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पराली प्रबंधन पर बड़ा फैसलाः प्रति एकड़ हजार रूपये खर्च करेगी सरकार, 100 रुपये बोनस भी

Tue, 12 Nov 2019 01:25 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 12 Nov 2019 01:25 AM IST
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Haryana farmers will get 100 rupees bonus for stubble management
प्रतीकात्मक तस्वीर

हरियाणा में गैर बासमती धान लगाने वाले किसानों को अपने फसल अवशेष प्रबंधन में सरकार की ओर से मदद मिलेगी। इसके लिए सरकार एक हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से खर्च करेगी। यह एक्सरसाइज इसलिए की जा रही है, ताकि किसान फसल अवशेष को खेतों में ही आग न लगाएं और उचित फसल अवशेष प्रबंधन की ओर जाएं। 

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इसके अलावा हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने राज्य के छोटे और सीमांत किसानों को पराली न जलाने के लिए 100 रुपये प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की घोषणा की है। यह प्रोत्साहन राशि सरकार द्वारा खरीदी गई गैर-बासमती धान पर लागू होगी। सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था के बाद किसान खेतों में फसल अवशेष नहीं जलाएंगे।
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सीएम ने बताया कि छोटे और सीमांत किसानों द्वारा गैर-बासमती धान के फसल अवशेषों के एक्स-सीटू वा इन-सीटू प्रबंधन के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) और स्ट्रॉबेलर यूनिट संचालकों को परिचालन लागत के रूप में 1000 रुपये प्रति एकड़ का खर्च सरकार देगी। मुख्यमंत्री ने उद्योग, नवीकरणीय उर्जा और परिवहन विभागों को हिदायतें दी गई कि पराली की बेलों का उद्योगों में उपयोग करने के लिए लिंक स्थापित करें ताकि पराली का सदुपयोग किया जा सके।

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फसल अवशेषों के उचित निपटान और एक्स-सीटू तथा इन-सीटू प्रबंधन के उचित कार्यान्वयन के लिए सभी जिलों के उपायुक्तों ने प्रत्येक गांव में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। जबकि वरिष्ठ स्तर के आईएएस अधिकारियों को हर जिले में इस योजना के मार्गदर्शन और निगरानी के लिए नियुक्त किया गया है। 

इन अफसरों में आईएएस पीके को जिला कैथल, देवेंद्र सिंह को जिला फतेहाबाद, टीसी गुप्ता को जिला सिरसा, डा. महावीर सिंह को जिला जींद और अनुराग रस्तोगी को हिसार जिला सौंपा गया है। यह वे जिले हैं, जहां फसल अवशेष खेत में जलाने के ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। उधर, जिलों के नोडल अफसरों और ग्राम पंचायतों को भी यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि वे सरकार को बताएं कि उनके इलाके में अब फसल अवशेष खेतों में नहीं जलाया जा रहा है।

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