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चुनौतियों से पीछे नहीं हटी सरकार, बजट को बताया संतुलित
सर्वेश कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 22 Mar 2016 02:10 PM IST
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विधानसभा में बजट सेशन के लिए जाते हुए सीएम खट्टर
- फोटो : अमर उजाला
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तमाम चुनौतियों के बावजूद सोमवार को हरियाणा सरकार ने बजट पेश करते हुए दावा किया कि यह संतुलित और विकासोन्मुख बजट है। बिजली वितरण कंपनियों(डिस्कॉम) के घाटे को देखते सरकार ने बकाया ऋण की 75 फीसदी अदायगी का निर्णय लिया है।
इसके तहत सरकार पर 25950 करोड़ रुपये का कर्ज बढ़ जाएगा। खास बात है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत सरकारी कर्मियों के वेतन और भत्ते में बढ़ोतरी का भी राज्य के संसाधनों पर असर पड़ेगा। आम लोगों पर टैक्स का बोझ न पढ़े, इस लिहाज से साल 2016-17 के बजट में किसी नए कर का भी प्रस्ताव नहीं रखा गया है।
जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान उपद्रव के शिकार दुकानदारों को भी ब्याज दर में राहत देने की मंशा से की जा रही कवायद के कारण भी सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। हालांकि इन चुनौतियों का सामना करते हुए सोमवार को पेश किए गए बजट में सभी क्षेत्रों को तवज्जो देने का भरपूर प्रयास किया गया। कृषि, विमानन, उद्योग, पेयजल आपूर्ति एवं सिंचाई और शिक्षा क्षेत्र में भी विकास के लिहाज से सभी जरूरी प्रावधान किए गए हैं।
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फसलों को ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से हुए नुकसान की भरपाई के मद में भी सर्वाधिक मुआवजा देने का सरकार दावा कर रही है। बिजली कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए हरियाणा और भारत सरकार के बीच हुए उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) पर समझौता हुआ है।
इसके तहत बिजली वितरण कंपनियों के 34600 करोड़ रुपये के ऋण के 75 फीसदी हिस्से का वहन खुद हरियाणा सरकार करेगी। इसके अलावा सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर प्रदेश के कर्मियों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी के लिए पहल की जाएगी। जाहिर है इसका असर भी प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
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इसके तहत सरकार पर 25950 करोड़ रुपये का कर्ज बढ़ जाएगा। खास बात है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत सरकारी कर्मियों के वेतन और भत्ते में बढ़ोतरी का भी राज्य के संसाधनों पर असर पड़ेगा। आम लोगों पर टैक्स का बोझ न पढ़े, इस लिहाज से साल 2016-17 के बजट में किसी नए कर का भी प्रस्ताव नहीं रखा गया है।
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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान उपद्रव के शिकार दुकानदारों को भी ब्याज दर में राहत देने की मंशा से की जा रही कवायद के कारण भी सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। हालांकि इन चुनौतियों का सामना करते हुए सोमवार को पेश किए गए बजट में सभी क्षेत्रों को तवज्जो देने का भरपूर प्रयास किया गया। कृषि, विमानन, उद्योग, पेयजल आपूर्ति एवं सिंचाई और शिक्षा क्षेत्र में भी विकास के लिहाज से सभी जरूरी प्रावधान किए गए हैं।
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फसलों को ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से हुए नुकसान की भरपाई के मद में भी सर्वाधिक मुआवजा देने का सरकार दावा कर रही है। बिजली कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए हरियाणा और भारत सरकार के बीच हुए उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) पर समझौता हुआ है।
इसके तहत बिजली वितरण कंपनियों के 34600 करोड़ रुपये के ऋण के 75 फीसदी हिस्से का वहन खुद हरियाणा सरकार करेगी। इसके अलावा सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर प्रदेश के कर्मियों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी के लिए पहल की जाएगी। जाहिर है इसका असर भी प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।