Haryana: भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार का साथ नहीं दे रहे विभाग, मलाईदार पदों पर अफसरशाही की पर्देदारी जारी
मुख्य सचिव कार्यालय से छह बार विभागों को पत्र लिखकर जानकारी मांगी गई, लेकिन मात्र 28 विभागों ने ही जानकारी दी। शेष 62 विभागों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। प्रदेश में कुल 53 विभाग और 37 निगम व बोर्ड हैं।
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भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने के दावे करने वाली हरियाणा सरकार के आदेशों को उसके विभाग, बोर्ड और निगम ही गंभीरता से नहीं ले रहे। आलम ये है कि सरकार 17 माह से सभी विभागों से संवेदनशील पदों (जहां पर भ्रष्टाचार की आशंका है) की जानकारी मांग रही है, लेकिन विभाग जानकारी नहीं दे रहे हैं। इसमें खास बात यह है कि जिन विभागों पर भ्रष्टाचार को रोकने की जिम्मेदारी है और जहां भ्रष्टाचार के कई मामले मिल चुके हैं वे भी जानकारी नहीं दे रहे हैं। सरकार ने विभागों के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताते हुए अंतिम मौका दिया है और सात दिन में सूचना देने के आदेश दिए हैं।
मुख्य सचिव कार्यालय से छह बार विभागों को पत्र लिखकर जानकारी मांगी गई, लेकिन मात्र 28 विभागों ने ही जानकारी दी। शेष 62 विभागों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। प्रदेश में कुल 53 विभाग और 37 निगम व बोर्ड हैं। सबसे पहले 15 सिंतबर, 2021 को इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभाध्यक्षों, एमडी निगम और बोर्ड, आयुक्तों और सभी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर जानकारी मांगी थी। इसके बाद 20 दिसंबर 2021, 7 अप्रैल 2022, 28 नवंबर 2022 और 28 दिसंबर 2022 को पत्र भेजे गए। बावजूद इसके विभाग जानकारी देने के लिए तैयार नहीं हैं। अब अंतिम बार मुख्य सचिव ने कड़ी चेतावनी देते हुए पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि अगर कोई विभाग, निगम और बोर्ड तय समय पर सूचना नहीं देंगे तो संबंधित विभाग के प्रशासनिक को यह सूचना व्यक्तिगत तौर पर मुख्य सचिव कार्यालय को देनी होगी। तीन साल से अधिक समय से जमे अधिकारियों की सूची भी मांगी
प्रदेश सरकार ने सभी विभागों से एक प्रारूप में जानकारी मांगी है। इसमें संवेदनशील पद, तीन साल से अधिक समय से एक सीट पर जमे अधिकारियों की संख्या, एसओपी के आधार पर बदले अधिकारियों की संख्या, संवेदनशील सीटों से तबादले नहीं होने का कारण पूछा गया है।
इन विभागों ने दी सूचना
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, महिला एवं बाल विकास, श्रम विभाग, पर्यावरण, वन विभाग, बागवानी, उड्डयन, रोजगार, जेल, पुरातत्व, स्माल सेविंग एंड लाटरिज, सैनिक व अर्थ सैनिक कल्याण, भू रिकार्ड, पीडब्ल्यूडी, तकनीकी शिक्षा, गृह रक्षी, करनाल डिविजन, हिसार डिविजन, हरेडा, खादी एवं ग्राम उद्योग बोर्ड, सरस्वती हैरिटेज विकास बोर्ड और हिसार, सिरसा, जींद, फतेहाबाद, फरीदाबाद व यमुनानगर जिला उपायुक्त कार्यालय से सूचना दी गई है।
जहां सबसे अधिक भ्रष्टाचार, वही नहीं दे रहे जानकारी
संवेदनशील पदों की जानकारी नहीं देने वाले विभागों, निगमों और बोर्डों में अधिकतर वे हैं, जिनमें भ्रष्टाचार सबसे अधिक है। एंटी करप्शन ब्यूरो के रिकार्ड की बात करें तो पिछले साल सबसे अधिक भ्रष्टाचार के मामले पुलिस के 46, राजस्व विभाग के 33, बिजली निगमों के 24, शहरी स्थानीय निकायों के 14, खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों व परिवहन के 5-5, शिक्षा विभाग के 4, आबकारी व कराधान, सहकारिता के 3-3 मामले पकड़े हैं। उपरोक्त विभागों में से किसी ने भी अपना डाटा उपलब्ध नहीं कराया है।