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हरियाणा साहित्य संगम: पुरस्कार राशि पर सवाल, साहित्यकार बोले- ये भेदभाव क्यों?

Sun, 19 Mar 2017 09:22 AM IST
दीपक शाही/अमर उजाला, पंचकूला
दीपक शाही/अमर उजाला, पंचकूला Updated Sun, 19 Mar 2017 09:22 AM IST
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Haryana Literature Sangam, Questions on the prize money, panchkula news
हरियाणा साहित्य संगम चार भाषाओं का संगम - फोटो : अमर उजाला
देश में हर धर्म और भाषा का अपना अलग महत्व है। संविधान ने सभी को बराबर का दर्जा दिया है। लेकिन उर्दू अकादमी की दृष्टि से देखें तो उर्दू का स्थान दोएम दर्जे पर है। कुछ ऐसा ही पंचकूला में पहली बार आयोजित हरियाणा साहित्य संगम में दी गई पुरस्कार राशि से पता चलता है। यहां पुरस्कार वितरण समारोह के बाद उर्दू और पंजाबी साहित्यकारों को पुरस्कार राशि अन्य अकादमियों की अपेक्षा कम दिए जाने पर उर्दू अकादमी से जुड़े कुछ साहित्यकारों ने विरोध जताया। उन्होंने कहा कि साहित्य और उर्दू अकादमी की जब एक ही डायरेक्टर हैं तो फिर पुरस्कार राशि बराबर क्यों नहीं रखी गई है। 
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दरअसल 17 मार्च से पंचकूला के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम कैंपस में हरियाणा स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में साहित्य संगम का आयोजन जा रहा है। इसमें प्रदेशभर से हरियाणा साहित्य अकादमी, हरियाणा उर्दू अकादमी, हरियाणा पंजाबी अकादमी के साहित्यकारों को एक जगह  एकत्रित किया है। 17 मार्च को तीनों अकादमियों की ओर से 2014, 2015, 2016 के लिए साहित्यकारों को सीएम मनोहर लाल ने अकादमिक पुरस्कार दिया। जिसमें सबसे कम पुरस्कार राशि उर्दू साहित्यकारों को दी गई। इतना ही नहीं सम्मानित उर्दू साहित्यकारों और लेखकों की संख्या भी सबसे कम 11 रही। इसे उर्दू अकादमी से जुड़े प्रदेश के साहित्यकारों ने गलत बताया है। साहित्यकारों की मानें तो साहित्य एक समान है। इसमें कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। सभी एक समान हैं, सबको पुरस्कार राशि बराबर मिलनी चाहिए।
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बता दें कि प्रदेश सरकार की मदद से साहित्यकारों को अकादमियों की ओर से पुरस्कार दिया जाता है। इस बीच शनिवार को साहित्यकारों की मांग पर मुख्यमंत्री ने फक्रे हरियाणा पुरस्कार की राशि 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये, हाली पुरस्कार 1.21 से 2.51 लाख रुपये करने की घोषणा की। इसी प्रकार कवर महेंद्र सिंह बेदी सामाजिक, सांस्कृतिक उपलब्धि पुरस्कार तथा महिलाओं के सामाजिक उत्थान के लिए सबीर दत्त पुरस्कार की राशि 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 51-51 हजार रुपये करने, उर्दू काव्य के लिए सईय्यद मुज्जफर हुसैन बर्ने, उर्दू गद के लिए ख्वाजा अहमद पुरस्कार, उर्दू पत्रकारिता पुरस्कार, गजल कव्वाली संगीत पुरस्कार, हरियाणा से संबंध रखने वाले तथा बाहर रह रहे लेखकों के लिए नव अमोज उर्दू पुरस्कारों की राशि 21 हजार से बढ़ाकर 51 हजार रुपये की गई है।
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वीरवार को दी गई पुरस्कार राशि और सम्मानित लोगों की संख्या

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हरियाणा साहित्य संगम चार भाषाओं का संगम
अकादमियों के नाम        पुरस्कृत साहित्यकार        पुरस्कार राशि        
   
हरियाणा साहित्य अकादमी        60        दो से सात लाख के तक
हरियाणा पंजाबी अकादमी        20        51 हजार से ढाई लाख तक 
उर्दू अकादमी        11        अधिकतम डेढ़ लाख तक

 पिछली सरकार में पुरस्कार राशि तय हुई : डायरेक्टर
हरियाणा साहित्य और उर्दू अकादमी की डायरेक्टर कुमुद बंसल ने बताया कि शनिवार को सुबह ही सीएम साहब से बात हुई है, उन्होंने उर्दू अकादमी से जुड़े साहित्यकारों की पुरस्कार राशि बढ़ाकर एक से तीन लाख रुपये तक कर दी है। यह पुरस्कार उन्हें मिलेगा। लेकिन अभी लिखित घोषणा नहीं हुई है। जब कुमुद बंसल से सवाल किया कि ये पुरस्कार राशि अन्य अकादमियों से फिर भी कम है। जवाब में अकादमी की डायरेक्टर ने कहा कि पिछली सरकार में पुरस्कार राशि तय की गई थी। इसमें सुधार होने में कुछ समय लगेगा।
 

'भाषा के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए'

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हरियाणा साहित्य संगम चार भाषाओं का संगम - फोटो : अमर उजाला
भाषा के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए
बड़ा सवाल है कि उर्दू वाले कवियों को हिंदी कवियों से कमतर क्यों आंका जाता है। ये अपने लोगों को ही अवॉर्ड देते हैं। अवार्ड की कार्यशैली के बारे में इन्हें पता नहीं है। सबसे बड़ी बात है कि भाषा के साथभेद भाव नहीं होना चाहिए। सभी को एक समान पुरस्कार राशि मिलनी चाहिए।
-बीडी कालिया हमदम।

सरकार को फैसला लेना होगा
भाषा के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। सभी भाषा की पुरस्कार राशि समान होनी चाहिए। इसके लिए सरकार को फैसला लेना होगा।
-डॉ. उमैर मंजर।

उर्दू को प्रोत्साहन मिलना चाहिए
उर्दू धीरे धीरे खत्म होती जा रही है। इसे प्रोत्साहन मिलना चाहिए। सभी भाषाएं एक समान है। इसलिए पुरस्कार राशि भी सेम होनी चाहिए।
-रेनु बहल।
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