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हड़तालः इधर रोडवेज कर्मी अड़े, उधर सीएम के तेवर कड़े, हाईकोर्ट कहे- सख्ती से निपटे सरकार

Tue, 16 Oct 2018 10:28 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 16 Oct 2018 10:28 AM IST
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Haryana Roadways Strike, Public Facing Travel Problem
हरियाणा रोडवेज का चक्का जाम
हरियाणा रोडवेज का चक्का जाम और यात्री बुरी तरह परेशान। कर्मचारी अड़े हैं और मुख्यमंत्री के तेवर भी कड़े हैं। हाईकोर्ट का कहना है कि सख्ती से मामला निपटाए सरकार। करें तो क्या करें, न सरकार के पास कोई तरीका और न रोडवेज के पास। लोगों की बढ़ती दिक्कतों को देखते हुए प्रशासन को जबरन बसें चलवानी पड़ रही हैं। कंडक्टर नहीं जा रहे, तो पुलिस कर्मियों को ड्राइवर के साथ भेजा जा रहा है।
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हिसार से एक बस चलवाई गई, तो यूनियन के लोगों ने पीछा करते हुए टोल पर रुकवा कर बस की चाबी निकाल ली। मौके का फायदा उठाते हुए प्राइवेट बस कर्मियों ने मोर्चा संभाल लिया है। जीएम रोडवेज खुद स्थिति संभालने के लिए मैदान में आ गए हैं। हड़ताल की वजह है, 700 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत चलाने का फैसला।
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कर्मचारी हड़ताल न कर सरकार से लगातार वार्ता की मांग करते रहे, लेकिन सरकार ने अड़ियल रवैया नहीं छोड़ा। तालमेल कमेटी ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने समय रहते वार्ता कर सभी समस्याओं का समाधान नहीं किया व एस्मा के तहत किसी भी प्रकार की कार्रवाई की गई तो चक्का जाम अनिश्चितकालीन में बदल सकता है।
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सरकार टस से मस नहीं, मुख्यमंत्री के तेवर कड़े
फैसले को लेकर सरकार अडिग है। कर्मचारी विरोध में आंदोलन का झंडा बुलंद कर चुके हैं। सीएम मनोहर लाल ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि किलोमीटर स्कीम पर किसी तरह का समझौता नहीं होगा। कर्मचारियों की बाकि सभी मांगों पर सरकार वार्ता को तैयार है।

चक्का जाम करने वाले कर्मचारियों से सख्ती से निपटे सरकार

Haryana Roadways Strike, Public Facing Travel Problem
हरियाणा रोडवेज का चक्का जाम
उधर, चक्का जाम की कॉल का मामला फिर से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने इस बारे में दाखिल याचिका पर कड़ा रवैया अपनाते हुए सरकार को ऐसे कर्मचारियों से सख्ती से निपटने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कोई नरमी न बरती जाए और कानून के अनुरूप कार्रवाई की जाए।

विजयंता ट्रेवलर्स की ओर से याचिका दाखिल करते हुए कहा गया कि रोडवेज कर्मचारी यूनियनों ने 16 और 17 अक्टूबर को हड़ताल पर जाने का एलान किया है। इस हड़ताल को सर्व कर्मचारी संघ समेत कई कर्मचारी संगठनों ने भी समर्थन दिया है। याची ने कहा कि इस प्रकार की हड़ताल का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता है। हड़ताल के दौरान प्राइवेट ट्रांसपोटर्स को भी परेशान किया जाता है जिससे आम लोगों की परेशानी बढ़ जाती है।

याचिका पर सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने बताया कि कर्मचारियों की हड़ताल से निपटने के लिए कमर कस ली गई है। बार-बार हड़ताल पर उतारू कर्मचारियों को सरकार पहले चेतावनी देगी और फिर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। हरियाणा सरकार ने राज्य में रोडवेज कर्मियों की हड़ताल पर रोक लगा रखी है।

राज्य सरकार ने 30 अगस्त को एस्मा (आवश्यक सेवा अधिनियम) लागू कर दिया था जिसके तहत रोडवेज कर्मचारी छह माह तक कोई हड़ताल नहीं कर सकते। इसपर जस्टिस राजन गुप्ता ने याचिका का निपटारा करते हुए हरियाणा सरकार को आदेश दिए कि हड़तालियों से सख्ती से निपटा जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि आम लोगों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो।

मंगलवार और बुधवार को रहेगी हड़ताल, नहीं चलेंगी 41 सौ बसें

Haryana Roadways Strike, Public Facing Travel Problem
हरियाणा रोडवेज का चक्का जाम
हरियाणा सहित दस राज्यों में बुधवार रात बारह बजे तक रोडवेज बसों का चक्का जाम रहेगा। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी के आह्वान पर कर्मचारी सोमवार रात बारह बजे से हड़ताल पर चले गए। फरीदाबाद डिपो में सोमवार शाम चार बजे से ही हड़ताल शुरू हो गई। डिपो महाप्रबंधक के दस कर्मचारी नेताओं को निलंबित करने और यूनियन कार्यालयों को बेल्डिंग से सील कराने पर तय समय से पहले ही कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया।

चक्का जाम के दौरान 41 सौ बसों के पहिए थमे रहेंगे। इस बार हड़ताल को लेकर सभी रोडवेज यूनियनें एकजुट हैं, जबकि सरकार समर्थित भारतीय मजदूर संघ ने हड़ताल से दूर रहने का निर्णय लिया है। हालांकि किलोमीटर स्कीम पर सात सौ बसें लाने के निर्णय का संघ भी विरोध कर रहा है। सरकार के बीच तनातनी किलोमीटर स्कीम को लेकर ही बनी हुई है। इसलिए चक्का जाम के दौरान टकराव तय माना जा रहा है।

सरकार हर हाल में हड़ताल को विफल करने की तैयारी कर चुकी है। एस्मा के तहत हड़ताली कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। रोडवेज के डिपो व सब डिपो को छावनी में तब्दील किया जाएगा। सभी डिपो पर धारा-144 लागू होगी। सरकार कर्मचारियों के बसें न चलाने पर किराए के चालकों- परिचालकों से भी बस सेवा सुचारु करने की तैयारी कर चुकी है। जिससे टकराव ज्यादा बढ़ सकता है।

परिवहन विभाग के महानिदेशक नरहरि सिंह बांगड़ ने हड़ताल के बेअसर रहने का दावा किया है। हड़ताल के दौरान राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू, उत्तराखंड, चंडीगढ़ में बस सेवा बाधित रहेगी। एक दिन की हड़ताल से लगभग चार करोड़ रुपये की चपत सरकार को लगने वाली है। अगर एस्मा के तहत लाठीचार्ज, निलंबन की कार्रवाई हुई तो कर्मचारी बेमियादी हड़ताल पर भी जा सकते हैं।
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