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हरियाणा विधानसभाः कांग्रेसी विधायकों को सदन से बाहर निकाला
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Tue, 29 Mar 2016 12:35 PM IST
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कांग्रेसी विधायकों को सदन से बाहर निकाला
- फोटो : amarujala
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विधानसभा के बजट सत्र में प्रश्नकाल की शुरुआत होते ही तीन कांग्रेसी विधायकों के छह महीने के निलंबन का मामला गर्माया। कांग्रेस पार्टी के विधायकों की दलील थी कि उन्हें सजा देने के बाद 12 विधायकों को दोबारा सदन में बुला लिया, लेकिन तीन अन्य विधायकों को किस प्रावधान के तहत छह महीने के लिए बाहर रखा गया। प्रश्नकाल के दौरान चूंकि अन्य मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकती है, इसलिए स्पीकर ने प्रश्नकाल के बाद इस मामले पर चर्चा करने को कहा।
प्रश्नकाल के समाप्त होने के बाद जब कांग्रेस के विधायक सदन में लौटे तो उन्होंने फिर यह सवाल उठाया। इस पर भाजपा के विधायकों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बिना हस्ताक्षर सदन में किसी भी सदस्य को न तो अंदर रहने का अधिकार है और न ही इस दौरान सदन में अपनी कोई बात रख सकते हैं।
काफी हंगामे के बाद भी जब मामला नहीं सुलझा तो मार्शल के सहयोग से पांच कांग्रेसी विधायकों को सदन से बाहर कर दिया गया। प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद पांच कांग्रेसी विधायक करण दलाल, रघुवीर कादयान, गीता भुक्कल, एएस दांगी व एक अन्य सदन में लौटे। करण दलाल ने जब इस मुद्दे को दोबारा उठाया तो स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, ज्ञानचंद गुप्ता सहित अन्य विधायकों ने भी इस पर सवाल खड़े किए और स्पीकर से आग्रह किया कि हस्ताक्षर के बिना सदन के अंदर न तो कुछ बोलने और न ही बैठने की इजाजत दी जानी चाहिए।
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इस दौरान अनिल विज ने कांग्रेसी विधायकों पर जमकर हमले बोले और नियम-छह का हवाला देते हुए सदन से उन्हें बाहर करने की मांग की और आखिर तक दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। काफी समझाने के बाद भी कांग्रेसी विधायक अड़े रहे तो आखिरकार स्पीकर को उन्हें बाहर भेजने के लिए मार्शल और पुलिस अधिकारियों का सहयोग लेना पड़ा। सदन से बाहर किए जाने के तरीके पर आपत्ति जताते हुए गीता भुक्कल ने कहा कि विधायकों से ऐसा व्यवहार निंदनीय है। उनकी सुरक्षा कर्मियों के साथ कहासुनी भी हुई, लेकिन बाद में लेडी मार्शल के पहुंचने पर वह खुद बाहर चली गईं। विधायक करण दलाल ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि तजुर्बा नहीं होने की वजह से ऐसे बर्ताव किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जाट आरक्षण आंदोलन में सरकार की विफलता को सदन में नहीं उठाया जा सके, इसे देखते हुए कांग्रेसी विधायकों को बाहर करने की साजिश रची गई। हाजिरी के बारे में पूछने पर कहा कि इससे उन्हें वेतन का नुकसान होगा, लेकिन उन्हें शर्त के तौर पर थोपा जा रहा है। विधायक गीता भुक्कल ने भी सदन की कार्रवाई के दौरान विधायकों को बाहर करने के बर्ताव को शर्मनाक बताया।
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प्रश्नकाल के समाप्त होने के बाद जब कांग्रेस के विधायक सदन में लौटे तो उन्होंने फिर यह सवाल उठाया। इस पर भाजपा के विधायकों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बिना हस्ताक्षर सदन में किसी भी सदस्य को न तो अंदर रहने का अधिकार है और न ही इस दौरान सदन में अपनी कोई बात रख सकते हैं।
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काफी हंगामे के बाद भी जब मामला नहीं सुलझा तो मार्शल के सहयोग से पांच कांग्रेसी विधायकों को सदन से बाहर कर दिया गया। प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद पांच कांग्रेसी विधायक करण दलाल, रघुवीर कादयान, गीता भुक्कल, एएस दांगी व एक अन्य सदन में लौटे। करण दलाल ने जब इस मुद्दे को दोबारा उठाया तो स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, ज्ञानचंद गुप्ता सहित अन्य विधायकों ने भी इस पर सवाल खड़े किए और स्पीकर से आग्रह किया कि हस्ताक्षर के बिना सदन के अंदर न तो कुछ बोलने और न ही बैठने की इजाजत दी जानी चाहिए।
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इस दौरान अनिल विज ने कांग्रेसी विधायकों पर जमकर हमले बोले और नियम-छह का हवाला देते हुए सदन से उन्हें बाहर करने की मांग की और आखिर तक दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। काफी समझाने के बाद भी कांग्रेसी विधायक अड़े रहे तो आखिरकार स्पीकर को उन्हें बाहर भेजने के लिए मार्शल और पुलिस अधिकारियों का सहयोग लेना पड़ा। सदन से बाहर किए जाने के तरीके पर आपत्ति जताते हुए गीता भुक्कल ने कहा कि विधायकों से ऐसा व्यवहार निंदनीय है। उनकी सुरक्षा कर्मियों के साथ कहासुनी भी हुई, लेकिन बाद में लेडी मार्शल के पहुंचने पर वह खुद बाहर चली गईं। विधायक करण दलाल ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि तजुर्बा नहीं होने की वजह से ऐसे बर्ताव किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जाट आरक्षण आंदोलन में सरकार की विफलता को सदन में नहीं उठाया जा सके, इसे देखते हुए कांग्रेसी विधायकों को बाहर करने की साजिश रची गई। हाजिरी के बारे में पूछने पर कहा कि इससे उन्हें वेतन का नुकसान होगा, लेकिन उन्हें शर्त के तौर पर थोपा जा रहा है। विधायक गीता भुक्कल ने भी सदन की कार्रवाई के दौरान विधायकों को बाहर करने के बर्ताव को शर्मनाक बताया।