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हरियाणा विस चुनावः टिकट बंटवारे में बिरादरियों का समीकरण साधना चुनौती, पार्टियां कर रहीं मंथन

Thu, 26 Sep 2019 10:44 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 26 Sep 2019 10:44 AM IST
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Haryana Assembly Elections 2019, Ticket Distribution Big Challange for Political Parties
सीएम मनोहर लाल खट्टर - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इन दिनों सभी राजनीतिक दल टिकटों के बंटवारे में मशगूल हैं। सभी नब्बे विधानसभा सीटों पर किस प्रत्याशी को मैदान में उतारना है, इसे लेकर कई तरह के समीकरणों पर मंथन चल रहा है। इस प्रक्रिया में दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है जातीय समीकरणों को साधना।
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छत्तीस बिरादरियों के इस सूबे में दलों के लिए टिकट वितरण के दौरान सभी का ध्यान रखना बेहद जरूरी होगा, क्योंकि  बिरादरियों के प्रतिनिधि भी चुनाव में सभी दलों से मजबूत हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं। ऐसे में इन सभी बिरादरियों और समीकरणों के साथ तालमेल बिठाते हुए हर सीट पर प्रत्याशी का चयन दलों के लिए बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
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सभी दलों के दिग्गज नेता व चुनाव समितियां इसी मंथन में जुटी हुई हैं। प्रत्याशी चयन के लिए एक्सरसाइज अभी चल रही हैं। यह दल प्रत्याशियों की घोषणा विभिन्न चरणों में करेंगे। उधर, अधिकतर दलों ने यह भी विचार किया है कि प्रत्यशियों की घोषणा पितृ पक्ष यानी श्राद्ध खत्म होने के बाद और नवरात्र का शुभ मुहूर्त शुरू होने पर ही किए जाए।
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सूबे की सियासत में 9 बिरादरियों का बड़ा दखल

वैसे तो इस सूबे में कुल छत्तीस बिरादरियां मौजूद हैं। मगर इनमें से नौ बिरादरियां ऐसी हैं, जो हरियाणा की सियासत में अपना बड़ा दखल रखती हैं। यह नौ बिरादरियां हरियाणा की कुल जनसंख्या का करीब 96.7 प्रतिशत कवर करती हैं और इनके प्रतिनिधि हरियाणा की सियासत में पूरी तरह से सक्त्रिस्य रहते हैं।

इनमें जाट बिरादरी की करीब 27.8 प्रतिशत, अनुसूचित बिरादरी की 21 प्रतिशत, पंजाबी बिरादरी की 10.3 प्रतिशत, बनिया बिरादरी की 6.6 प्रतिशत, यादव व अहीर बिरादरी की 10 प्रतिशत, गुर्जर बिरादरी की 2.2 प्रतिशत, ब्राह्मण बिरादरी की 8.4 प्रतिशत व राजपूत बिरादरी की 3.1 प्रतिशत की आबादी शामिल है।

इसके अलावा 10.6 प्रतिशत में अन्य बिरादरियों के लोग शामिल हैं। जिसमें मुसलिम बिरादरी 7.03 प्रतिशत है और यह बिरादरी भी हरियाणा की एक विशेष बेल्ट में अपना राजनीतिक  दबदबा रखती है। ऐसी स्थिति में राजनीतिक पार्टियों के लिए टिकट वितरण के दौरान इन बिरादरियों को नजरअंदाज करना मुमकिन नहीं होगा।

भाजपा का हर सीट पर होमवर्क पूरा

इस बार देखा जाए तो भाजपा की टिकट पर चुनाव लडऩे के तलबगारों की संख्या सबसे ज्यादा है। चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदार जानते हैं कि अभी ‘मोदी मैजिक’ चल रहा है और इस पर सूबे में सीएम मनोहर लाल सरकार की उपलब्धियां भी उन्हें चुनाव जीताने में बड़ी मददगार साबित होंगी। इसलिए जीत का सपना संजोए इन दावेदारों ने अपनी ताल ठोकी है।

इन सभी नेताओं के दावेदारी पर प्रदेश भाजपा चुनाव समिति अपना होमवर्क लगभग पूरा कर चुकी है। कुछ सीटों को छोड़ दिया जाए, तो अधिकतर सीटों पर वहां के जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशियों का फाइनल पैनल भाजपा संसदीय बोर्ड को भेजा जा चुका है। संघ नेताओं से भी इन नामों पर चर्चा हो चुकी है। हालांकि भाजपा इस कोशिश में है कि टिकट वितरण में सभी बिरादरियां सध जाएं और सूबे में भाजपा सरकार की वापसी सुनिश्चित करें।

उधर, दूसरी ओर कई सीटों पर मौजूदा भाजपा विधायकों के खिलाफ विरोध के सुर भी हैं। स्थानीय नेताओं व कार्यकर्ताओं ने बाकायदा सीएम को पत्र लिखकर इन सीटों पर विधायक को हटाकर नया प्रत्याशी देने की मांग की है। इन विधायकों के टिकट काटने की मांग कार्यकर्ताओं की अनदेखी व लोगों अस्वीकार्यता पर अधारित है। ऐसी सीटों पर निर्णय लेना भाजपा के लिए थोड़ा मुश्किल बना हुआ है। मगर अटकलें यह लगाई जा रही हैं कि भाजपा इस बार कुछ मौजूदा विधायकों के टिकट जरूर काट सकती है।

कांग्रेस को बिरादरी के साथ गुटबाजी भी साधनी है

कांग्रेस के पास भी चुनाव लड़ने वाले नेताओं की कमी नहीं है। नब्बे सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए करीब बारह सौ फार्म कांग्रेस कार्यकर्ता व नेता प्रदेश कार्यालय से ले जा चुके हैं। इसमें से छह सौ से अधिक फार्म दावेदारी के साथ जमा भी हो चुके हैं। इस प्रक्रिया को मुक्कमल करने के लिए कांग्रेस की चुनाव समिति व स्क्रीनिंग कमेटी गठित हो चुकी है।

अब हर सीट पर प्रत्याशियों का चयन होना है। लेकिन इस प्रक्रिया  में कांग्रेस को दोहरी चुनौती झेलनी पड़ रही है। पहले तो कांग्रेस को भी हर सीट पर जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए टिकटों का बंटवारा करना है और दूसरा, बिरादरी के साथ-साथ कांग्रेस को पार्टी की गुटबाजी को भी साधना है। दरअसल, हरियाणा में कांग्रेस की सियासत कुछ दिग्गजों के धड़े में बंटी हुई है।

सभी दिग्गज सीटों के बंटवारे में अपना-अपना सम्मानजनक हिस्सा चाहते हैं और इसके लिए दिग्गज हाईकमान तक जबरदस्त लॉबिंग में भी जुटे हैं। वे चाहते हैं कि सम्मानजनक  हिस्सेदारी के साथ सीटों पर उनके चहेतों को भी टिकट मिले। अब देखना यह है कि कांग्रेस हाईकमान टिकट बंटवारे में बिरादरी समीकरणों के साथ-साथ इन दिग्गजों की गुटबाजी को कैसे साधता है।

जजपा-इनेलो भी छत्तीस बिरादरी, लोसुपा पिछड़ों के सहारे

पहली बार पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला का परिवार जुदा राहों के साथ यानी इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और जननायक जनता पार्टी ( जजपा) के बैनर तले विधानसभा चुनाव लड़ा रहा है। ये दोनों दल भी छत्तीस बिरादरियों के सहारे अपना दंभ भर रहे हैं। दोनों ही दलों के नेता खुद को इन बिरादरियों का रहनुमा मानते हैं, लिहाजा सीटों पर टिकट वितरण के दौरान यह दल भी जातीय समीकरण साधकर चलेंगे।

हालांकि अलग-अलग चुनाव लड़ने से दोनों दलों के समक्ष कुछ गंभीर चुनौतियां भी हैं, मगर दोनों दलों के नेता उत्साहित दिख रहे हैं। इसके अलावा भाजपा के बागी पूर्व सांसद राजकुमार सैनी की लोकतांत्रित सुरक्षा पार्टी (लोसुपा) भी खुद को पिछड़ों और अनुसूचित वर्ग का ज्यादा हिमायती मानती है, लिहाजा जाहिर है इस पार्टी की अधिकतर सीटें इसी वर्ग को जानी तय है।

आप, स्वराज इंडिया का दावा, ‘योग्य’ को ही मिलेगा टिकट

आम आदमी पार्टी (आप) और स्वराज इंडिया पार्टी ने जातिवाद की राजनीति को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि उनकी पार्टी  योग्य, ईमानदार और कर्मठ प्रत्याशी को ही टिकट देगी, भले ही वे किसी भी जाति के हों। आप इसके लिए थ्री ‘सी’ फैक्टर (क्त्रिस्मीनल, करेक्टर, करप्ट) को आधार बनाकर प्रत्याशी तय करने में जुटी है और योगेंद्र यादव की स्वराज इंडिया ने बाकायदा परख कमेटी तैयार की है, जो दावेदारों का इंटरव्यू लेकर उन्हें प्रत्याशी के लिए योग्य करार दे रही है।

‘छत्तीस बिरादरी महागठबंधन’ भी तैयार
पूर्व आईपीएस रणबीर शर्मा की राष्ट्रीय लोकस्वराज पार्टी (आरएलपी) ने कई छोटे पंजीकृत दलों को लेकर ‘छत्तीस बिरादरी महागठबंधन’ तैयार किया है। इस महागठबंधन ने भी सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा करते हुए कहा है कि सीटों का बंटवारे में सभी बिरादरियों के प्रत्याशियों को टिकट दी जाएगी। ताकि हरियाणा की राजनीति में उन्हें भी प्रतिनिधित्व करने का मौका मिल सके।
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