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सतलुज-यमुना लिंक नहर पर फिर तकरार के आसार, अब नई बेंच सुनेगी गुहार
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 29 Jul 2018 12:36 PM IST
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बरसों से सूखी सतलुज-यमुना लिंक नहर पर एक बार फिर से पंजाब और हरियाणा के बीच तकरार के आसार बन रहे हैं। हालांकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला हरियाणा के हक में आ चुका है। जिसमें केंद्र सरकार को नहर निर्माण के आदेश दिए गए हैं। लेकिन फैसले के महीनों बाद भी अब तक नहर का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। अब चूंकि चुनाव सिर पर है, इसलिए हरियाणा सरकार फिर से एक्शन में आ गई है।
सरकार ने फिर से सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस से गुहार लगाई है कि इस मसले पर हरियाणा के हक में आए फैसले को जल्द कार्यान्वयन करवाएं। चीफ जस्टिस के निर्देश पर हरियाणा सरकार ने इसी मसले पर सुप्रीम कोर्ट के ज्यूडिशियल रजिस्ट्रार से मिलकर जरूरी औपचारिकताएं भी पूरी कर ली है। इसके बाद अब करीब दो हफ्ते में नई बैंच का गठन किया जाएगा, जो हरियाणा की इस अपील याचिका की सुनवाई करेगा।
उधर, पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह फैसले के बाद जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष पंजाब में कम पानी की दलील दे चुके हैं। पंजाब को फिलहाल केंद्र सरकार के फैसले का इंतजार है।
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केंद्र पर बनेगा दबाव
हरियाणा सरकार के इस फैसले से केंद्र सरकार पर दबाव बनेगा। क्योंकि एसवाईएल नहर का निर्माण अब केंद्र सरकार को करना है। गेंद केंद्र सरकार के पाले में हैं, लेकिन उसके बावजूद नहर निर्माण में लगातार देरी हो रही है। इस वजह से हरियाणा के किसान एसवाईएल के पानी से महरूम हैं।
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सरकार ने फिर से सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस से गुहार लगाई है कि इस मसले पर हरियाणा के हक में आए फैसले को जल्द कार्यान्वयन करवाएं। चीफ जस्टिस के निर्देश पर हरियाणा सरकार ने इसी मसले पर सुप्रीम कोर्ट के ज्यूडिशियल रजिस्ट्रार से मिलकर जरूरी औपचारिकताएं भी पूरी कर ली है। इसके बाद अब करीब दो हफ्ते में नई बैंच का गठन किया जाएगा, जो हरियाणा की इस अपील याचिका की सुनवाई करेगा।
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उधर, पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह फैसले के बाद जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष पंजाब में कम पानी की दलील दे चुके हैं। पंजाब को फिलहाल केंद्र सरकार के फैसले का इंतजार है।
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केंद्र पर बनेगा दबाव
हरियाणा सरकार के इस फैसले से केंद्र सरकार पर दबाव बनेगा। क्योंकि एसवाईएल नहर का निर्माण अब केंद्र सरकार को करना है। गेंद केंद्र सरकार के पाले में हैं, लेकिन उसके बावजूद नहर निर्माण में लगातार देरी हो रही है। इस वजह से हरियाणा के किसान एसवाईएल के पानी से महरूम हैं।
सतलुज-यमुना लिंक नहर
पंजाब, हरियाणा के मुख्य सचिव होंगे केयर टेकर
जब तक एसवाईएल का निर्माण नहीं हो जाता। इस नहर के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा के मुख्य सचिव को बतौर नहर का केयर टेकर नियुक्त किया हुआ है। विवादस्पद नहर की निगरानी अब दोनों मुख्य सचिवों का दायित्व है।
इनेलो विधानसभा में फिर से करेगी घेराबंदी
चुनावों के मद्देनजर इनेलो ने एसवाईएल को लेकर छेड़े अपने जलयुद्ध को और तेज करने का निर्णय लिया है। नवंबर 2016 से इनेलो ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया हुआ है। पंजाब में जाकर नहर खुदाई का प्रयास, जेल भरो आंदोलन इत्यादि कई सियासी दांव पेच इनेलो खेल चुका है। अब मानसून सत्र में फिर इनेलो विधानसभा में इसे मुद्दा बनाकर हरियाणा सरकार की घेराबंदी करेगी।
काउंटर करने को सरकार तैयार
इनेलो के इस कथित जलयुद्ध का काउंटर करने के लिए सीएम मनोहर लाल ने भी अपने वजीरों के साथ कमर कस ली है। सभी मंत्रियों व विधायकों को निर्देश दिया गया है कि अपनी सभाओं में एसवाईएल के बारे में लोगों को बताएं कि सरकार इसके लिए किस तरह कानूनी लड़ाई लड़ रही है और सरकार के प्रयासों से ही फैसला हरियाणा के हक में आ चुका है। इनेलो के कथित जलयुद्ध से गुमराह न हों। ये महज एक सियासी ड्रामा है।
ये है विवाद
पंजाब और हरियाणा के बीच एसवाईएल नहर का विवाद 1966 से चल रहा है। एसवाईएल की लंबाई 214 किलोमीटर है जिसमें से पंजाब में 122 और हरियाणा में 92 किमी हिस्से का निर्माण होना था। पंजाब का दावा है कि एसवाईएल नहर पर हरियाणा का हक नहीं है, क्योंकि आज के परिवेश में पंजाब के पास पर्याप्त पानी नहीं है। विवाद पर बरसों से सियासत होती रही। सन 1996 में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अब फैसला हरियाणा के हक में हैं और केंद्र सरकार को अगला एक्शन लेना है।
जब तक एसवाईएल का निर्माण नहीं हो जाता। इस नहर के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा के मुख्य सचिव को बतौर नहर का केयर टेकर नियुक्त किया हुआ है। विवादस्पद नहर की निगरानी अब दोनों मुख्य सचिवों का दायित्व है।
इनेलो विधानसभा में फिर से करेगी घेराबंदी
चुनावों के मद्देनजर इनेलो ने एसवाईएल को लेकर छेड़े अपने जलयुद्ध को और तेज करने का निर्णय लिया है। नवंबर 2016 से इनेलो ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया हुआ है। पंजाब में जाकर नहर खुदाई का प्रयास, जेल भरो आंदोलन इत्यादि कई सियासी दांव पेच इनेलो खेल चुका है। अब मानसून सत्र में फिर इनेलो विधानसभा में इसे मुद्दा बनाकर हरियाणा सरकार की घेराबंदी करेगी।
काउंटर करने को सरकार तैयार
इनेलो के इस कथित जलयुद्ध का काउंटर करने के लिए सीएम मनोहर लाल ने भी अपने वजीरों के साथ कमर कस ली है। सभी मंत्रियों व विधायकों को निर्देश दिया गया है कि अपनी सभाओं में एसवाईएल के बारे में लोगों को बताएं कि सरकार इसके लिए किस तरह कानूनी लड़ाई लड़ रही है और सरकार के प्रयासों से ही फैसला हरियाणा के हक में आ चुका है। इनेलो के कथित जलयुद्ध से गुमराह न हों। ये महज एक सियासी ड्रामा है।
ये है विवाद
पंजाब और हरियाणा के बीच एसवाईएल नहर का विवाद 1966 से चल रहा है। एसवाईएल की लंबाई 214 किलोमीटर है जिसमें से पंजाब में 122 और हरियाणा में 92 किमी हिस्से का निर्माण होना था। पंजाब का दावा है कि एसवाईएल नहर पर हरियाणा का हक नहीं है, क्योंकि आज के परिवेश में पंजाब के पास पर्याप्त पानी नहीं है। विवाद पर बरसों से सियासत होती रही। सन 1996 में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अब फैसला हरियाणा के हक में हैं और केंद्र सरकार को अगला एक्शन लेना है।