{"_id":"8399db1b447d039c02acf430a0155091","slug":"haryana-roadways-going-on-the-way-of-privatization-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरियाणा रोडवेज ने निजीकरण की ओर बढ़ाया कदम ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाणा रोडवेज ने निजीकरण की ओर बढ़ाया कदम
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 20 Nov 2015 02:12 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य परिवहन विभाग की ओर से किलोमीटर के आधार पर बसें किराये पर लेने की एक योजना को मंजूरी दी गई। सरकार का दावा है कि इस फैसले से प्रदेश में यात्रियों को प्रभावी, सस्ती एवं उचित बस परिवहन सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकेंगी।
विज्ञापन
इस योजना के तहत हरियाणा में पंजीकृत बसें ही किराए पर ली जाएंगी, जिसमें पुराने बस परमिटधारियों को वरीयता दी जाएगी। किसी भी व्यक्ति, फर्म, कंपनी या पंजीकृत संस्था या किसी अन्य कानूनी इकाई से अधिकतम पांच बसें किराए पर ली जाएंगी। इनमें नॉन एसी बसें और मिनी बसें शामिल होंगी।
विज्ञापन
समझौते के समय तीन वर्ष से कम पुरानी बसों को किराए पर लिया जाएगा और अधिकतम आठ वर्ष तक पुरानी बसों को किराए पर लिया जाएगा। बसों को किराए पर लेने के लिए ऑनलाइन ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी ताकि पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
विज्ञापन
चयनित बस मालिक को किराये की दर निश्चित होने के 90 दिन के भीतर हरियाणा राज्य परिवहन के आबंटित डिपो महाप्रबंधक के साथ अनुबंध करना होगा और ऐसा न करने पर उसकी अग्रिम जमानत राशि जब्त कर ली जाएगी।
परिवहन विभाग ऐसी बसों के किराये की अदायगी प्रतिमाह या प्रतिदिन बस संचालन की, जो भी व्यवस्था तय की जाएगी, के बाद बसों पर यदि कोई जुर्माना हुआ तो उसकी राशि काटकर बस किराये की अदायगी करेगा।
चार वर्ष पुरानी नॉन एसी बसों के लिए 8400 किलोमीटर प्रतिमाह और 300 किलोमीटर प्रतिदिन के आधार पर भुगतान किया जाएगा। चार वर्ष से अधिक और पांच वर्ष से कम तक की बसों के लिए 7000 किलोमीटर प्रति माह और 250 किलोमीटर प्रतिदिन के आधार पर भुगतान किया जाएगा।
इसी प्रकार, चार वर्ष पुरानी नॉन एसी मिनी बसों के लिए 6440 किलोमीटर प्रतिमाह और 230 किलोमीटर प्रतिदिन के आधार पर भुगतान किया जाएगा। चार वर्ष से अधिक और पांच वर्ष से कम तक की एसी बसों के लिए 6020 किलोमीटर प्रति माह और 215 किलोमीटर प्रतिदिन के आधार पर भुगतान किया जाएगा।
इसके अलावा किराये की दर के दो हिस्से होंगे। पहला डीजल और दूसरा मरम्मत व रखरखाव के खर्चे, चालक का वेतन/भत्ते, बीमा शुल्क एवं कर/लेवी/शुल्क/अधिभार। इसमें बस परमिट शुल्क, बस स्टैंड शुल्क, राहदारी/प्रवेश शुल्क, यात्री कर/विशेष सड़क कर शामिल नहीं होगा।
किराये की दर प्रति किलोमीटर में 65 प्रतिशत डीजल की कीमत के लिए और शेष 35 प्रतिशत उक्त खर्चों के लिए होगा। किराये की दर में शामिल डीजल के मूल अंग को पिछले माह में डीजल की औसत दरों में वृद्धि या कटौती को ध्यान में रखकर अनुपातिक दर से प्रतिमाह समायोजित किया जाएगा।
पांच पैसे प्रति किलोमीटर प्रति वर्ष की निश्चित वृद्धि (जिसे एक निश्चित कैलेंडर वर्ष में बस को चलाने की अवधि को ध्यान में रखते हुए आगे अनुपातिक आधार पर समायोजित किया जाएगा) रखरखाव की कीमत, मानव शक्ति की दर, बीमा राशि व अन्य सरकारी करों व अधिभारों में वृद्धि के लिए बस को किराये पर लेने की एक वर्ष की अवधि के बाद मान्य होगी।