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अंबालाः सैनिक आईटीआई के स्टाफ को कहां समायोजित किया जाए, असमंजस में है हरियाणा सरकार
Thu, 18 Jul 2019 02:45 PM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 18 Jul 2019 02:45 PM IST
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फाइल फोटो
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हरियाणा में सैनिक आईटीआई बंद हो जाती हैं, तो उनके स्टाफ को कहां समायोजित किया जाए, इसे लेकर सरकार असमंजस में है। इस शैक्षणिक सत्र से सैनिक आईटीआई को बंद करने का निर्णय लिया गया है। स्टाफ को भी नोटिस दे दिया गया है कि 31 जुलाई के बाद उनकी सेवाएं समाप्त हो जाएंगी। लेकिन वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने पिछले दिनों स्टाफ को आश्वस्त किया है कि सरकार उनका रोजगार छिनने नहीं देगी।
मगर अब सैनिक आईटीआई के स्टाफ समायोजन में एक तकनीकी अड़चन आ रही है, जिस पर फिर से सरकार का मंथन शुरू हो गया है। सूत्रों के अनुसार, सरकार के विधि परामर्शदाता की रिपोर्ट के अनुसार सैनिक आईटीआई चूंकि सैनिक परिवार भवन नामक सोसायटी के अंर्तगत चल रही थी, इसलिए किसी भी सोसायटी के स्टाफ को सरकारी विभाग में एडजस्ट नहीं किया जा सकता।
इसके बाद सरकार ने एडवोकेट जनरल हरियाणा की भी राय ली गई, मगर उसमें भी यही पेच फंस गया। अब सरकार इस मंथन में जुटी है कि इस स्टाफ को कैसे अन्य विभाग में समायोजित किया जाए। उधर, विधानसभा चुनाव भी सिर पर है, ऐसे में सरकार कर्मचारियों का रोजगार छीनकर उनकी नाराजगी भी मोल नहीं लेना चाहती।
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मगर अब सैनिक आईटीआई के स्टाफ समायोजन में एक तकनीकी अड़चन आ रही है, जिस पर फिर से सरकार का मंथन शुरू हो गया है। सूत्रों के अनुसार, सरकार के विधि परामर्शदाता की रिपोर्ट के अनुसार सैनिक आईटीआई चूंकि सैनिक परिवार भवन नामक सोसायटी के अंर्तगत चल रही थी, इसलिए किसी भी सोसायटी के स्टाफ को सरकारी विभाग में एडजस्ट नहीं किया जा सकता।
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इसके बाद सरकार ने एडवोकेट जनरल हरियाणा की भी राय ली गई, मगर उसमें भी यही पेच फंस गया। अब सरकार इस मंथन में जुटी है कि इस स्टाफ को कैसे अन्य विभाग में समायोजित किया जाए। उधर, विधानसभा चुनाव भी सिर पर है, ऐसे में सरकार कर्मचारियों का रोजगार छीनकर उनकी नाराजगी भी मोल नहीं लेना चाहती।
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जब सरकार देती है पूरे वेतन-भत्ते, तो क्यों बनी सोसायटी
हरियाणा राज्य सैनिक बोर्ड के अंतर्गत सन 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद परिवारों की विधवाओं व उनके बच्चों को स्वावलंबी बनाने केउद्देश्य से सन 1972 में तत्कालीन हरियाणा सरकार ने विभिन्न जिलों में सैनिक आईटीआई शुरू की थी। यह सेंटर पंचूकला, रोहतक, झज्जर, चरखीदादरी, रेवाड़ी, जींद व हिसार में चल रहे हैं। जबकि यमुनानगर के छछरौली स्थित सेंटर पहले ही बंद कर दिया गया है। इन भवनों में चल रहे आईटीआई सेंटरों में केवल शहीद विधवाओं व पूर्व सैनिकों के बच्चों को ही हिंदी व अंग्रेजी स्टेनोग्राफी व कंप्यूटर का निशुल्क कोर्स करवाया जाता है।
अचानक ही सन 1997-98 में सैनिक परिवार भवन नाम से सोसायटी रजिस्टर्ड करवाकर इन सैनिक आईटीआई को उनके अंतर्गत कर दिया गया। स्टाफ का कहना है कि जब उन्हे पूरा वेतन व भत्ते हरियाणा सरकार देती है और हर वेतनमान का लाभ भी उन्हे मिलता है, तो वे हैरान है कि उन्हे सोसायटी के अंतर्गत क्यों किया गया? स्टाफ ने मांग की है कि उन्हे स्किल डेवलपमेंट विभाग के अंतर्गत चल रही आईटीआई में समायोजित किया जाए, क्योंकि सारा स्टाफ उसी नैचर का है।
स्टाफ के अनुसार अधिकतर स्टाफ की उम्र 45 प्लस है, ऐसे में यदि 31 जुलाई के बाद वे सेवामुक्त हो जाते हैं, तो उनके व उनके परिवार के लिए भविष्य के लिए संकट खड़ा हो जाएगा। स्टाफ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि या तो सैनिक आईटीआई को जारी रखने का फैसला लिया जाए या फिर स्टाफ को एडजस्ट किया जाए।
अचानक ही सन 1997-98 में सैनिक परिवार भवन नाम से सोसायटी रजिस्टर्ड करवाकर इन सैनिक आईटीआई को उनके अंतर्गत कर दिया गया। स्टाफ का कहना है कि जब उन्हे पूरा वेतन व भत्ते हरियाणा सरकार देती है और हर वेतनमान का लाभ भी उन्हे मिलता है, तो वे हैरान है कि उन्हे सोसायटी के अंतर्गत क्यों किया गया? स्टाफ ने मांग की है कि उन्हे स्किल डेवलपमेंट विभाग के अंतर्गत चल रही आईटीआई में समायोजित किया जाए, क्योंकि सारा स्टाफ उसी नैचर का है।
स्टाफ के अनुसार अधिकतर स्टाफ की उम्र 45 प्लस है, ऐसे में यदि 31 जुलाई के बाद वे सेवामुक्त हो जाते हैं, तो उनके व उनके परिवार के लिए भविष्य के लिए संकट खड़ा हो जाएगा। स्टाफ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि या तो सैनिक आईटीआई को जारी रखने का फैसला लिया जाए या फिर स्टाफ को एडजस्ट किया जाए।