Haryana Elections 2024 : जब-जब कांग्रेस में सीएम पद के लिए हुई खींचतान, हाईकमान ने नए चेहरे पर खेला दांव
भूपेंद्र हुड्डा इस दाैड़ में आगे हैं। सैलजा और सुरजेवाला के भी अपने-अपने दावे हैं। मगर कांग्रेस के इतिहास के पुराने पन्ने पलटें तो जब भी ऐसी परिस्थितियां आई हैं हाईकमान ने नए चेहरों पर दांव खेला है।
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हरियाणा विधानसभा चुनाव में मतदान के बाद आए एग्जिट पोल को देखकर कांग्रेस में सीएम की कुर्सी को लेकर लाॅबिंग तेज होना कोई नई बात नहीं है। भूपेंद्र हुड्डा इस दाैड़ में आगे हैं। सैलजा और सुरजेवाला के भी अपने-अपने दावे हैं। मगर कांग्रेस के इतिहास के पुराने पन्ने पलटें तो जब भी ऐसी परिस्थितियां आई हैं हाईकमान ने नए चेहरों पर दांव खेला है। उन्हीं में से भूपेंद्र हुड्डा भी एक हैं। इस बार भी पार्टी हाईकमान पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अगर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो सीएम चुनना हाईकमान के लिए बड़ी चुनाैती होगा।
भजन लाल के नेतृत्व में पाया था बहुमत पर हुड्डा बने सीएम
वर्ष 2005 में कांग्रेस ने चाैधरी भजनलाल के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ा। इस चुनाव में पार्टी ने 67 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था। उस समय भी कुर्सी को लेकर पेच फंस गया था। रातभर बैठकों का दाैर चला था। पार्टी हाईकमान पर फैसला गया तो हाईकमान ने प्रदेश की कमान भूपेंद्र सिंह हुड्डा को साैंप दी। इसके बाद 2009 के चुनाव में एक बार
फिर हुड्डा ने प्रदेश का नेतृत्व किया।
हरियाणा के पहले सीएम को 13 दिन में छोड़नी पड़ी थी कुर्सी
हरियाणा गठन के बाद हुए पहले चुनाव में कांग्रेस ने 48 सीटें जीतकर पंडित भगवत दयाल को सीएम बनाया, लेकिन पार्टी नेताओं की खींचतान के बीच उन्हें मात्र 13 दिन में कुर्सी छोड़नी पड़ी। इसके बाद राव बिरेंद्र सिंह को कुर्सी मिली तो उन्हें भी पार्टी नेताओं ने ज्यादा दिन नहीं रहने दिया और मात्र 7 माह 27 दिन में कुर्सी छोड़ने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद 21 नवंबर 1967 को राष्ट्रपति शासन लगा। 12 मई 1968 को हुए मध्यवर्ति चुनाव में कांग्रेस ने फिर बहुमत हासिल किया लेकिन कुर्सी को लेकर पेच फंस गया। इसे सुलझाने के लिए पार्टी ने गुलजारी लाल और भगवत दयाल को अधिकृत किया। एक सप्ताह बाद बंसीलाल का नाम सामने आया और 21 मई 1968 में उन्होंने सीएम पद की शपथ ली।
1982 में भजन लाल का हुआ विरोध तो बंसीलाल को मिली थी कुर्सी
प्रदेश में राष्ट्रपति शासन के बाद 1977 के चुनाव में जनता दल को बहुमत मिला और 21 जून 1977 को चाैधरी देवीलाल सीएम बने। इसके कुछ माह बाद ही पार्टी विधायकों ने उनकी खिलाफत शुरू कर दी और दो साल बाद 28 जून 1979 में चाैधरी भजन लाल सीएम बने। 1980 में जब केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार बनी तो भजन लाल अपने विधायकों को लेकर कांग्रेस में चले गए और कांग्रेस ने उन्हें सीएम पद से नवाजा। इसके बाद 1982 में हुए विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिल कर कांग्रेस ने फिर भजन लाल को सीएम बनाया लेकिन सरकार के विरोध के चलते कांग्रेस हाईकमान ने दखल देते हुए चाैधरी बंसीलाल को प्रदेश की कमान साैंप दी।