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बीजेपी सरकार ने किया चौंकाने वाला कारनामा

Sun, 04 Jan 2015 01:12 PM IST
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 04 Jan 2015 01:12 PM IST
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Haryana BJP Govt Appointed Law Officer without any Application for Post

हरियाणा की बीजेपी सरकार ने बेहद चौंकाने वाला कारनामा किया है। मामला लॉ अफसरों की नियुक्ति से जुड़ा है। हरियाणा सरकार के एडवोकेट जनरल (एजी) कार्यालय में अतिरिक्त, सहायक एवं उप एडवोकेट जनरल वर्ग के जिन लॉ अफसरों को नियुक्त किया गया है, उनमें से किसी ने भी कभी इन पदों के लिए कोई आवेदन नहीं किया था।

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खास बात यह भी है कि सरकार ने इन नियुक्तियों के लिए कोई योग्यता निर्धारित ही नहीं की है। सरकार ने एक ओर तो बिना आवेदन अनेक लोगों को लॉ अफसर नियुक्त कर दिया, वहीं आवेदन करने वाले व्यक्ति को जगह नहीं दी।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रेक्टिस कर रहे एडवोकेट प्रदीप कुमार रापड़िया ने एजी कार्यालय में लॉ अफसर पद के लिए आवेदन किया था। उन्हें सरकार ने इस पद पर नियुक्ति नहीं दी।
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वहीं, सरकार के गृह एवं न्याय विभाग ने अतिरिक्त एडवोकेट जनरल, सहायक एडवोकेट जनरल व उप एडवोकेट जनरल स्तर के करीब छह दर्जन लॉ अफसर नियुक्त कर दिए।

आरटीआई में मांगी जानकारी से हुए कई खुलासे

Haryana BJP Govt Appointed Law Officer without any Application for Post

रापड़िया ने एजी दफ्तर में नियुक्त किए गए लॉ अफसरों के आवेदन विभाग से आरटीआई के माध्यम से मांग लिए। यह भी पूछा कि इन नियुक्तियों के लिए क्या प्रक्रिया निर्धारित है। अतिरिक्त मुख्य सचिव न्याय विभाग प्रबंधन कार्यालय से सुपरिंटेंडेंट जेल एवं न्यायिक-1 ने रापड़िया को जवाब भेजा है।

इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार लॉ अफसरों की वैकल्पिक व्यवस्था करती है और इन्हें लगाने के लिए कोई लिखित योग्यता एवं नियम निर्धारित नहीं किए गए है। यह भी कहा गया कि नियुक्ति अनुबंध आधार पर होती है और सरकार किसी भी वक्त इन लॉ अफसरों को बिना कारण बताए और बगैर नोटिस दिए हटा सकती है।

आवेदन के बारे में विभाग ने जो जानकारी भेजी है, वह भी हैरान करने वाली है। विभाग ने अपने जवाब में कहा है कि जो लॉ अफसर लगाए गए हैं, उनमें से किसी का भी आवेदन विभाग को प्राप्त नहीं हुआ। लॉ अफसर लगने के लिए किसी भी वकील ने कोई आवेदन नहीं दिया।

हाईकोर्ट में अपील करेगा आवेदनकर्ता

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प्रदीप रापड़िया ने आरोप लगाया है कि सरकार तक पहुंच रखने वालों के चहेतों को लॉ अफसर लगाया गया है। रापड़िया के मुताबिक, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमानुसार हाईकोर्ट में प्रेक्टिस शुरू करने से पहले किसी वकील के पास जिला अदालत में दो साल की प्रेक्टिस का अनुभव अनिवार्य है।

दूसरी ओर यदि सरकार ने बगैर आवेदन ही एजी कार्यालय में लॉ अफसर लगा दिए, ऐसे में यह सुनिश्चित कर पाना मुश्किल है कि किस लॉ अफसर के पास कितना तजुर्बा है। रापड़िया ने वर्ष 2010 की कैग रिपोर्ट का हवाला भी दिया है।

रिपोर्ट में कैग ने महसूस किया था कि बगैर आवेदन लॉ अफसर लगाने के कारण सरकार को दो करोड़ 22 लाख रुपए का नुकसान हुआ। रापड़िया ने कहा है कि वह जल्द ही ला अफसरों की नियुक्ति को याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।

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