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SYL: हरियाणा सीएम ने पंजाब के मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, कहा-हर मुद्दे पर चर्चा के लिए मिलने को तैयार हूं

Mon, 16 Oct 2023 01:35 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 16 Oct 2023 01:35 PM IST
सार

मनोहर लाल ने कहा कि हरियाणा का प्रत्येक नागरिक 1996 के मूल वाद संख्या 6 के डिक्री के अनुसार पंजाब के हिस्से में एसवाईएल नहर के निर्माण के शीघ्र पूरा होने की उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहा है। इसके अलावा वे अपने लोगों और दक्षिणी हरियाणा में सूखी भूमि के इस लंबे समय से प्रतीक्षित सपने को साकार करने के लिए कुछ भी करने को हमेशा तैयार हैं।

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Haryana CM Manohar lal writes Punjab cm Bhagwant Mann on SYL Issue
भगवंत मान और मनोहर लाल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सतलुज-यमुना लिंक नहर (एसवाईएल) पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सोमवार को इस मुद्दे को हल करने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को बातचीत का न्योता दिया है। मान को लिखे पत्र में उन्होंने कहा वे एसवाईएल के निर्माण के रास्ते में आने वाली किसी भी बाधा या मुद्दे को हल करने के लिए उनसे मिलने को तैयार हैं।

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उन्होंने उम्मीद जताई की पंजाब सरकार निश्चित रूप से इस मामले को हल करने में अपना सहयोग देगी। दरअसल, चार अक्तूबर को शीर्ष अदालत ने पंजाब को कड़े शब्दों में कहा कि आप कोई समाधान खोजें। वरना हमें आदेश पारित करना होगा। साथ ही केंद्र को राज्य में पूरा किए गए काम की सीमा निर्धारित करने के लिए सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया था। उसके बाद से पंजाब सरकार व राज्य के विपक्षी दल कोर्ट के आदेश के खिलाफ बगावती तेवर अपनाए हुए हैं। वहीं, हरियाणा के विपक्षी दल सरकार पर दबाव बनाने में जुटे हैं कि जब सुप्रीम कोर्ट से आदेश आ चुका है तो वह इस मुद्दे पर तेजी दिखाएं और केंद्र से बातचीत कर जल्द सर्वे करवाएं। 
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केंद्र से पहले हरियाणा सरकार ने पहल कर बड़ा दांव खेला है। अब इस पत्र पर पंजाब की प्रतिक्रिया का इंतजार है। मान के नाम लिखे पत्र में मनोहर लाल ने कहा कि एसवाईएल को लेकर चार अक्तूबर को सर्वोच्च न्यायालय ने एक विस्तृत आदेश पारित किया है। इसमें सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि निष्पादन जल के आवंटन से संबंधित नहीं है। उन्होंने कहा कि हरियाणा का प्रत्येक नागरिक पंजाब के हिस्से में एसवाईएल नहर के निर्माण के शीघ्र पूरा होने की उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहा है।

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सीएम मान ने तीन अक्तूबर को लिखा था पत्र

पंजाब के मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ठीक एक दिन पहले तीन अक्तूबर को मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखा था और इस मुद्दे को लेकर बैठक करने के लिए समय मांगा था। इस पत्र पर हरियाणा सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं गया। इससे पहले दोनों के बीच आखिरी बार पिछले साल 14 अक्तूबर को द्विपक्षीय बैठक हुई थी। इसके बाद केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने चार जनवरी 2023 को दूसरे दौर की चर्चा की, जिसमें दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद थे। तीन बार की बैठकों में दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई थी।

हरियाणा को यह हो रहा है नुकसान

पंजाब में एसवाईएल का निर्माण नहीं होने से हरियाणा को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस पानी के न मिलने से दक्षिणी-हरियाणा में भूजल स्तर भी काफी नीचे चला गया है। इस वजह से किसान डीजल का इस्तेमाल और बिजली से नलकूप चलाकर सिंचाई करते हैं, जिससे उन्हें हर वर्ष 100 करोड़ रुपये से लेकर 150 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ता है। 

सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से 10 लाख एकड़ क्षेत्र को सृजित सिंचाई क्षमता बेकार पड़ी है। इससे हरियाणा को हर वर्ष 42 लाख टन खाद्यान्नों की भी हानि उठानी पड़ती है। 1981 के समझौते के अनुसार 1983 में एसवाईएल बन जाती तो हरियाणा 130 लाख टन अतिरिक्त खाद्यान्नों व दूसरे अनाजों का उत्पादन करता। 15 हजार प्रति टन की दर से इस कृषि पैदावार का कुल मूल्य 19,500 करोड़ रुपये बनता है।

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