{"_id":"664c15777ffbf255b5073f49","slug":"haryana-lok-sabha-election-hisar-public-raise-question-on-bjp-candidate-ranjit-singh-chautala-news-in-hindi-2024-05-21","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Election: बाअदब, होशियार... कि जनता अब सवाल पूछती है! मतदाताओं के बदले मिजाज से प्रत्याशियों के माथे पर बल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Election: बाअदब, होशियार... कि जनता अब सवाल पूछती है! मतदाताओं के बदले मिजाज से प्रत्याशियों के माथे पर बल
Tue, 21 May 2024 09:29 AM IST
शाहरुख खान
विजय गुप्ता, अमर उजाला, हिसार
विजय गुप्ता, अमर उजाला, हिसार
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 21 May 2024 09:29 AM IST
सार
इस बार चुनाव में मतदाताओं के बदले मिजाज से प्रत्याशियों की पेशानी पर बल है। यहां सभी दल कठघरे में है। भाजपा प्रत्याशी व सांसद अरविंद शर्मा लोगों के बीच गए तो उन्हें खरी-खरी सुनने को मिली कि पांच साल क्यों नहीं आए? काफी पहले हॉकी स्टेडियम की जो मांग रखी थी उसका क्या हुआ?
विज्ञापन
Lok Sabha Election
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिसार जिले के कैमरी गांव में भाजपा प्रत्याशी व राज्य सरकार में मंत्री रणजीत चौटाला जब प्रचार के लिए गए तो कुछ किसानों ने उनसे पूछा कि आपने फसलों पर एमएसपी दिलाने के लिए क्या किया? उनसे ही नारनौंद के सिसाय गांव में लोगों ने सवाल किया कि हमारे युवाओं के लिए खराब अग्निवीर योजना को लेकर आप हरियाणा में ही आवाज उठा सकते थे, आपने क्या किया? कुछ ही समय पहले भाजपा में शामिल हुए रणजीत के पास इन सवालों के कोई ठोस जवाब नहीं थे।
रेवाड़ी जिले में कोसली क्षेत्र के सुधराना गांव में भाजपा प्रत्याशी व सांसद अरविंद शर्मा लोगों के बीच गए तो उन्हें खरी-खरी सुनने को मिली कि पांच साल क्यों नहीं आए? काफी पहले हॉकी स्टेडियम की जो मांग रखी थी उसका क्या हुआ?
भाजपा के साथ गठबंधन में साढ़े चार साल सरकार चलाने वाली जजपा की प्रत्याशी और पूर्व उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की मां नैना चौटाला हिसार से प्रत्याशी हैं। बरवाला विधानसभा क्षेत्र के खेदड़ गांव में उनसे भी सवाल हुए कि हमारे 450 किसान मारे गए, परिवारों से मिलने क्यों नहीं गए?
विज्ञापन
हरियाणा में इस लोकसभा चुनाव में यह बदली हुई फिजा है। बड़ी सभाओं व रैलियों के बजाय इस बार प्रत्याशियों ने छोटी-छोटी सभाएं करने को तरजीह दी ताकि जनता के ज्यादा करीब जा सकें। इसका कितना लाभ उन्हें मिला है, यह तो नतीजे ही बताएंगे लेकिन यह रणनीति कई नेताओं को भारी भी पड़ रही है। जनता की अदालत में उन पर सवालों की बौछार हो रही है।
विज्ञापन
रेवाड़ी जिले में कोसली क्षेत्र के सुधराना गांव में भाजपा प्रत्याशी व सांसद अरविंद शर्मा लोगों के बीच गए तो उन्हें खरी-खरी सुनने को मिली कि पांच साल क्यों नहीं आए? काफी पहले हॉकी स्टेडियम की जो मांग रखी थी उसका क्या हुआ?
विज्ञापन
भाजपा के साथ गठबंधन में साढ़े चार साल सरकार चलाने वाली जजपा की प्रत्याशी और पूर्व उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की मां नैना चौटाला हिसार से प्रत्याशी हैं। बरवाला विधानसभा क्षेत्र के खेदड़ गांव में उनसे भी सवाल हुए कि हमारे 450 किसान मारे गए, परिवारों से मिलने क्यों नहीं गए?
विज्ञापन
हरियाणा में इस लोकसभा चुनाव में यह बदली हुई फिजा है। बड़ी सभाओं व रैलियों के बजाय इस बार प्रत्याशियों ने छोटी-छोटी सभाएं करने को तरजीह दी ताकि जनता के ज्यादा करीब जा सकें। इसका कितना लाभ उन्हें मिला है, यह तो नतीजे ही बताएंगे लेकिन यह रणनीति कई नेताओं को भारी भी पड़ रही है। जनता की अदालत में उन पर सवालों की बौछार हो रही है।
मतदाताओं का गुबार नजर आ रहा है। नेताओं की पेशानी (माथे) पर बल हैं। पुलिस के लिए भी सिरदर्द कि कहीं माहौल न खराब हो जाए। नतीजतन अब पुलिस यह सलाह भी दे रही है कि उम्मीदवार आएं तो सवाल न पूछे जाएं।
पिछली बार चुने गए या केंद्र व राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा के प्रत्याशियों को ही यह सवाल नहीं झेलने पड़ रहे हैं बल्कि कठघरे में वे भी हैं जो सत्ता से बाहर रहे हैं। हिसार में कांग्रेस के प्रत्याशी जयप्रकाश से कर्मचारियों ने कई सवाल किए। पूछा कि वह बताएं पुरानी पेंशन बहाली और खाली पदों को भरने के लिए वे क्या करेंगे?
नए प्रत्याशियों से पिछली बार उस सीट से उनकी ही पार्टी के सांसद की कारगुजारी पर जवाब मांगा जा रहा है। सोनीपत लोकसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी मोहन लाल बड़ौली से जींद जिले के नंदगढ़ गांव में लोगों ने तपाक से कहा, आप क्यों आ गए? रमेश कौशिक (पिछली बार चुने गए सांसद) ने कुछ विकास तो कराया नहीं।
यह तो ठहरे किसान, कर्मचारी व आमजन...नजदीक से नेताओं से रूबरू हुए तो पार्टी वर्कर भी मुखर। आदमपुर क्षेत्र के न्योली कलां गांव में दुष्यंत चौटाला से जजपा वर्कर ने ही शुभकरण गोली प्रकरण पर तीखे तेवर दिखाए। यहीं लोगों ने उनसे विलय के कारण स्कूल बंद होने से बच्चों की परेशानी के बारे में पूछा। पूर्व उप मुख्यमंत्री असहज हो गए।
पानीपत में पूर्व मुख्यमंत्री व करनाल लोकसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी मनोहर लाल को भी परशुराम जन्मोत्सव में ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा। हरियाणा के मतदाताओं का यह बदला हुआ मिजाज है। जनता के सवाल नेताओं को बगलें झांकने पर मजबूर कर रहे हैं। यूं अगर मतदाताओं से अलग-अलग बात करें तो अधिकांश हमेशा की तरह थाह नहीं लेने देते।
रोहतक से करीब 30 किलोमीटर दूर मोखरा के लोग उनके गांव की बेटी व ओलंपियन साक्षी मलिक और अन्य पहलवानों के आंदोलन को लेकर ज्यादा बात नहीं करना चाहते। करीब पचास वर्षीय राम लुभाया कहते हैं कि कोई पार्टी इस पर बात नहीं करती। हां, कोई नेता गांव में आएगा तो लोग पूछ सकते हैं कि बेटियों को इंसाफ के लिए उन्होंने किया क्या? जनता की चुप्पी व सब्र तब टूट रहा है जब किसी सभा या समूह में प्रत्याशी उनसे समक्ष वोट मांगने आ रहे हैं।
इस वोटर बिहेवियर पर राजनीतिक विश्लेषक व पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के प्रोफेसर गुरमीत सिंह कहते हैं कि हरियाणा का मतदाता जागरूक है, मुखर है। किसी की हवा या लहर नहीं है इसलिए मतदाता प्रत्याशी के साथ-साथ उसके दल की कारगुजारी और उसके विजन को परख रहा है ताकि मन बना सके। वह प्रत्याशियों व दलों को उनकी कारगुजारी और अपनी प्राथमिकताओं व अपेक्षाओं की कसौटी पर परख रहा है तो यह लोकतंत्र की खूबसूरती भी है और लोकतंत्र के लिए जरूरी भी।
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता जवाहर यादव कहते हैं कि सवाल पूछना लोगों का अधिकार है। मगर सवाल पूछने और रास्ता रोकने व उम्मीदवारों का विरोध करने में अंतर है। जो लोग उम्मीदवारों का रास्ता रोकते हैं या उनका विरोध करते हैं, असल में उनका लोकतंत्र में विश्वास नहीं है।