दिल्ली बॉर्डर पर ढील के लिए दबाव पर सख्ती रहेगी बरकरार, विज बोले- हालात के मुताबिक लेंगे फैसला
- कोरोना का कहर कम न होने तक कोई रिरायत नहीं : विज
- 5 दिन में हरियाणा में 200 केस, अधिकांश दिल्ली से आए
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हरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा है कि दिल्ली बॉर्डर पर की गई सख्ती में ढील देने को लेकर हरियाणा सरकार पर कई तरह के दबाव आ रहे हैं। जब तक दिल्ली में कोरोना का कहर कम नहीं होता बॉर्डर पर सख्ती बरकरार रहेगी। ढील देने को लेकर लोगों की बातें वे सुन लेते हैं पर फैसला हालात के मुताबिक ही लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पंजाब बॉर्डर पर भी दिल्ली सीमा की तरह ही सख्ती है। दिल्ली के कच्चे रास्ते सील किए गए हैं। भविष्य में किसी को भी दिल्ली से हरियाणा में प्रवेश करने नहीं दिया जायगा। दिल्ली में 100 से ज्यादा हॉटस्पॉट बन चुके हैं। दिल्ली पुलिस के कर्मचारियों में भी कोरोना का संक्रमण पाया गया है, उससे साफ है कि यदि बॉर्डर पर ढील दी जाती है तो हरियाणा में स्थिति भयावह हो जाएगी। पिछले 5 दिनों में प्रदेश में करीब 200 नए केस आए हैं, इनमें से अधिकांश दिल्ली से ही आए हैं। ऐसे में जब तक एनसीआर के जिलों में कोरोना का कहर कम नहीं होता तब तक बॉर्डर पर ढील देने का कोई मतलब नहीं है।
सांस लेने में दिक्कत, फ्लू जैसे लक्षण वाले 11 हजार लोग चिह्नित, होगी जांच
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि आशा वर्कर्स ने घर-घर जाकर सर्वे कर लगभग 11 हजार ऐसे लोगों को चिह्नित किया है, जिन्हें सांस लेने में दिक्कत या फ्लू जैसे लक्षण हैं। ऐसे लोगों की टेस्टिंग की जाएगी। विज ने कहा कि अब कोरोना का नया स्वरूप बिना लक्षण का हो गया है। जहां पर किसी को लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उनका टेस्ट होना बेहद जरूरी है।
प्रदेश की लगभग ढाई करोड़ जनता की कोरोना जांच करना बड़ी चुनौती है। इसलिए सबसे पहले ऐसे लोगों की कैटेगरी बनाकर जांच की जाएगी जिनका जनता से सीधे और सबसे ज्यादा संपर्क होता है। इनमें सब्जी, दूध विक्रेताओं और डाकिया जैसे लोग शामिल हैं। अभी हम रोजाना लगभग 3500 टेस्ट कर सकते हैं।
हम टेस्टिंग का दायरा बढ़ाने में लगे हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग कोरोना के अलावा सामान्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों पर भी फोकस करेगा। इसके लिए सभी अस्पतालों की ओपीडी आरंभ कर दी जाएगी, ताकि मरीज इलाज के लिए परेशान न हों।
कम गुणवत्ता वाली पीपीई किट भी डॉक्टरों के संक्रमित होने का कारण
अनिल विज ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों की बुधवार को बैठक भी ली। उन्होंने सभी अधिकारियों के साथ कोरोना से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की और समस्याओं को सुना। विज ने डॉक्टरों व अन्य कर्मचारियों में संक्रमण के मामले सामने आने पर चिंता जताते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी सबसे पहले अपनी जांच करवाएं।
उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के संक्रमित होने का एक कारण विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा दान दी गई कम गुणवत्ता वाली पीपीई किट का इस्तेमाल करना भी है। इसलिए उन्होंने विभाग को आदेश दिए कि सरकार द्वारा खरीदी गई पीपीई किट का ही प्रयोग करें। विज ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फ्रंट फुट पर कोरोना के खिलाफ लड़ने वाले सभी पुलिस व सफाई कर्मचारियों की भी कोरोना जांच करवाई जाए।
गलत तथ्यों के साथ राज्य में प्रवेश किया तो होगी कार्रवाई
हरियाणा में जो लोग अपने निजी वाहनों से प्रदेश में वापस आने के इच्छुक हैं। उन्हें इसके लिए जारी किए गए विशेष ई-दिशा माइग्रेंट सर्विस संबंधित वेबसाइट पर आवेदन करना होगा। आवेदन के दौरान जो तथ्य संबंधित लोग भरेंगे, उनमें यदि गड़बड़ी पाई गई तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। हरियाणा पुलिस इन तथ्यों पर खास नजर रखेगी।
हरियाणा के एडीजीपी लॉ एंड आर्डर नवदीप सिंह विर्क के अनुसार इसके लिए वेबसाइट पर एक खास प्रोफॉर्मा मौजूद है। इसे आवेदक को भरना होगा। एडीजीपी विर्क ने बताया कि हरियाणा में बहुत से लोग ऐसे हैं, जो विभिन्न राज्यों से अपने निजी वाहनों में वापस आने की इच्छा रखते हैं। इन लोगों को सबसे पहले संबंधित वेबसाइट पर खुद को पंजीकृत करना होगा। इस दौरान एक खास प्रोफॉर्मा आवेदक को भरना होगा, जिसके बाद उन्हें अपने निजी वाहन से प्रदेश में आने की अनुमति मिलेगी।
यात्रा शुरुआत से पहले उन्हें अनुमति डाउनलोड करनी होगी। जिसे वह हरियाणा की सीमा जांच चौकियों पर अपनी मेडिकल स्क्रीनिंग के दौरान वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को दिखाएंगे। इस प्रोफॉर्मा में प्रदेश में आने वाले व्यक्ति को अपना नाम और मोबाइल नंबर, अपनी उम्र, पेशा, मौजूदा रेजिडेंशियल ऐड्रेस, डेस्टिनेशन एड्रेस, इंस्टिट्यूट ( जहां वे काम करता है) का नाम, अपने घर का एड्रेस और अपनी लास्ट मेडिकल चेकअप की डेट और डिटेल इत्यादि जानकारियां भरनी होगी।
इस दौरान प्रोफॉर्मा में उसे डिक्लेअर करना होगा कि वे पिछले 30 दिनों में किसी कंटेनमेंट जोन में नहीं रह रहा है। प्रोफॉर्मा में भरी तमाम जानकारियां पूरी तरह से सत्य हैं। यदि इन तथ्यों में कुछ भी गलत पाया गया तो उसके खिलाफ आईपीसी, डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट और एपिडेमिक एक्ट के तहत कोई भी कार्यवाही की जा सकती है।