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Chandigarh News: हरियाणा के मंत्री संदीप सिंह को चंडीगढ़ कोर्ट से राहत

Sat, 16 Sep 2023 02:17 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 16 Sep 2023 02:17 AM IST
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Haryana minister Sandeep Singh gets relief from Chandigarh court
चंडीगढ़। जिला अदालत ने कोच के यौन शोषण मामले में हरियाणा के मंत्री संदीप सिंह को राहत देते हुए अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली है। अदालत ने संदीप सिंह को 10 दिनों में ट्रायल कोर्ट के समक्ष सरेंडर करने की शर्त पर अग्रिम जमानत का लाभ दिया है। उन्हें एक लाख रुपये का मुचलका भी भरना होगा।
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संदीप सिंह ने अग्रिम जमानत याचिका में कहा था कि उन्हें मामले में झूठा फंसाया गया है। एफआईआर भी छह महीने देरी से दर्ज की गई, जिसके पीछे कोई तर्क नहीं है। उन्होंने दलील दी कि पीड़िता ने यह आरोप सिर्फ इसलिए लगाए, क्योंकि उसकी पंचकूला में ही पोस्टिंग की मांग पूरी नहीं हुई थी। वहीं, दूसरी ओर उसकी तुर्की में प्रशिक्षण की मांग विभाग ने रद्द कर दी थी इसलिए उसमें गुस्सा था। उसने विपक्षी राजनीतिक दलों का सहयोग लिया और आईएनएलडी के कार्यालय से पत्रकारवार्ता की।
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संदीप सिंह के वकील ने कहा कि एसआईटी के नोटिस पर वह चार बार जांच में शामिल हुए। अब मामले में जांच पूरी कर चालान पेश हो चुका है। वह मामले में कभी गिरफ्तार नहीं हुए और जांच एजेंसी ने कभी उनकी कस्टडी की जरूरत नहीं बताई। वहीं, सरकारी वकील ने एक फैसले में तय कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए बताया कि किस कारण आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की गई थी। संदीप सिंह ने कहा कि मामले में कुछ धाराएं जमानती हैं। उन्हें संशय है कि मामले में अदालती समन पर पेश होने पर उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है। वहीं, उनके भागने की आशंका नहीं है। संदीप सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि वह अग्रिम जमानत के हकदार हैं। वहीं मुकदमा झेलने के लिए भी तैयार हैं।
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गैर-जमानती मामला होने के बावजूद गिरफ्तार नहीं : बंसल
पीड़िता के वकील दीपांशु बंसल ने कहा कि आरोपी विधायक हैं जिसकी वजह से पीड़िता की जिंदगी और निजता को खतरा बना हुआ है। उसके साथ पहले काफी घटनाएं हुई हैं और उसे शक है कि उनमें आरोपी का हाथ है। इसे लेकर शिकायतकर्ता ने पंचकूला में 26 अप्रैल, 2023 को एफआईआर भी दर्ज करवाई थी। बीते 29 दिसंबर को पीड़िता ने चंडीगढ़ पुलिस को शिकायत दी थी। कहा गया कि पीड़िता के यौन शोषण मामले में उसने शिकायत देने में देरी नहीं की। वह अपने विभाग के समक्ष पेश हुई थी। कोई कार्रवाई न होने पर वह पुलिस के पास गई थी। मामले में आरोप गंभीर हैं। आरोपी ने जांच को प्रभावित किया है और गैर-जमानती मामला होने के बावजूद उसकी कभी गिरफ्तारी नहीं हुई। उसने लाई डिटेक्टर टेस्ट करवाने से भी इन्कार कर दिया था। पीड़िता के सीआरपीसी 164 के बयानों में दुष्कर्म के प्रयास का आरोप भी सामने आता है।
उत्तराखंड और सुप्रीम कोर्ट के फैसले रहे आधार : रबींद्र पंडित
मामले में आरोपी के वकील रबींद्र पंडित ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के सौभाग्य भगत बनाम उत्तराखंड सरकार के वर्ष 2021 के जमानत याचिका मामले में 24 अगस्त, 2023 को आए फैसले को आधार बनाया। इसमें कोर्ट ने पाया था कि चार्जशीट अदालत में दायर होने के बाद भी अर्जीकर्ता सीआरपीसी की धारा 438 के तहत जमानत की अर्जी दायर करने का हकदार है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के महादूम बावा बनाम सीबीआई के 2023 के फैसले को भी आधार बनाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने पाया था कि कुछ अदालतें समन के आदेश पर आरोपी के पेश होने पर उसे रिमांड पर लेने के आदेश सुना देती हैं। ऐसी परिस्थितियों में आरोपी को गिरफ्तार किए जाने पर वह जमानत का हकदार था। बता दें कि संदीप सिंह को भी 16 सितंबर के लिए पेश होने के लिए समन किया गया है।



पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी की जरूरत नहीं बताई: अदालत
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजीव के. बेरी की अदालत ने पाया कि आरोपी एसआईटी के जारी नोटिस पर कई बार जांच में शामिल हुआ। पूरी जांच के दौरान उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई। आरोपी की जमानत अर्जी के जवाब में पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी की जरूरत नहीं बताई है। आरोपी मुकदमे का सामना करने को तैयार है। वहीं अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्ट्या में घटना का पीड़िता के अलावा कोई चश्मदीद नहीं है। पीड़िता के सीआरपीसी 164 के तहत पहले ही बयान हो चुके हैं। इसकी कॉपी भी सरकारी वकील फाइल में लगा चुके हैं। इसके मुताबिक मार्च, 2022 की कुछ घटनाओं का भी इसमें जिक्र है। यह एफआईआर में कहीं नहीं है। यह सभी आरोप नियमित मुकदमे के दौरान साबित करने होंगे जिनकी जांच पूरी हो चुकी है। वहीं पीड़िता की जिंदगी और निजता को खतरे की आशंका को लेकर अदालत देख सकती है और उचित आदेश जारी किए जा सकते हैं। ट्रायल कोर्ट पीड़िता की जिंदगी और निजता को खतरे की आशंका पर जमानत को लेकर उपर्युक्त शर्तें लगा सकती हैं।
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