Haryana News: कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं! बाबरिया का चंडीगढ़ दौरा रद्द, अब समन्वयक दिल्ली में सौपेंगे रिपोर्ट
कांग्रेस अध्यक्ष उदयभान ने बताया कि सभी समन्वयक तय समय में अपनी रिपोर्ट सौपेंगे। समन्यवकों को जिलाध्यक्ष के लिए तीन नाम सौंपने हैं। रिपोर्ट सौंपने के बाद उस पर चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि जिला अध्यक्षों की घोषणा से पहले सभी वरिष्ठ नेताओं से बातचीत भी होगी।
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संगठन के निर्माण से पहले ही कांग्रेस की गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। हरियाणा कांग्रेस प्रभारी दीपक बाबरिया ने जिला अध्यक्षों के नाम की घोषणा करने के लिए केंद्रीय समन्वयकों की टीम को अलग-अलग जिलों में भेजा था। प्रत्येक टीम के साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दो सदस्यों को भी रखा गया। मगर इन टीमों को लेकर हंगामा हो गया।
कांग्रेस के एक ग्रुप ने इसे लेकर आपत्ति जताई है। साथ ही इस ग्रुप ने इस बात पर भी सवाल उठाया था कि तय लोगों से ही समन्वयकों की मुलाकात क्यों करवाई जा रही है। इस संबंध में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला और कुमारी सैलजा ने पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की।
बाद में कुमारी सैलजा और किरण चौधरी ने राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात की थी। सूत्रों ने दावा किया है कि आलाकमान के सामने हरियाणा प्रभारी दीपक बाबरिया की कार्यशैली पर भी सवाल उठाया गया है। उन पर पक्षपात व एक ग्रुप को तवज्जो देने के आरोप लगे हैं। इससे कुछ कांग्रेसी उनकी कार्यशैली से खुश नहीं हैं। इस बीच कांग्रेस प्रभारी दीपक बाबरिया ने चंडीगढ़ का दौरा रद्द कर दिया है।
वह आठ से 12 सितंबर तक चंडीगढ़ में रुकने वाले थे। 11 सितंबर को उन्होंने सभी समन्वयकों को चंडीगढ़ रिपोर्ट में सौंपने के लिए बुला लिया था। अब उन्होंने सभी समन्वयकों को दिल्ली बुला लिया है। उनके साथ कांग्रेस अध्यक्ष उदयभान को भी आना था। उन्होंने भी अपना दौरा रद्द कर दिया है।
रिपोर्ट सौंपने के बाद होगी चर्चा: उदयभान
कांग्रेस अध्यक्ष उदयभान ने बताया कि सभी समन्वयक तय समय में अपनी रिपोर्ट सौपेंगे। समन्यवकों को जिलाध्यक्ष के लिए तीन नाम सौंपने हैं। रिपोर्ट सौंपने के बाद उस पर चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि जिला अध्यक्षों की घोषणा से पहले सभी वरिष्ठ नेताओं से बातचीत भी होगी। हालांकि वह यह नहीं बता पाए कि जिलाध्यक्षों के फाइनल नाम की सूची कब तक आएगी।
जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा किसी चुनौती से कम नहीं
जिन पदों पर नौ सालों में कोई फैसला नहीं हो सका, उन नामों पर सहमति बना पाना इतना आसान नहीं होगा। ऐसे में जिला अध्यक्षों की घोषणा किसी चुनौती से कम नहीं होगी। सूत्रों ने यह भी जानकारी दी है कि यदि सबकुछ ठीक नहीं रहा तो आखिर में आलाकमान में इस पर कोई फैसला लेगा। दरअसल, एक गुट इस मसले को लेकर हाईकमान से मिल चुका है। वहीं, हरियाणा प्रभारी बाबरिया पर जल्द से जल्द संगठन निर्माण का दबाव है। उन्हें अगले दो महीने में हरियाणा में मजबूत संगठन तैयार करना है।