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हरियाणा विस चुनावः बड़ा वोट बैंक हैं कर्मचारी, घोषणा पत्र देखने के बाद लेंगे समर्थन देने पर फैसला

Fri, 11 Oct 2019 10:12 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 11 Oct 2019 10:12 AM IST
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Haryana Assembly Elections 2019, Political Parties Effort for Support of Government Employees
सरकारी कर्मचारी वर्ग - फोटो : फाइल फोटो
एक बड़ा वोट बैंक समझे जाने वाला कर्मचारी वर्ग सभी राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र देखने के बाद ही समर्थन देने पर कोई फैसला लेंगे। कर्मचारी वर्ग का भरोसा कैसे जीता जाए, उनकी मांगों के समर्थन में क्या वादे किए जाएं, इसे लेकर दलों ने अपना होमवर्क पूरा कर लिया है। अगले कुछ ही दिनों में सियासी दलों के घोषणा पत्र भी सामने आ जाएंगे।
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इन घोषणा पत्रों में सभी दलों ने कर्मचारियों की मांगों को लेकर कई मुद्दे शामिल किए हैं। ये वादे घोषणा पत्र जारी करते हुए दलों की ओर से किए जाएंगे। उधर, तमाम कर्मचारी संगठनों ने भी चुनाव में अपने समर्थन के संबंध में क्या निर्णय लेना है, इसे लेकर विभिन्न संगठन भी अगले हफ्ते बैठक करेंगे। अपने समर्थन को गोपनीय रखते हुए ये कर्मचारी विभिन्न दलों को अपना मत देंगे।
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अब यह कर्मचारी वर्ग चुनाव में किस बहाव बहेगा, सभी राजनीतिक पार्टियों को बेसब्री से इसका इंतजार है। हरियाणा में कच्चे और पक्के करीबन 5 लाख कर्मचारी है और इनके परिजन व अन्य संबंधी भी सियासी दलों के लिए एक बड़ा वोट बैंक है।
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दलों ने साधा कर्मचारी संगठनों से संपर्क

हरियाणा के सभी दलों ने अपना घोषणापत्र तैयार करने से पहले विभिन्न कर्मचारियों संगठनों से संपर्क साधा है। नेताओं ने कर्मचारियों से पूछा है कि उनकी बड़ी मांगें क्या है, जिन्हें वे अपने घोषणा पत्रों में शामिल कर सकते हैं। घोषणा पत्र तैयार करने का होमवर्क करते हुए दलों के नेताओं ने इन कर्मचारियों को आश्वस्त किया है कि आज तो उनकी मांगों को घोषणा पत्र में शामिल कर उनसे वादा किया जा रहा है।

लेकिन उनके समर्थन से यदि उनकी सरकार प्रदेश में बनती है, तो उनकी इन मांगों को पूरा भी जरूर किया जाएगा। कर्मचारियों ने भी सभी दलों की घोषणा पत्र तैयार करने वाली कमेटियों के प्रतिनिधियों को अपनी प्रमुख मांगों से अवगत करवा दिया है, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि पार्टियों के घोषणा पत्र सार्वजनिक होने के बाद ही संगठन स्तर पर यह तय किया जाएगा कि कर्मचारियों का झुकाव किस ओर रहेगा।

चुनाव से पहले तक गरम रहा आंदोलन का माहौल

हरियाणा में अपनी जायज मांगों को लेकर कर्मचारी संगठन वैसे तो काफी समय से सक्रिय हैं और आंदोलन का माहौल  भी प्रदेश में बना रहा। मगर पिछले करीब दो सालों से कर्मचारियों के आंदोलनों ने न केवल तेजी पकड़ी, बल्कि चुनाव से ठीक पहले तक भी ये माहौल पूरी तरह से गरमाया रहा। लगभग 23 साल बाद प्रदेश में कर्मचारियों पर एंसेशियल सर्विस मेंटेनेंस एक्ट (एस्मा) लागू किया गया। काफी संख्या में कर्मचारियों पर केस दर्ज हुए, हड़ताल अवधि का वेतन काटा गया, कर्मचारियों के आंदोलनों पर कई वॉटर कैनन का इस्तेमाल हुआ, लाठीचार्ज हुआ, लेकिन कर्मचारी अंत तक अपनी जायज मांगों पर अड़े रहे।

एक अध्यक्ष तो चुनाव में ही कूद गए
हरियाणा में फिजियोथेरेपिस्ट की समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रहे हरियाणा चार्टड एसोसिएशन ऑफ  फिजियोथेरेपिस्ट के प्रदेशाध्यक्ष डा. आरके मोदगिल तो चुनावी रण में ही उतर गए हैं। यूनिवर्सिटी से एनओसी लेने के बाद उन्होंने रोहतक सीट से परचा भरा है। डा. मोदगिल का कहना है कि प्रदेश में 24 फिजियोथेरेपिस्ट कालेज हैं और 10 हजार फिजियोथेरेपिस्ट। लेकिन आज तक प्रदेश में फिजियोथेरेपिस्ट काउंसिल ही नहीं है। इतना ही नहीं 2007 से लेकर आज तक प्रदेश में फिजियोथेरेपिस्ट की भर्तियां तक नहीं निकली हैं। जबकि सरकारी अस्पतालों में इनका भारी टोटा है।

घोषणा पत्र के लिए कर्मचारियों से जुटाई गई हैं ये मांगें

हर हाल में चाहिए पुरानी पेंशन बहाली
प्रदेश में करीब डेढ़ लाख कर्मचारी ऐसे हैं, जो नई पेंशन स्कीम के दायरे में हैं, कुल मिलाकर इस पेंशन स्कीम से कर्मचारियों को काफी नुकसान है। इसलिए पुरानी पेंशन बहाली को लेकर काफी समय से संघर्ष जारी है। कर्मचारी तब तक संतुष्ट नहीं होंगे, जब तक पुरानी पेंशन बहाली नहीं होती।
- विजेंद्र धारीवाल, प्रदेशाध्यक्ष, पेंशन बहाली संघर्ष समिति हरियाणा-

रोडवेज विभाग का निजीकरण नहीं चाहते कर्मी
वैसे तो सरकार कोई भी हो, रोडवेज कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। कई बार सरकार और रोडवेज कर्मियों का टकराव हुआ। हम चाहते हैं कि रोडवेज कर्मियों की तमाम जायज मांगों को पूरा किया जाए और विभाग के सभी रिक्त पदों पर पक्की भर्तियां की जाएं। इसके अलावा रोडवेज विभाग का निजीकरण को लेकर भी कोशिशें होती हैं मगर कर्मचारी ऐसा कतई ही नहीं चाहते।
- वीरेंद्र धनखड़, प्रदेश महासचिव, रोडवेज कर्मचारी यूनियन हरियाणा-

कर्मचारियों की तमाम वेतन विसंगति खत्म हो
हैरत की बात यह है कि आज भी हरियाणा के विभिन्न विभागों के कर्मचारी अपनी वेतन विसंगतियों को लेकर संघर्षरत हैं। सरकार जिसकी भी हो यह मुद्दा ज्वलंत रहता है। हर चुनाव में राजनीतिक दल अपने घोषणा पत्र में इस मांग को प्रमुखता से शामिल भी करती है। इस बार भी ऐसा ही होगा मगर आजतक कर्मचारियों को राहत क्यों नहीं मिली ?
- कुलदीप शर्मा, प्रदेश उप महासचिव, हरियाणा कर्मचारी महासंघ

जायज मांगों को तो सुने सरकार

कई बार कर्मचारियों की ऐसी जायज मांगें होती है, जिन्हें पूरी किया जाना चाहिए। लेकिन अपनी इन मांगों को सरकार तक पहुंचाने और समझाने में ही कर्मचारी परेशानी हो जाते हैं। इन मांगों पर यदि सरकार गंभीरता से विचार करे, तो न केवल इसका समाधान जल्द हो सकता है, बल्कि कर्मचारी भी संतुष्ट होकर अपना काम करेगा।  
- विनोद दलाल, प्रदेशाध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ गवर्नमेंट फार्मासिस्ट हरियाणा-

नौकरियों में ठेका प्रथा पूरी तरह से बंद हो
शिक्षा हो या कोई भी विभाग ठेके पर कर्मचारी रखने की प्रथा पूरी तरह से खत्म होनी चाहिए। शिक्षा विभाग खासकर स्कूलों में इस प्रथा से बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है। स्कूलों में आज शिक्षकों के हजारों पद खाली पड़े हैं, छात्रों की पढ़ाई का हर्जाना हो रहा है। लेकिन आज तक गंभीरता से इसकी सुध नहीं ली गई, यह बड़ी विडंबना की बात है। दूसरा, जन शिक्षा का विस्तार भी सरकारों की बड़ी जिम्मेवारी होनी चाहिए।
- अशोक सैनी, सचिव, हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ

विभागों के रिक्त पदों को भरा जाए
प्रदेश के सभी सरकारी विभागों में आज काफी संख्या में सरकारी पद रिक्त पड़े हैं। एक तरह से ये उन योग्य युवाओं के साथ दगा है, जो रोजगार के इंतजार में खाली बैठे हैं। वैसे मौजूदा सरकार ने काफी संख्या में सरकारी पदों पर भर्ती करने की कोशिश की है, लेकिन विभाग में किसी भी कर्मचारी का पद रिक्त नहीं होना चाहिए।
- संदीप कुंडू, प्रदेश प्रवक्ता, मल्टी पर्पस हेल्थ वर्क्स यूनियन हरियाणा

कर्मचारियों को चाहिए पंजाब समान वेतनमान

हरियाणा के कर्मचारी पंजाब समान वेतनमान की मांग को लेकर भी लंबे समय से संघर्षरत है। मौजूदा सरकार ने भी इस मांग को अपने वर्ष 2014 के घोषणा पत्र में शामिल किया था। लेकिन फिर भी यह मांग आज भी अधूरी है। कर्मचारियों को वादाखिलाफी वाला घोषणापत्र नहीं चाहिए।
- सतीश सेठी, महासचिव, सर्व कर्मचारी संघ

पूरी तरह लागू हो समान काम-समान वेतन
सभी विभागों में समान काम-समान वेतन का नियम लागू होना चाहिए। यह कर्मचारियों के हित में है। सरकार ने इस बार कुछ विभागों में इसका प्रयास भी किया, लेकिन ये पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। चालीस हजार से अधिक र्क्लक विभागों में हैं, जिन्हें इसका लाभ मिलना चाहिए।
- महेंद्र प्रताप गुलिया, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन

सरकारी स्कूलों का बनाया जाए स्मार्ट
हरियाणा के सरकारी स्कूलों को आज स्मार्ट  बनाए जाने की जरूरत है। स्कूल आज भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं। शिक्षकों की भारी कमी है। शिक्षकों से जुड़ी समस्याओं पर भी गौर करने की जरूरत है। उन्हें कैशलेस मेडिकल सुविधा का लाभ मिलना चाहिए। आज भी क्लेम की फाइलें सालों से विभाग के पास पेंडिंग पड़ी हैं।
- तरविंद्र शर्मा, नेता, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ-

सभी विभागों में बने ट्रांसफर पॉलिसी

आज कई विभाग ऐसे हैं, जहां कर्मचारियों की ट्रांसफर पॉलिसी नहीं है। इससे आज भी कर्मचारी काफी परेशानियां झेलता है। विभाग में कई पद ऐसे हैं, जो कई सालों से रेगुलर नहीं है। विभागों में ये पद आज भी व्यक्तिगत हैं, यानी जिस दिन पद पर सेवारत व्यक्ति रिटायर होगा, विभाग से संबंधित पद ही खत्म हो जाएगा। सभी पद रेगुलर होने चाहिए।
- संदल सिंह राणा, प्रदेश प्रवक्ता, हरियाणा गवर्नमेंट पीडब्ल्यूडी मैकेनिकल वर्क्स यूनियन-

सरकारी बसों की संख्या बढ़े, निजी परमिट रद्द हो
हरियाणा में आज सरकारी बसों की भारी कमी है। बहुत से ग्रामीण रूटों पर तो बसें ही नहीं है। सरकार रोडवेज का निजीकरण करना चाहती है। बेड़े में सरकारी बसों की संख्या बढ़नी चाहिए और निजी परमिट रद्द होनी चाहिए।
- प्रदीप बूरा, प्रदेश प्रवक्ता, हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन इंटक-

कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए
प्रदेश में सभी विभागों में सभी कच्चे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पक्का किया जाए। बहुत से कर्मचारी ऐसे हैं, जो कई बरसों से विभाग में कार्यरत हैं और आज भी कच्चे हैं। सरकारों को इनकों को राहत देते हुए इन्हें पक्का करना चाहिए।
- तारादत्त, अध्यक्ष, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी यूनियन, लोक निर्माण हरियाणा

 
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