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बजट समीक्षा: हरियाणा के हर व्यक्ति पर 70000 रुपये कर्ज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 25 Mar 2016 09:15 AM IST
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हरियाणा के पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रो. संपत सिंह
- फोटो : file
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हरियाणा के पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रो. संपत सिंह ने प्रदेश के वर्ष 2016-17 के बजट को आम लोगों के लिए कष्टकारी करार दिया है। प्रदेश के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु द्वारा 21 फरवरी को विधानसभा में पेश किए गए बजट पर प्रतिक्त्रिस्या व्यक्त करते हुए पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार ने 50 वर्षों में लिए 70 हजार करोड़ रुपये के कर्ज के मुकाबले केवल दो वर्ष में 70 हजार करोड़ रुपये कर्ज लेने का फैसला किया है। इस तरह आने वाले वित्त वर्ष में जनता पर 1 लाख 40 हजार करोड़ रुपये का कुल कर्ज होगा। यानी प्रदेश में जन्म लेने वाले हर बच्चे के सिर पर 70 हजार रुपये का कर्ज जन्म के साथ ही चढ़ जाएगा।
संपत सिंह ने कहा कि इस बजट में वित्त मंत्री ने कहीं चालू मूल्यों के आंकड़ों का सहारा लिया है तो कहीं स्थिर मूल्यों का। किसी आंकड़े का मुकाबला 2015-16 के बजाय 2014-15 से किया गया है। कई जगह अनुमानित व्यय तो कई जगह संशोधित अनुमान का सहारा लिया है। उन्होंने कहा कि योजना व्यय व पूंजीगत व्यय प्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
आगामी वित्त वर्ष में प्रस्तावित खर्चा 40,256 करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जबकि 2015-16 में यह व्यय 42,747 करोड़ रुपये आंका गया है। यानी अगले साल का बजट इस वर्ष के मुकाबले 6 प्रतिशत कम होगा। इसी तरह पूंजीगत व्यय आगामी वर्ष के लिए 13,503 करोड़ रुपये रखा गया है जबकि पिछले वर्ष यह व्यय 20,162 करोड़ रुपये था, यानी अगले वर्ष के लिए 33 प्रतिशत कम बजट रखा गया है। परिणाम स्वरूप अगामी वर्ष में लोगों के हित के कामों के लिए बहुत ही कम बजट है। उन्होंने कहा कि इस बजट में 25,950 करोड़ रुपये उदय योजना के नाम पर बिजली निगमों के कर्जे को चुकाने के लिए सरकार वहन करेगी। निगमों की चोरी, अकर्मणता और बकाया बिजली बिलों का भार आम जनता पर डाला गया है।
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संपत सिंह ने कहा कि इस बजट में वित्त मंत्री ने कहीं चालू मूल्यों के आंकड़ों का सहारा लिया है तो कहीं स्थिर मूल्यों का। किसी आंकड़े का मुकाबला 2015-16 के बजाय 2014-15 से किया गया है। कई जगह अनुमानित व्यय तो कई जगह संशोधित अनुमान का सहारा लिया है। उन्होंने कहा कि योजना व्यय व पूंजीगत व्यय प्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
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आगामी वित्त वर्ष में प्रस्तावित खर्चा 40,256 करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जबकि 2015-16 में यह व्यय 42,747 करोड़ रुपये आंका गया है। यानी अगले साल का बजट इस वर्ष के मुकाबले 6 प्रतिशत कम होगा। इसी तरह पूंजीगत व्यय आगामी वर्ष के लिए 13,503 करोड़ रुपये रखा गया है जबकि पिछले वर्ष यह व्यय 20,162 करोड़ रुपये था, यानी अगले वर्ष के लिए 33 प्रतिशत कम बजट रखा गया है। परिणाम स्वरूप अगामी वर्ष में लोगों के हित के कामों के लिए बहुत ही कम बजट है। उन्होंने कहा कि इस बजट में 25,950 करोड़ रुपये उदय योजना के नाम पर बिजली निगमों के कर्जे को चुकाने के लिए सरकार वहन करेगी। निगमों की चोरी, अकर्मणता और बकाया बिजली बिलों का भार आम जनता पर डाला गया है।
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इन मुद्दों पर खामोश रहा बजट
बजट
- फोटो : demo pic
संपत सिंह ने कहा कि प्रदेश के किसानों को फसलों के पर्याप्त दाम देने के लिए स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करनी चाहिए थी लेकिन किसानों को मुआवजा देने के लिए सरकार ने अपना पल्ला झाड़कर बीमा कंपनियों के हवाले कर दिया, जो व्यवहारिक नहीं है। इसी तरह प्रदेश के गरीब मजदूरों को भी कोई राहत नहीं दी गई है।
व्यापारियों को पहले ही सेवा कर के रूप में 15 प्रतिशत देना पड़ रहा है, उन्हें करों में कोई राहत नहीं मिली है। प्रदेश के कर्मचारी पंजाब के समान वेतनमान की आस लगाए बैठे थे, ताकि आने वाले वर्ष में सातवां वेतन लागू होगा तो उन्हें इस समानता का फायदा मिलेगा। कच्चे व अनुबंध आधार पर लगे कर्मचारियों को पक्का करने का वायदा किया गया था, बजट में वह भी गायब है।
व्यापारियों के लिए पिछले वर्ष घोषणा की गई थी कि छोटे व्यापारी को एक करोड़ रुपये तक का कर्जा सस्ते ब्याज पर और 30 प्रतिशत सबसीडी के साथ दिया जाएगा। इस वित्त वर्ष में यह सभी वायदे गायब हैं। लाला लाजपत राय वेटरेनरी युर्निवसिटी बनाने का भी पिछले बजट में जिक्त्रस् किया गया था जो इस वर्ष बजट से गायब है। संपत सिंह ने कहा कि चुनाव घोषणा पत्र में 154 वायदे और पिछले बजट में 44 वायदे किए गए थे। इन सभी 198 वायदों पर अब तक सरकार ने कोई काम नहीं किया है।
व्यापारियों को पहले ही सेवा कर के रूप में 15 प्रतिशत देना पड़ रहा है, उन्हें करों में कोई राहत नहीं मिली है। प्रदेश के कर्मचारी पंजाब के समान वेतनमान की आस लगाए बैठे थे, ताकि आने वाले वर्ष में सातवां वेतन लागू होगा तो उन्हें इस समानता का फायदा मिलेगा। कच्चे व अनुबंध आधार पर लगे कर्मचारियों को पक्का करने का वायदा किया गया था, बजट में वह भी गायब है।
व्यापारियों के लिए पिछले वर्ष घोषणा की गई थी कि छोटे व्यापारी को एक करोड़ रुपये तक का कर्जा सस्ते ब्याज पर और 30 प्रतिशत सबसीडी के साथ दिया जाएगा। इस वित्त वर्ष में यह सभी वायदे गायब हैं। लाला लाजपत राय वेटरेनरी युर्निवसिटी बनाने का भी पिछले बजट में जिक्त्रस् किया गया था जो इस वर्ष बजट से गायब है। संपत सिंह ने कहा कि चुनाव घोषणा पत्र में 154 वायदे और पिछले बजट में 44 वायदे किए गए थे। इन सभी 198 वायदों पर अब तक सरकार ने कोई काम नहीं किया है।