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इस राज्य में कंगारुओं की तर्ज पर होगी नवजात बच्चों की देखभाल, प्रोजेक्ट शुरू
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 18 Apr 2017 12:18 PM IST
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मां के साथ नवजात शिशु
नवजात बच्चों की मृत्यु दर को ध्यान में रखते हुए एक राज्य में एक खास प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसके कई फायदे देखने को मिल सकते हैं। दरअसल, हरियाणा में हर साल कम वजन और समय पूर्व जन्म के कारण बीस हजार से अधिक नवजात शिशुओं की मौत होती आ रही है। दो हजार ग्राम से कम वजन और प्री-मेच्योर बच्चों के जन्म लेते ही काल का ग्रास बनने के पीछे मुख्य कारण ठंड, संक्रमण और हाईपोग्लेसिया रहते थे, चूंकि इनमें प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती थी।
हरियाणा की खट्टर सरकार ने इन सभी कारणों का अध्ययन करने के बाद नवजात शिशुओं की जान बचाने का बीड़ा उठाया है। कंगारुओं की तर्ज पर इन्हें जीवनदान दिया जाएगा। इसके लिए सरकार ने कंगारू केयर यूनिट की शुरुआत प्रदेश में कर दी है। पहली यूनिट विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से सोनीपत जिला अस्पताल में हाल ही में शुरू की गई है। ऐसा करने वाला हरियाणा पूरे देश में पहला राज्य बन गया है। सरकार ने अगले छह महीने में सभी जिला अस्पतालों में ये यूनिट संचालित करने का लक्ष्य रखा है।
सरकार का उद्देश्य नवजात शिशुओं की मौत के आंकड़े को बेहद कम करना है। यूनिट में कम वजन और समय पूर्व जन्म वाले बच्चे को ठीक वैसे ही मां, दादा-दादी या पिता के सीने से 15-16 घंटे तक लगाकर रखा जाएगा, जैसे कंगारू मादा जन्म के बाद अपने मुट्ठी भर बच्चे को पिछली टांगों के पास बने थैलीनुमा बैग में डालकर आत्मनिर्भर होने तक रखती है। इस प्रयोग से नवजात शिशुओं के जीवित रहने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाएगी।
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सोनीपत जिला अस्पताल में शुरू कंगारू केयर यूनिट के परिणाम बीते पंद्रह दिनों में उत्साहवर्धक हैं। इसमें समय पूर्व जन्म व कम वजन के कई बच्चों की जान बचाने में सफलता मिली है। बता दें कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार हरियाणा में जन्म लेने वाला हर चौथा बच्चा कम वजन का होता हे।
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हरियाणा की खट्टर सरकार ने इन सभी कारणों का अध्ययन करने के बाद नवजात शिशुओं की जान बचाने का बीड़ा उठाया है। कंगारुओं की तर्ज पर इन्हें जीवनदान दिया जाएगा। इसके लिए सरकार ने कंगारू केयर यूनिट की शुरुआत प्रदेश में कर दी है। पहली यूनिट विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से सोनीपत जिला अस्पताल में हाल ही में शुरू की गई है। ऐसा करने वाला हरियाणा पूरे देश में पहला राज्य बन गया है। सरकार ने अगले छह महीने में सभी जिला अस्पतालों में ये यूनिट संचालित करने का लक्ष्य रखा है।
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सरकार का उद्देश्य नवजात शिशुओं की मौत के आंकड़े को बेहद कम करना है। यूनिट में कम वजन और समय पूर्व जन्म वाले बच्चे को ठीक वैसे ही मां, दादा-दादी या पिता के सीने से 15-16 घंटे तक लगाकर रखा जाएगा, जैसे कंगारू मादा जन्म के बाद अपने मुट्ठी भर बच्चे को पिछली टांगों के पास बने थैलीनुमा बैग में डालकर आत्मनिर्भर होने तक रखती है। इस प्रयोग से नवजात शिशुओं के जीवित रहने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाएगी।
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सोनीपत जिला अस्पताल में शुरू कंगारू केयर यूनिट के परिणाम बीते पंद्रह दिनों में उत्साहवर्धक हैं। इसमें समय पूर्व जन्म व कम वजन के कई बच्चों की जान बचाने में सफलता मिली है। बता दें कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार हरियाणा में जन्म लेने वाला हर चौथा बच्चा कम वजन का होता हे।
तीन तरह की कंगारू यूनिट
मां के साथ नवजात शिशु
. चार से आठ घंटे तक : शॉर्ट यूनिट
. नौ से बारह घंटे तक : लांग यूनिट
. 12 घंटे से ज्यादा तक बच्चे को सीने से लगाकर रखना : कंटीन्यूअस यूनिट
. यूनिट की खासियत : 28 डिग्री सेल्सियस पर तापमान फिक्स, अत्याधुनिक बेड, टीवी इत्यादि की सुविधा
रोहतक पीजीटाई में खोलेंगे अगली यूनिट
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बताया कि ये बहुत महत्वाकांक्षी योजना है। सोनीपत अस्पताल में दस बेड की कंगारू केयर यूनिट शुरू की गई है। खानपुर मेडिकल कॉलेज में छह बेड और सोनीपत के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तीन-तीन बेड के यूनिट जल्दी शुरू किए जाएंगे।
सबसे पहले रोहतक पीजीआई में यूनिट स्थापित करेंगे, चूंकि यहां दस हजार से ज्यादा बच्चे हर साल पैदा होते हैं। अंबाला और पंचकूला में इस पर काम चल रहा है। आशा वर्कर को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा ताकि वे यूनिट में रहने वाली माताओं के घर जाने पर उनका फॉलोअप कर सकें।
. नौ से बारह घंटे तक : लांग यूनिट
. 12 घंटे से ज्यादा तक बच्चे को सीने से लगाकर रखना : कंटीन्यूअस यूनिट
. यूनिट की खासियत : 28 डिग्री सेल्सियस पर तापमान फिक्स, अत्याधुनिक बेड, टीवी इत्यादि की सुविधा
रोहतक पीजीटाई में खोलेंगे अगली यूनिट
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बताया कि ये बहुत महत्वाकांक्षी योजना है। सोनीपत अस्पताल में दस बेड की कंगारू केयर यूनिट शुरू की गई है। खानपुर मेडिकल कॉलेज में छह बेड और सोनीपत के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तीन-तीन बेड के यूनिट जल्दी शुरू किए जाएंगे।
सबसे पहले रोहतक पीजीआई में यूनिट स्थापित करेंगे, चूंकि यहां दस हजार से ज्यादा बच्चे हर साल पैदा होते हैं। अंबाला और पंचकूला में इस पर काम चल रहा है। आशा वर्कर को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा ताकि वे यूनिट में रहने वाली माताओं के घर जाने पर उनका फॉलोअप कर सकें।