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हरियाणा विस चुनाव: रिपोर्ट कार्ड- जब आतंकवाद की जड़ें जमाने को विधायक का सीना किया छलनी

Fri, 20 Sep 2019 01:02 PM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 20 Sep 2019 01:02 PM IST
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haryana assembly elections 2019, Formar MLA Shiv Prasad Report Card
पूर्व विधायक शिव प्रसाद - फोटो : अमर उजाला
उन दिनों पंजाब में आतंकवाद चरम पर था। आतंकी अब अपनी जड़ें हरियाणा के इलाकों में फैलाना चाहते थे। इसके लिए आतंकी हरियाणा में कुछ ऐसा कांड करना चाहते थे, जिसका परिणाम न केवल खौफनाक हो, बल्कि आतंक का संदेश पूरे सूबे में फैल जाए। इसके लिए आतंकियों ने हरियाणा के एक कद्दावर और सीनियर विधायक मास्टर शिव प्रसाद की हत्या की प्लानिंग बनाई। मास्टर जी उन दिनों अंबाला सिटी विधानसभा से लगातार तीसरी बार के विधायक थे।
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नववर्ष का दिन था, 1 जनवरी 1988 को आदतन विधायक मास्टर शिव प्रसाद मीराबाई चौक के सामने स्थित अपनी छोटी सी मिठाई और चाय की दुकान पर सुबह सात बजे पहुंचे। कड़ाके की सर्दी थी। मास्टर जी ने दुकान की दिनचर्या शुरू की। तभी तीन नौजवान लोई (अत्यधिक गर्म शॉल) ओढ़े उनकी दुकान पर पहुंचे और मास्टर जी से कहने लगे कि वे उनकी विधानसभा क्षेत्र के ही बाशिंदें हैं और एक  सरकारी सुविधा संबंधी फार्म पर उनके हस्ताक्षर करवाने आए हैं।
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मास्टर जी ने युवकों को फार्म दिखाने को कहा, तभी एक युवक आगे बढ़ा और उसने अपनी लोई हटाकर पिस्तौल निकाली और मास्टर जी पर दनादन गोलियां दाग दी। दो गोली मास्टर जी के शरीर से आरपार हो गई, जबकि तीन गोलियां मास्टर जी के पेट, जांघ और दिल के पास जाकर लगी।
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गोलियों से घायल विधायक रिक्शे पर बैठ पहुंचे अस्पताल

इस घटना के बाद इलाके मे दहशत का माहौल बन था, आतंकी भी वहां से पिस्तौल लहराते हुए फरार हो गए, गोलियों से घायल विधायक खुद दुकान से बाहर निकले और वहीं खड़े रिक्शा पर बैठकर चालक को सिविल अस्पताल चलने को कहा। मास्टर जी जैसे ही अस्पताल पहुंचे, तो वहां डाक्टर एसके गुप्ता ने तुरंत फर्स्ट एड देकर उन्हे पीजीआई चंडीगढ़ के लिए रेफर किया गया।

दिल के पास लगी गोली दिखाई नहीं दे रही थे। मगर विशेषज्ञ चिकित्सकों ने गंभीर ऑपरेशन के बाद गोली को ढूंढकर निकाला और विधायक की जान बचाई। उधर, मास्टर जी के हलके में भी शहरवासियों ने उनके लिए खूब दुआएं की। जिसकी बदौलत वह मौत के मुंह से बचकर बाहर आ गए।

जेब से एक रुपया खर्चे बिना जीते तीन चुनाव
एक प्राइवेट स्कूल में मामूली वेतन पर नौकरी करने वाले मास्टर शिव प्रसाद के पास अचानक भाजपा नेता डा. मंगल सैन का संदेश पहुंचता है कि उन्हें अब भाजपा की टिकट पर चुनाव लडऩा है, लिहाजा तैयार रहें। पुत्र अनिल प्रसाद के अनुसार उस वक्त माली हालत ऐसे नहीं थे कि चुनावी खर्च उठाया जाए, मगर शहरवासियों ने उनके पिता पर इतना दबाव बनाया कि उन्हें नामांकन दाखिल करना पड़ा।

उसके बाद मास्टर जी लगातार तीन बार विधायक बने और इस दौरान सारा खर्च शहरवासियों व उनके समर्थकों ने ही चंदा जुटाकर किया। इतना ही नहीं मतदान केंद्र के बाहर लंबी लाइन में लगे मतदाताओं को मास्टर जी खुद बाल्टी में पानी लेकर उन्हे पिलाते थे और साथ ही मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए उनका आभात जताते थे।

बेटा आज भी चाय बेचकर कर रहा गुजर-बसर

हरियाणा के ईमानदार और कर्मठ विधायकों की फेहरिस्त में शुमार मास्टर जी पहले भी अपने पिता लाला तुलाराम जी की छोटी सी मिठाई और चाय की दुकान चलाते थे और विधायक बनने के बाद भी इसी काम में जुटे रहे। उन्होंने कभी अपने पद और पॉवर का दुरुपयोग नहीं किया।

परिजनों को भी ईमानदारी और मेहनत मास्टर जी से संस्कार में मिले। नतीजतन तीन बार के विधायक मास्टर शिव प्रसाद के बेटे अनिल प्रसाद आज भी उसी छोटी सी दुकान पर मिठाई और चाय बेचकर परिवार चलाते हैं। विधायक के पोते जतिन भी पिता अनिल प्रसाद के साथ दुकान पर बराबर हाथ बंटाते हुए जिंदगी चला रहे हैं।

यह थे विधायक मास्टर शिव प्रसाद
मास्टर शिव प्रसाद का जन्म 7 जुलाई 1925 में अंबाला सिटी में हुआ और निधन 27 फरवरी 2007 में हुआ। आजादी से पहले ही मास्टर जी आरएसएस से जुड़े थे। तीन साल यूपी के खुर्जा में बतौर संघ प्रचारक रहे। उसके बाद संघ में अलग-अलग जिम्मेदारियां मिलती रही। 1957 में संघ के आदेश पर नगर पालिका चुनाव लड़ा।

वर्ष 1957, 1962 व 1967 में लगातार नगर पार्षद बने। हिंदी सत्याग्रह समेत अन्य कई आंदोलनों में भाग लिया और जेल भी गए। इमरजेंसी में साढ़े 19 महीने की जेल हुई। सन 1977, 1982 व 1987 में लगातार विधायक बने। उसके बाद फिर संघ की जिम्मेदारी संभालने लगे। बेटे अनिल प्रसाद आज भाजपा मंडल उपाध्यक्ष व जिला कष्ट निवारण समिति के सदस्य हैं और इस बार उन्होंने अंबाला शहर सीट से भाजपा की टिकट की मांग की है।
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