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Hindi News ›   Chandigarh ›   Haryana News in Hindi: Read Inside Story of Farmers protest Rally in Haryana

पंजाब से सुलगी विरोध की चिंगारी हरियाणा में भड़की, पढ़ें- किसान रैली की इनसाइड स्टोरी

Sat, 12 Sep 2020 04:59 AM IST
ajay kumar यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 12 Sep 2020 04:59 AM IST
सार

  • पंजाब विधानसभा में अध्यादेशों के खिलाफ प्रस्ताव पारित होने पर प्रदेश में मुखर हुई कांग्रेस
  • भाजपा को घेरने के लिए नहीं मिल रहा था कोई बड़ा मुद्दा, बरौदा उपचुनाव भी सियासत गरमाने की वजह

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Haryana News in Hindi: Read Inside Story of Farmers protest Rally in Haryana
हरियाणा में किसानों का प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा में किसानों की लड़ाई भाजपा बनाम कांग्रेस यूं ही नहीं बन गई। इसकी नींव अगस्त में पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र ने डाली। पंजाब सरकार ने तीनों कृषि अध्यादेशों के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर इन्हें लागू न करने का निर्णय लिया, जिससे हरियाणा में भी सियासत चरम पर पहुंच गई।

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हरियाणा विधानसभा के एक दिवसीय मानसून सत्र में कांग्रेस इन अध्यादेशों के खिलाफ सदन में सरकार को घेरने से चूक गई थी। इसलिए उसने सदन के बजाए सड़क पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई। किसान पहले से ही हरियाणा में इन अध्यादेश का विरोध कर रहे थे, जिन्हें राजनीतिक ताकत कांग्रेस के विरोध स्वरूप मिल गई। इनेलो ने भी किसान हित में आवाज बुलंद की, जिससे भारतीय किसान यूनियन, हरियाणा को और बल मिला।
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भाकियू का चढूनी गुट अध्यादेशों के विरोध का अगुवा बना व साथ में आढ़ती व अन्य किसान संगठन भी जुड़ गए, जिससे मजबूत विरोध की जमीन तैयार हुई। कांग्रेस एसवाईएल व दादुपुर नलवी नहर के बाद वैसे भी कोई बड़ा मुद्दा सरकार को घेरने के लिए लंबे समय से ढूंढ रही थी, जो उसे मिल गया। किसानों के साथ कांग्रेस पहले से ही स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट हूबहू लागू कराने को लेकर आंदोलन करती आ रही है। चूंकि, भाजपा ने सत्ता में आने से पहले रिपोर्ट को लागू करने का वादा किया था। 

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हरियाणा के किसान संपूर्ण कर्ज माफी न होने पर पहले ही सरकार से नाराज चल रहे थे। पीएम फसल बीमा योजना को लेकर भी उनका विरोध जारी है। इस उन्हें पहले भी कांग्रेस का साथ मिलता रहा है। अब प्रदेश में वैसे भी मौसम चुनावी है। बरौदा सीट पर उपचुनाव अगले महीने संभव है। ऐसे में कांग्रेस किसानों का हिमायती बनने की कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। 

बरौदा सीट कांग्रेस विधायक के निधन पर ही खाली हुई है। जिसे वह दोबारा जीतकर बरौदा में भाजपा को मात देना चाहती है। चूंकि, बीते कुछ चुनावों से यह सीट कांग्रेस के ही कब्जे में है। सोनीपत जिला की बरौदा सीट भी किसान बहुल क्षेत्र में है, इसलिए कांग्रेस ने भाजपा की किसानों के सहारे घेराबंदी की है। भाजपा-जजपा सत्ता में हैं, वे इस सीट को झटक न लें, इसलिए किसानों की लड़ाई पर राजनीतिक रंग चढ़ाया गया है।

तीनों अध्यादेश किसान हित में, संवाद से दूर हों शंकाएं: धनखड़
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़ का कहना है कि तीनों कृषि अध्यादेश किसान हित में हैं। अगर किसानों की कोई शंकाएं हैं तो संवाद के जरिए उनका समाधान किया जाए। न्यूनतम समर्थन मूल्य व मंडी प्रणाली से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।

किसानों को खत्म करने की कोशिश: हुड्डा

नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के बजाए उन्हें खत्म करना चाहती है। अध्यादेशों में किसानों से बहुत कुछ छिपाया गया है। इन्हें तुरंत वापस लिया जाए।

भाकियू अध्यक्ष गुरनाम चढूनी ने ये कहा

  • स्टॉक सीमा खत्म करने से एग्रो व्यापार चंद लोगों के हाथ में रह जाएगा। बड़ी कंपनियां छोटे व्यापारियों को खत्म कर देंगी
  • जरूरी वस्तुओं की कालाबाजारी बढ़ेगी।
  • यह कहना गलत कि किसान कहीं भी फसल बेच सकेगा। 1977 से ही उन्हें यह अधिकार है।
  • व्यापारी कहीं से भी फसल नहीं खरीद सकता था, जिसे अध्यादेश में छूट दे दी गई है।
  • व्यापारी कहीं से भी फसल खरीदेगा तो आढ़ती मंडी में बैठकर क्या करेगा
  • व्यापारी से खरीद के पैसे आने की कोई गारंटी नहीं
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य का कोई जिक्र अध्यादेश में नहीं। एक राष्ट्र-एक बाजार से किसान पर मार पड़ेगी। दाम कम मिलेंगे।
  • सादे कपड़ों में पुलिस कर्मी ही थे, जिन्होंने लाठीचार्ज किसानों पर किया। उन पर कार्रवाई हो।

ये हैं तीन अध्यादेश

  • कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश 2020
  • मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता अध्यादेश, 2020
  • आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020

इन बिंदुओं का मुख्य विरोध

  • पहले अध्यादेश के अनुसार अब व्यापारी मंडी से बाहर भी किसानों की फसल खरीद सकेंगे। पहले किसानों की फसल को सिर्फ मंडी से ही खरीदा जा सकता था।
  • केंद्र सरकार ने अब दाल, आलू, प्याज, अनाज इत्यादि आदि को आवश्यक वस्तु नियम से बाहर कर इसकी स्टॉक सीमा खत्म कर दी।
  • केंद्र सरकार कांट्रेक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही।
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य का कोई जिक्र नहीं। खरीद के पैसे व्यापारी से आने की कोई गारंटी नहीं दी। 
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