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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल बोले- कांग्रेस के पास मुद्दा बचा ही नहीं, अब किसानों को भड़का रही

Fri, 18 Sep 2020 01:30 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 18 Sep 2020 01:30 AM IST
सार

  • कृषि अध्यादेशों पर आंदोलन के खिलाफ मुख्यमंत्री मनोहर ने संभाला मोर्चा
  • कथित किसान नेता भी हमारे भोले-भाले किसानों के नाम पर सियासत चमका रहे
  • किसानों, आढ़तियों व अन्य हितधारकों के हितों की रक्षा के लिए प्रदेश सरकार गंभीर

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Haryana CM Manohar Lal Statements on Agriculture Ordinance
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर - फोटो : Twitter

विस्तार

अध्यादेशों पर आंदोलन के खिलाफ प्रदेश में अब मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मोर्चा संभाल लिया है। सीएम ने प्रेसवार्ता के दौरान विरोधियों के निशाने पर लेते हुए कहा कि इसका विरोध करने वाली कांग्रेस के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है। जबकि कुछ कथित किसान नेता ही राजनीतिक लोगों के बहकावे में आकर किसानों को भड़का रहे हैं।

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हमारे भोले-भाले किसान भी उनके बहकावे में आ रहे हैं। उन्हें मैं सतर्क करना चाहता हूं कि वे विरोधियों की राजनीति का मोहरा न बनें। उनके अनुसार प्रदेश सरकार अब किसानों को इन अध्यादेशों के प्रति उन्हें जागरूक बनाएगी। जबकि प्रदेश का किसान भी अब इन अध्यादेशों का फायदा समझने लगा है।
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सीएम मनोहर लाल ने कहा कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में कृषि संबंधी अधिनियमों में बदलाव का वादा किया गया था। मगर हैरानी की बात है कि अब जब हम इन अधिनियमों में सुधार कर रहे तो कांग्रेसियों को दिक्कत क्यों हो रही है? इन अध्यादेशों से किसानों के लिए एक दूसरी राह खुली है न कि पहली राह बंद हुई है। 

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दिक्कत तो तब होती जब पहली राह बंद होती। पहली राह में किसान चाहे तो अपना अनाज मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचे और दूसरी राह में चाहे तो किसान अपना अनाज मंडियों से बाहर न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी अधिक दाम पर प्राइवेट ट्रेडर्स को बेचे। उसमें उसे मार्केट फीस भी नहीं देनी और न ही कोई अन्य कर देना होगा।

अब कांग्रेस और कुछ कथित किसान नेता बताएं, कैसे यह बदलाव किसान विरोधी हो सकता है ? जब किसानों के लिए दोनों रास्ते खुले हैं। किस रास्ते पर चलना है यह किसान की मर्जी, उस पर कोई दबाव नहीं।

सीएम ने कहा कि सरकार का काम यह सुनिश्चित करना कि मंडियों के भीतर या मंडियों के बाहर किसानों का अनाज न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर न बिके। सीएम ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि इन अध्यादेशों को अच्छे से समझें और सरकार का सहयोग करें। यह उनके लिए उनकी खेती को फायदे का सौदा बनाने वाले हैं। 

उन्होंने दावा किया कि हरियाणा के किसान इस संदर्भ में जागरूक हो रहे हैं। सरकार को सूचना मिली है कि 10 सितंबर को पिपली में हुए किसान आंदोलन के बाद जागरूक हुए किसानों ने अब इन अध्यादेशों को अच्छे से समझते हुए अब किए जा रहे धरना प्रदर्शनों से किनारा कर लिया है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई भी किसान संगठन या अन्य कोई व्यक्ति सुझाव देना चाहते हैं या इन अध्यादेशों के बारे में कोई प्रश्न पूछना चाहते हैं तो वे सरकार से बातचीत करने के लिए आगे आएं। मैं विश्वास दिलाता हूं कि उनके सुझावों पर सरकार द्वारा गंभीरता से विचार किया जाएगा।

फसल का दाना-दाना खरीदेगी सरकार

सीएम मनोहर लाल ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि उनकी फसल का एक-एक दाना न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। उन्होंने कहा कि कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग में एमएसपी से नीचे कोई कॉन्ट्रेक्ट नहीं होगा। हरियाणा में अभी भी कुछ जिलों में 333 कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग हो रही है, जिसमें सिरसा में 1100 एकड़, फतेहाबाद में 350 एकड, भिवानी में 900 एकड़ और गुरुग्राम में 321 एकड़ भूमि पर कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग होती है। यह एक सफल प्रयोग है। 

उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष इतना ही किसान हितैषी है तो कांग्रेस शासित राजस्थान और पंजाब से कहना चाहिए कि वे बाजरा और मक्का की सरकारी खरीद शुरू करें, जैसे हरियाणा कर रहा है। इस बार हमने तय किया है कि प्रदेश सरकार राजस्थान और पंजाब सहित अन्य राज्यों से आने वाली उपज की खरीद नहीं करेगा।

प्रदेश सरकार खरीफ 2020 खरीद सीजन के लिए पूरी तरह से तैयार है। इसके लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को एक पत्र लिखकर 1 अक्टूबर की बजाय 25 सितंबर से खरीद शुरू करने  की अनुमति मांगी है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के संकट के समय में गेहूं और सरसों की खरीद के लिए किसानों की सुविधा के लिए मंडियों और खरीद केंद्रों की संख्या में वृद्धि की गई। इसी प्रकार, इस साल, धान की खरीद के लिए राइस मिलों में 200 नई मंडियां खोली जाएंगी, ताकि खरीद के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग और अन्य मानदंडों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

स्कूल खोलने पर मंथन मोड में सरकार
हरियाणा में स्कूल 22 सितंबर से खोले जाएंगे या नहीं। इस पर अभी सरकार मंथन मोड में हैं। सीएम ने कहा कि केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के मुताबिक ही स्कूल खुलेंगे। मगर इसके लिए दोगुना इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए। इसके लिए क्या इंतजाम है। शिक्षा विभाग इस पर मंथन कर रहा है। वैसे तो 22 सितंबर से स्कूल खोले जाने की बात कही जा रही है। मगर इस पर अंतिम फैसला मंथन की रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा। बच्चे ऑनलाइन सिस्टम से पढ़ रहे हैं। हम मानते हैं कि ये सिस्टम फिजिकली सिस्टम जितना कारगर तो नहीं है। मगर ये जरूर है कि मौजूदा परिस्थितियों बच्चों को पढ़ाई का ये नया विकल्प जरूर मिला है।

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