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हरियाणा के आढ़तियों को 500 करोड़ रुपये डूबने का मलाल, बिना पैसे दिए विदेश फरार हुए व्यापारी
Fri, 25 Sep 2020 11:34 AM IST
खुशबू गोयल
यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 25 Sep 2020 11:34 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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हरियाणा के अनाज मंडी आढ़तियों को व्यापारियों के पास करोड़ों रुपये डूबने का भी मलाल है। 4 साल में 500 करोड़ रुपये मारकर व्यापारी विदेश फरार हो चुके हैं। इससे पहले के वर्षों में लगभग 2000 करोड़ का चूना व्यापारियों ने आढ़तियों को लगाया है। अनाज मंडी आढ़ती सरकार से इसलिए भी नाराज हैं कि उनकी राशि व्यापारियों से दिलाने में कोई मदद नहीं की गई।
व्यापारी व आढ़ती के बीच का मामला बताकर सरकार से सीधे पल्ला झाड़ लिया। अगर किसान व व्यापारी के बीच खरीद में आढ़ती न होते तो सारा पैसा किसानों का डूबता। इसलिए भी किसान मंडी से बाहर फसल सीधे व्यापारी को बेचने के नए कानून का विरोध कर रहे हैं।
अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के चेयरमैन रजनीश चौधरी ने बताया कि सरकार ने करोड़ों रुपये मारने वाले व्यापारियों के खिलाफ एफआईआर भी उनके विदेश भागने के बाद दर्ज करवाई। दागी व्यापारियों के पासपोर्ट भी दर्ज नहीं किए गए। अनेक व्यापारी दुबई व अन्य देशों में जमे हैं। उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
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व्यापारी व आढ़ती के बीच का मामला बताकर सरकार से सीधे पल्ला झाड़ लिया। अगर किसान व व्यापारी के बीच खरीद में आढ़ती न होते तो सारा पैसा किसानों का डूबता। इसलिए भी किसान मंडी से बाहर फसल सीधे व्यापारी को बेचने के नए कानून का विरोध कर रहे हैं।
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अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के चेयरमैन रजनीश चौधरी ने बताया कि सरकार ने करोड़ों रुपये मारने वाले व्यापारियों के खिलाफ एफआईआर भी उनके विदेश भागने के बाद दर्ज करवाई। दागी व्यापारियों के पासपोर्ट भी दर्ज नहीं किए गए। अनेक व्यापारी दुबई व अन्य देशों में जमे हैं। उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
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वार्ता में भी उठाया मुद्दा, सरकार ने झाड़ा पल्ला
रजनीश चौधरी ने कहा कि सरकार अगर आढ़ती को व्यापारी व किसान के बीच से निकाल देगी तो पूरी व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी। किसान का पैसा व्यापारी वर्षों तक दबाए रखेगा। उन्होंने कहा कि सरकार से कई बार व्यापारियों के पास डूबा करोड़ों रुपये दिलाने की गुहार लगाई, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। हाल ही में सीएम व अधिकारियों के साथ वार्ता में भी इस मुद्दे को उठाया गया, लेकिन सरकार ने पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया।
परमल जीरी न खरीदने से किसान का नुकसान
भाकियू प्रधान गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि किसान व आढ़ती के रिश्ते को सरकार खत्म नहीं कर सकती। मंडी के बाहर फसल बेचने पर पैसे दिलाने की गारंटी कौन लेगा। सरकार के 25 सितंबर से परमल जीरी की खरीद शुरू न करने पर किसान का नुकसान हो रहा है। सरकार जल्दी खरीद शुरू कराए। नए कृषि कानून के तहत किसान अपनी फसल नहीं बेचेंगे।
परमल जीरी न खरीदने से किसान का नुकसान
भाकियू प्रधान गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि किसान व आढ़ती के रिश्ते को सरकार खत्म नहीं कर सकती। मंडी के बाहर फसल बेचने पर पैसे दिलाने की गारंटी कौन लेगा। सरकार के 25 सितंबर से परमल जीरी की खरीद शुरू न करने पर किसान का नुकसान हो रहा है। सरकार जल्दी खरीद शुरू कराए। नए कृषि कानून के तहत किसान अपनी फसल नहीं बेचेंगे।