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नई शर्तः एमबीबीएस और एमडी करने के बाद हरियाणा में एक साल की नौकरी करना होगा अनिवार्य
Wed, 24 Jul 2019 01:02 PM IST
खुशबू गोयल
संजय कुमार/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
संजय कुमार/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 24 Jul 2019 01:02 PM IST
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हरियाणा में भी अब एमबीबीएस व एमडी करने वाले विद्यार्थियों को एक से दो साल तक प्रदेश में अपनी स्वास्थ्य सेवाएं देने का सरकार के साथ बांड भरना होगा। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के निर्देशों के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस दिशा में कार्य करना शुरू कर दिया है। शुरुआत में यह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लागू होगा, बाद में इसे निजी मेडिकल कॉलेजों पर भी लागू किया जाएगा।
प्रदेश में पीजीआईएमएस रोहतक, खानपुर, मेवात, करनाल, अग्रोहा आदि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 850 से अधिक एमबीबीएस की सीटें हैं, जो इस साल से बढ़ने जा रही हैं। इन कॉलेजों में एमबीबीएस करने वाले विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य होगा कि वह अपनी डिग्री पूरी करने के बाद एक साल प्रदेश में अपनी स्वास्थ्य सेवाएं देंगे। इन्हें बतौर जीडीएमओ रखा जाएगा और हाउस सर्जन का वेतन भी दिया जाएगा।
इससे पीजीआईएमएस में जहां हाउस सर्जन की कमी दूर होगी, वहीं प्रदेश में डॉक्टरों की कमी भी पूरी होगी। इसके साथ ही एमडी के लिए भी सरकारी संस्थान में एक साल की मेडिकल सर्विस अनिवार्य की जाएगी। इन्हें प्रदेश में मेडिकल ऑफिसर स्पेशलिस्ट का पद दिया जाएगा। इन डॉक्टरों से प्रदेश में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी काफी हद तक दूर होगी।
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गौरतलब है कि यह नियम यदि सरकारी व निजी दोनों मेडिकल कॉलेजों में लागू होता है तो एक साल में सरकार को करीब 2000 अतिरिक्त डॉक्टर मिल जाएंगे। फिलहाल प्रदेश में 3200 डॉक्टरों की सीट पर महज 1600 ही सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यदि 2000 डॉक्टर और मिलते हैं तो स्वास्थ्य विभाग की समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी।
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प्रदेश में पीजीआईएमएस रोहतक, खानपुर, मेवात, करनाल, अग्रोहा आदि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 850 से अधिक एमबीबीएस की सीटें हैं, जो इस साल से बढ़ने जा रही हैं। इन कॉलेजों में एमबीबीएस करने वाले विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य होगा कि वह अपनी डिग्री पूरी करने के बाद एक साल प्रदेश में अपनी स्वास्थ्य सेवाएं देंगे। इन्हें बतौर जीडीएमओ रखा जाएगा और हाउस सर्जन का वेतन भी दिया जाएगा।
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इससे पीजीआईएमएस में जहां हाउस सर्जन की कमी दूर होगी, वहीं प्रदेश में डॉक्टरों की कमी भी पूरी होगी। इसके साथ ही एमडी के लिए भी सरकारी संस्थान में एक साल की मेडिकल सर्विस अनिवार्य की जाएगी। इन्हें प्रदेश में मेडिकल ऑफिसर स्पेशलिस्ट का पद दिया जाएगा। इन डॉक्टरों से प्रदेश में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी काफी हद तक दूर होगी।
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गौरतलब है कि यह नियम यदि सरकारी व निजी दोनों मेडिकल कॉलेजों में लागू होता है तो एक साल में सरकार को करीब 2000 अतिरिक्त डॉक्टर मिल जाएंगे। फिलहाल प्रदेश में 3200 डॉक्टरों की सीट पर महज 1600 ही सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यदि 2000 डॉक्टर और मिलते हैं तो स्वास्थ्य विभाग की समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी।
मेडिकल विद्यार्थियों का बढ़ जाएगा कार्यकाल
एक्सपर्ट की मानें तो साढे़ पांच साल की एमबीबीएस करने के बाद एक से दो साल की सर्विस जरूरी होने पर विद्यार्थी सात से आठ साल के लिए बंध जाएगा। इसके बाद यदि वह तीन साल की एमडी करता है तो फिर उसे एक साल अनिवार्य रूप से प्रदेश को देना होगा। इस हिसाब से मेडिकल छात्र को अपने कैरियर में दो से तीन साल अतिरिक्त कार्य करना होगा। इसका असर डॉक्टरों को मिलने वाली डीएम व एमसीएच की डिग्री पर भी पड़ेगा।
बोले अधिकारी
एमबीबीएस व एमडी की डिग्री करने वाले मेडिकल के विद्यार्थियों को एक से दो साल तक प्रदेश में कार्य करना अनिवार्य होगा। इस नियम को लागू करने के लिए लगातार सरकार व स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों के साथ बातचीत चल रही है। इससे पीजीआईएमएस में हाउस सर्जन की कमी और स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों की कमी दूर हो जाएगी। इसका लाभ प्रदेश के लोगों को मिलेगा और स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाया जाएगा।
- डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस
बोले अधिकारी
एमबीबीएस व एमडी की डिग्री करने वाले मेडिकल के विद्यार्थियों को एक से दो साल तक प्रदेश में कार्य करना अनिवार्य होगा। इस नियम को लागू करने के लिए लगातार सरकार व स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों के साथ बातचीत चल रही है। इससे पीजीआईएमएस में हाउस सर्जन की कमी और स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों की कमी दूर हो जाएगी। इसका लाभ प्रदेश के लोगों को मिलेगा और स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाया जाएगा।
- डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस