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Chandigarh News: निचली अदालतों में सुरक्षा बढ़ाने की मांग पर जवाब दे हरियाणा सरकार
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पंजाब व चंडीगढ़ की ओर से दाखिल किया जा चुका है जवाब
तीन अगस्त को चंडीगढ़ की जिला अदालत में गोली चलने का दिया गया हवाला
चंडीगढ़। हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ की निचली अदालतों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। पंजाब और चंडीगढ़ इस मामले में पहले ही जवाब दाखिल कर चुके हैं।
याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट अभिषेक मल्होत्रा ने हाईकोर्ट को बताया कि जिला व तहसील स्तर की अदालतों और ट्रिब्यूनलों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। सभी प्रवेश और निकास द्वारों पर मेटल डिटेक्टर होने चाहिए। लेकिन यह मौजूद नहीं है। इन द्वारों पर तैनात पुलिसकर्मी भी अपना काम सही प्रकार से नहीं करते हैं। इसी का नतीजा था कि तीन अगस्त को पूर्व आईपीएस मलविंदर सिंह ने कोर्ट परिसर में अपने दामाद हरप्रीत सिंह को गोली मार दी थी। याची ने कहा कि अदालत इंसाफ का मंदिर होता है और जब यही सुरक्षित नहीं है तो लोगों के अधिकारों की रक्षा कैसे होगी। गत वर्ष दिल्ली की अदालत में गोली चलने का भी याचिका में हवाला दिया गया है। याची ने कहा कि जब जजों और वकीलों को सुरक्षित माहौल मिलेगा तो ही इंसाफ सुनिश्चित हो सकेगा। याची ने बताया कि उसने अदालतों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए हरियाणा, पंजाब व यूटी प्रशासन को मांगपत्र भी दिया था। लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट प्रद्यूम्मन बिष्ट बनाम केंद्र सरकार मामले में अदालतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। इस सब के बावजूद अदालतें सुरक्षित नहीं है।
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तीन अगस्त को चंडीगढ़ की जिला अदालत में गोली चलने का दिया गया हवाला
चंडीगढ़। हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ की निचली अदालतों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। पंजाब और चंडीगढ़ इस मामले में पहले ही जवाब दाखिल कर चुके हैं।
याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट अभिषेक मल्होत्रा ने हाईकोर्ट को बताया कि जिला व तहसील स्तर की अदालतों और ट्रिब्यूनलों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। सभी प्रवेश और निकास द्वारों पर मेटल डिटेक्टर होने चाहिए। लेकिन यह मौजूद नहीं है। इन द्वारों पर तैनात पुलिसकर्मी भी अपना काम सही प्रकार से नहीं करते हैं। इसी का नतीजा था कि तीन अगस्त को पूर्व आईपीएस मलविंदर सिंह ने कोर्ट परिसर में अपने दामाद हरप्रीत सिंह को गोली मार दी थी। याची ने कहा कि अदालत इंसाफ का मंदिर होता है और जब यही सुरक्षित नहीं है तो लोगों के अधिकारों की रक्षा कैसे होगी। गत वर्ष दिल्ली की अदालत में गोली चलने का भी याचिका में हवाला दिया गया है। याची ने कहा कि जब जजों और वकीलों को सुरक्षित माहौल मिलेगा तो ही इंसाफ सुनिश्चित हो सकेगा। याची ने बताया कि उसने अदालतों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए हरियाणा, पंजाब व यूटी प्रशासन को मांगपत्र भी दिया था। लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट प्रद्यूम्मन बिष्ट बनाम केंद्र सरकार मामले में अदालतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। इस सब के बावजूद अदालतें सुरक्षित नहीं है।
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