{"_id":"5d8af9ca8ebc3e013b28549b","slug":"haryana-assembly-elections-2019-bjp-president-will-decide-alliance-with-akali-dal","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरियाणा विस चुनावः शिअद से गठजोड़ पर हाईकमान के फैसले का इंतजार, जारी है अटकलों का दौर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाणा विस चुनावः शिअद से गठजोड़ पर हाईकमान के फैसले का इंतजार, जारी है अटकलों का दौर
Wed, 25 Sep 2019 10:53 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 25 Sep 2019 10:53 AM IST
विज्ञापन
अकाली दल
- फोटो : facebook
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा के विधानसभा चुनाव में शिरोमणी अकाली दल (शिअद) भाजपा का साथी बनेगा या नहीं, साथ रहेगा तो कितनी सीटें शिअद को मिलेंगी, इस पर अभी तक अटकलों का दौर जारी है। चुनावी बिगुल बजा चुका है, लेकिन इस पर अभी तक फैसला नहीं हुआ है। प्रदेश भाजपा ने भी यह मसला अब हाईकमान पर ही छोड़ा है। अभी तक हरियाणा की राजनीति में शिअद इनेलो का ही साथी रहा है। मगर इसी साल हुए लोकसभा चुनाव से पहले इनेलो ने एसवाईएल के मुद्दे पर शिअद से अपने राजनीतिक रिश्ते खत्म कर लिए थे।
मगर चौटाला और बादल कुनबे में पारिवारिक रिश्ते आज भी कायम हैं। उधर, शिअद की हरियाणा इकाई ने भी इनेलो में हुए विघटन के बाद टूटे सियासी रिश्तों को जोड़ने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। देखा जाए तो वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में इनेलो ने शिअद की ही मदद से सिरसा लोकसभा सीट पर जीत हासिल की थी। जबकि कालांवली विधानसभा सीट शिअद ने इनेलो की मदद से जीती थी। लेकिन आज के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में हालात अलग हैं। चूंकि पंजाब में शिअद का गठबंधन भाजपा से है, तो यही गठबंधन शिअद अब हरियाणा में भी चाहता है।
हालांकि भाजपा हाईकमान को इससे कोई परहेज नहीं है, मगर प्रदेश भाजपा को लगता है कि सूबे में वे आज बिना किसी गठबंधन के अपने दम पर चुनाव लड़ने में पूरी तरह सक्षम है। लेकिन फिर भी इस पर फैसला भाजपा हाईकमान को करना है। भाजपा नेता व सीएम हरियाणा मनोहर लाल का कहना है कि शिअद को लेकर हर फैसला भाजपा का संसदीय बोर्ड करेगा। प्रदेश भाजपा से यदि कोई सलाह या राय मांगी जाएगी, तो हम देंगे, मगर अंतिम फैसला राष्ट्रीय नेतृत्व को ही करना है।
विज्ञापन
प्रत्याशियों के नाम घोषित करने पर सीएम ने कहा कि भाजपा प्रत्याशियों की पहली सूची 29 सितंबर से पहले नहीं आएगी और 4 अक्टूबर 3 बजे के बाद कोई सूची नहीं आएगी।
विज्ञापन
मगर चौटाला और बादल कुनबे में पारिवारिक रिश्ते आज भी कायम हैं। उधर, शिअद की हरियाणा इकाई ने भी इनेलो में हुए विघटन के बाद टूटे सियासी रिश्तों को जोड़ने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। देखा जाए तो वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में इनेलो ने शिअद की ही मदद से सिरसा लोकसभा सीट पर जीत हासिल की थी। जबकि कालांवली विधानसभा सीट शिअद ने इनेलो की मदद से जीती थी। लेकिन आज के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में हालात अलग हैं। चूंकि पंजाब में शिअद का गठबंधन भाजपा से है, तो यही गठबंधन शिअद अब हरियाणा में भी चाहता है।
विज्ञापन
हालांकि भाजपा हाईकमान को इससे कोई परहेज नहीं है, मगर प्रदेश भाजपा को लगता है कि सूबे में वे आज बिना किसी गठबंधन के अपने दम पर चुनाव लड़ने में पूरी तरह सक्षम है। लेकिन फिर भी इस पर फैसला भाजपा हाईकमान को करना है। भाजपा नेता व सीएम हरियाणा मनोहर लाल का कहना है कि शिअद को लेकर हर फैसला भाजपा का संसदीय बोर्ड करेगा। प्रदेश भाजपा से यदि कोई सलाह या राय मांगी जाएगी, तो हम देंगे, मगर अंतिम फैसला राष्ट्रीय नेतृत्व को ही करना है।
विज्ञापन
प्रत्याशियों के नाम घोषित करने पर सीएम ने कहा कि भाजपा प्रत्याशियों की पहली सूची 29 सितंबर से पहले नहीं आएगी और 4 अक्टूबर 3 बजे के बाद कोई सूची नहीं आएगी।