बार करीब 30 हेक्टेयर कम क्षेत्र में बिजाई हुई थी। फतेहाबाद में बारिश के कारण कपास बुवाई का क्षेत्र घटा है।
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औसत बारिश में गिरावट सूखा संभावित जिलों में बारिश का ग्राफ घटता जा रहा है। वर्ष 2013 में सिरसा में 346 मिमी. औसत बारिश हुई थी, जो गत वर्ष 289 पर आ टिकी। महेंद्रगढ़ में गत वर्ष औसत बारिश 250 मिमी. के मुकाबले 180 एमएम ही हुई। फतेहाबाद में वर्ष 2013 में 256 मिमी. बारिश हुई थी, जो गत वर्ष 114 मिमी. तक रही। जींद में वर्ष 2013 में औसत बारिश 502 मिमी. हुई थी, जो वर्ष 2015 में 458 मिमी. तक सिमट गई। रोहतक में औसत बारिश का आंकड़ा 405 मिमी है ,लेकिन पिछले तीन साल में आधे तक सिमट गई है। भिवानी में वर्ष 2013 में 306 मिमी. बारिश हुई थी और 2014 में 291 मिमी. तक सिमट गई। हिसार में 416 मिमी. औसत के मुकाबले गत वर्ष 319 मिमी. ही हुई।

भूजल स्तर और गिरा औसत बारिश में गिरावट के चलते सूखा संभावित जिलों भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। सिरसा में वर्ष 2013 में भूजल स्तर 37.39 मीटर था जो इस वर्ष 43.75 रिकॉर्ड किया गया। महेंद्रगढ़ के निजामपुर, नांगल चौधरी, नलवाटी, गुर्जरवाटी व दोहान पचीसी के अनेक गांवों में पानी 1500 फुट के नीचे भी नहीं मिल रहा। जींद में वर्ष 2013 के मुकाबले 16.36 मीटर से बढ़कर 16.34 मीटर पहुंच गया है। भिवानी के बाढ़डा में व लोहारू खडं में पिछले एक साल में भूजल स्तर दो मीटर नीचे चला गया है। 
 

सरकार के दावे पर योगेंद्र की आपत्ति

haryana's 12 districts possessed by drought, decline in groundwater levels
सूखा - फोटो : अमर उजाला
हिसार में ये हालात जिले में 35 गांव सूखा संभावितों में शामिल हैं। हिसार सेकेंड ब्लॉक में 36 प्रतिशत, बरवाला 32, हिसार फर्स्ट में 30,  हांसी सेकेंड में 30, हांसी फर्स्ट में 24, उकलाना में 15, आदमपुर में  15, अग्रोहा और नारनौंद में 14 क्षेत्र सूखा प्रभावित है। 

मेवात में सूख गए 400 जोहड़
मेवात सूखे से जूझ रहा है। क्षेत्र के 400 तालाब सूख गए हैं। जिले में 76 गांव ऐसे हैं जिनकी खेती राम भरोसे रहती है। राजस्व विभाग की रिपोर्ट बताती है कि 431 गांवों में से केवल 66 गांवों में ही मवेशियों के लिए पानी बचा है। 

निखिल गजराज, डीसी, हिसार ने बताया कि प्रदेश सरकार के निर्देश के अनुसार काम करेंगे। पेयजल उपलब्ध कराना प्राथमिकता  है। इसके अलावा गांव में जलघर, जोहडों में पानी पहुंचाने के लिए काम कर रहे  हैं। एक सप्ताह पहले इस विषय में सभी अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए थे।

 संजीव कुमार, उपायुक्त, महेंद्रगढ़ ने बताया कि अभी सरकार की तरफ से उनके पास सूखे से निपटने संबंधी कोई दिशा निर्देश नहीं आए हैं। जैसे ही इस बारे में दिशा निर्देश या रिपोर्ट आएगी, उन पर पालना की जाएगी तथा सूखे से बचने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
  
 योगेंद्र यादव के नेतृत्व वाले स्वराज अभियान की आपत्ति
उधर हरियाणा सरकार ने राज्य के किसी भी जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट में पेश हलफनामे में दावा किया गया कि राज्य का कोई जिला ऐसा नहीं है, जहां कम बरसात हुई और उसे सूखाग्रस्त जिला घोषित किया जा सके। सरकार ने कहा था कि यदि जून से सितंबर व दिसंबर से मार्च के बीच औसत 75 प्रतिशत से कम वर्षा होती है तो सूखा घोषित किया जा सकता है। इस पर योगेंद्र यादव के नेतृत्व वाले स्वराज अभियान ने हरियाणा सरकार के आर्थिक व सांख्यिकी विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुआ कहा था कि जून 2015 से सितंबर 2015 तक हरियाणा में सिर्फ 62 प्रतिशत वर्षा हुई जो कि सूखा घोषित करने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा बताए गए पैमाने 75 प्रतिशत से काफी कम है।
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