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कांग्रेस बिजली निगमों का 27 हजार करोड़ का कर्जा छोड़ गई थी : सीएम
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सरकार की ओर से पेश किए गए बजट अनुमानों पर चर्चा हुई, कांग्रेस विधायकों ने सरकार को घेरा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। विधानसभा में पेश किए गए बजट अनुमानों पर सोमवार को चर्चा शुरू हुई। इस दौरान सत्ता पक्ष ने बजट को शानदार बताया, जबकि विपक्ष ने महंगाई, बेरोजगारी और कर्ज के मुद्दे पर सरकार को घेरा। मंगलवार को भी बजट चर्चा होगी। उसके बाद इसे पास कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा सरकार की ओर से लिया गया कर्ज जीएसडीपी के अनुपात यानी तीन प्रतिशत की सीमा के अंदर ही है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कांग्रेस के नेता अपने समय का कर्ज 70 हजार करोड़ रुपये बताते हैं, जबकि उन्हें बिजली निगमों का 27 हजार करोड़ रुपये का कर्ज भी जोड़ना चाहिए। उनके इस 27 हजार करोड़ रुपये को हमने सरकार के खाते में लिया और इस कर्ज को पांच साल में उतारना था। अगले साल तक यह उतर जाएगा। इसके अलावा, पिछली सरकार का सार्वजनिक उपक्रमों के कर्ज में से भी 17 हजार करोड़ रुपये कम किया है। वहीं, कांग्रेस विधायकों ने कहा कि बजट में सरकार ने कर्ज के आंकड़ों को छिपाने का काम किया है। भूपेंद्र हुड्डा ने भी सरकार के आंकड़ों पर आपत्ति जताई। कांग्रेस विधायक राव दान सिंह ने कहा कि बजट में सरकार की आय को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया जाता है, जो वास्तव में नहीं होती। इसे पूरा करने के लिए सरकार कर्ज लेती है। बजट में पोर्टल और शब्दों की मार है। कांग्रेस विधायक अमित सिहाग ने कहा कि सरकार को किसानों का पूरा कर्जा माफ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि रोजगार कौशल से नौकरी मिलती है और अगले महीने ही उसकी आय परिवार पहचान-पत्र में ऊपर चली जाती है। बाद में उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है। फिरोजपुर-झिरका से कांग्रेस विधायक मामन खान इंजीनियर ने कहा कि सरकार का कर्ज असल में 4 लाख 51 हजार करोड़ से अधिक है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। विधानसभा में पेश किए गए बजट अनुमानों पर सोमवार को चर्चा शुरू हुई। इस दौरान सत्ता पक्ष ने बजट को शानदार बताया, जबकि विपक्ष ने महंगाई, बेरोजगारी और कर्ज के मुद्दे पर सरकार को घेरा। मंगलवार को भी बजट चर्चा होगी। उसके बाद इसे पास कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा सरकार की ओर से लिया गया कर्ज जीएसडीपी के अनुपात यानी तीन प्रतिशत की सीमा के अंदर ही है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कांग्रेस के नेता अपने समय का कर्ज 70 हजार करोड़ रुपये बताते हैं, जबकि उन्हें बिजली निगमों का 27 हजार करोड़ रुपये का कर्ज भी जोड़ना चाहिए। उनके इस 27 हजार करोड़ रुपये को हमने सरकार के खाते में लिया और इस कर्ज को पांच साल में उतारना था। अगले साल तक यह उतर जाएगा। इसके अलावा, पिछली सरकार का सार्वजनिक उपक्रमों के कर्ज में से भी 17 हजार करोड़ रुपये कम किया है। वहीं, कांग्रेस विधायकों ने कहा कि बजट में सरकार ने कर्ज के आंकड़ों को छिपाने का काम किया है। भूपेंद्र हुड्डा ने भी सरकार के आंकड़ों पर आपत्ति जताई। कांग्रेस विधायक राव दान सिंह ने कहा कि बजट में सरकार की आय को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया जाता है, जो वास्तव में नहीं होती। इसे पूरा करने के लिए सरकार कर्ज लेती है। बजट में पोर्टल और शब्दों की मार है। कांग्रेस विधायक अमित सिहाग ने कहा कि सरकार को किसानों का पूरा कर्जा माफ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि रोजगार कौशल से नौकरी मिलती है और अगले महीने ही उसकी आय परिवार पहचान-पत्र में ऊपर चली जाती है। बाद में उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है। फिरोजपुर-झिरका से कांग्रेस विधायक मामन खान इंजीनियर ने कहा कि सरकार का कर्ज असल में 4 लाख 51 हजार करोड़ से अधिक है।