हरियाणा कैबिनेटः सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण, युवाओं के लिए यूथ पॉलिसी, खेल विश्वविद्यालय
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हरियाणा सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले जनहितैषी फैसलों की रफ्तार तेज कर दी है। चार फरवरी की तरह ही बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में भी मनोहर लाल मंत्रिमंडल ने अनेक जनहित के फैसले लिए हैं। सरकार चुनाव से पहले किसी भी वर्ग को निराश नहीं करना चाहती। केंद्र सरकार की ओर से सवर्णों के लिए किए गए दस फीसदी आरक्षण को हरियाणा में भी लागू कर दिया गया है।
मंत्रिमंडल की बैठक में इस पर मुहर लगा दी गई। इसके अलावा युवाओं के लिए यूथ पॉलिसी बनाने और राई स्पोर्ट्स स्कूल को खेल विश्वविद्यालय का दर्जा देने के साथ ही अनेक अहम निर्णय लिए गए हैं। मंत्रिमंडल के फैसले अनुसार सभी विभागों, बोर्डों, निगमों और स्थानीय निकायों में ग्रुप ए, बी, सी और डी पदों पर सीधी भर्ती और सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के मामले में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को दस प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।
आरक्षण के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े परिवार की परिभाषा भी सरकार ने तय कर दी है। परिवार में आर्थिक आरक्षण का लाभ माता-पिता, पति-पत्नी, 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और भाई-बहन इत्यादि को मिलेगा। आय में सभी स्रोतों से आय शामिल होगी, जैसे वेतन, कृषि, व्यवसाय और पेशा।
आय को तहसीलदार रैंक का अधिकारी करेगा प्रमाणित
नौकरी या दाखिला के लिए आवेदन करने के वर्ष से पहले वित्तीय वर्ष की आय को आर्थिक आरक्षण का आधार माना जाएगा। परिवारों की आय और संपत्ति को तहसीलदार रैंक के अधिकारी प्रमाणित करेंगे। मुख्य सचिव और राजस्व विभाग के निर्देशानुसार सभी संबंधित दस्तावेजों को सावधानीपूर्वक जांच करने के बाद ही सत्यापित तहसीलदार रैंक के अधिकारी द्वारा सत्यापित किया जाएगा।
पारिवारिक आय करोड़ों होने के बावजूद मिलेगा लाभ
जिन व्यक्तियों का परिवार निम्नलिखित में से किसी भी संपत्ति का मालिक है या उसके पास है, उसे पारिवारिक आय के बावजूद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के रूप में पहचाना जाएगा, जैसे पांच एकड़ कृषि भूमि और उससे अधिक, 1000 वर्ग फीट और उससे अधिक के आवासीय फ्लैट, अधिसूचित नगरपालिकाओं में 100 वर्ग गज या उससे अधिक का आवासीय भूखंड और अधिसूचित नगर पालिकाओं के अलावा अन्य क्षेत्रों में 200 वर्ग गज या उससे अधिक का आवासीय भूखंड, जिसकी कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक हो।
युवाओं के सर्वांगीण विकास पर सरकार का फोकस
मंत्रिमंडल ने हरियाणा राज्य युवा नीति-2019 बनाई है। इसे मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी। सरकार का उद्देश्य युवाओं को उनकी पूर्ण क्षमता प्राप्त करने के लिए सशक्त बनाना है ताकि समाज का सर्वांगीण विकास हो सके। इसके तहत 15 से 29 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाएगा। नीति का उद्देश्य दक्ष कार्य बल का तैयार करना है, जो राज्य और भारत के आर्थिक विकास में स्थायी योगदान दे सके।
भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत और स्वस्थ पीढ़ी विकसित करने पर भी सरकार का जोर रहेगा। खेल मंत्री अनिल विज ने बताया कि नीति सामाजिक मूल्यों को स्थापित करेगी और राष्ट्रीय स्वामित्व के निर्माण के लिए सामुदायिक सेवा को बढ़ाएगी। सरकार द्वारा जोखिम में युवाओं का सहयोग किया जाएगा, सभी वंचित और हाशिए पर चल रहे युवाओं को समान अवसर प्रदान किए जाएंगे।
खेल और युवा मामले विभाग उपयुक्त समन्वय तंत्र स्थापित कर नीति के क्रियान्वयन के लिए नोडल विभाग के रूप में कार्य करेगा। शिक्षा, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, महिला और बाल विकास, सामाजिक न्याय और अधिकारिता, तकनीकी शिक्षा, रोजगार एवं प्रशिक्षण, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, पंचायती राज, ग्रामीण विकास, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, वन और पर्यावरण, संस्कृति विभाग, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि, राजस्व और आपदा प्रबंधन, गृह, श्रम और उद्योग विभाग के मंत्रियों, मुख्य सचिव और प्रधान सचिव वित्त के साथ मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चाधिकार समिति का गठन किया जाएगा।
समिति युवा नीति के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी। खेल और युवा मामले विभाग के प्रशासनिक सचिव उच्चाधिकार समिति के सदस्य-संयोजक होंगे। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में टास्क फोर्स भी गठित होगी।
युवा आयोग गठित करने के दरवाजे खुले
सरकार प्रदेश में युवाओं को शिक्षित करने, उन्हें सशक्त बनाने और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की देख-रेख के लिए राज्य युवा आयोग का गठन कर सकती है। इसके अध्यक्ष और सदस्यों की संख्या को डीम्ड-फिट माना जाएगा। नीति का मूल्यांकन हर तीन साल में एक बार तटस्थ और विश्वसनीय एजेंसियों के माध्यम से कराया जाएगा। स्थिति अनुसार जरूरी परिवर्तनों के लिए हर पांच साल में युवा नीति की समीक्षा होगी।
राई में ही बनेगा खेल विश्वविद्यालय
खेल एवं युवा मामले मंत्री अनिल विज ने कहा कि प्रदेश में खेल शिक्षा, खेल विज्ञान, खेल तकनीक, खेल प्रबंधन व खेल प्रशिक्षण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए पहले ‘हरियाणा खेल विश्वविद्यालय’ की स्थापना सोनीपत के राई में की जाएगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी है। विश्वविद्यालय का निर्माण खेलों के विभिन्न पहलुओं और अनुसंधान को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।
इसमें खिलाड़ियों को खेलों से संबंधित विभिन्न रोजगार के लिए तैयार करेंगे। इनमें खेल विज्ञान, फिजियोथैरपी व खेल चिकित्सा संबंधी रोजगार के अवसर भी शामिल होंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय में अलग से एक प्रशिक्षण संस्थान भी बनाया जाएगा। विज ने बताया कि विश्वविद्यालय में खेल चिकित्सा, खेल आधारभूत इंजिनियरिंग, खेल विज्ञान, कांसियोलॉजी एवं क्लिनिकल बॉयोमैकेनिक, खेल मनोविज्ञान, खेल पोषण, पुनर्वास एवं फिजीयोथैरेपी, खेल पत्रकारिता, खेल विपणन तथा खेल कोचिंग एवं शारीरिक शिक्षा विभाग बनाए जाएंगे।
विश्वविद्यालय में विभिन्न विषयों की संयुक्त डिग्री को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिसमें खेल व खेल संबंधित विषयों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका कानून में भी प्रावधान होगा। राज्यपाल विश्वविद्यालय के संरक्षक होंगे व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात खिलाड़ी को विश्वविद्यालय का कुलाधिपति बनाया जाएगा। कुलपति न केवल एक उत्कृष्ट खिलाड़ी होगा, बल्कि खेल के क्षेत्र में विशेष साख रखने वाला भी होगा। उनके चयन के लिए न्यूनतम दो खेल हस्तियों व एक शैक्षणिक प्रतिनिधि को शामिल किया जाएगा।