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Haryana: भाजपा ओबीसी-अगड़ों तो कांग्रेस जाट-मुस्लिम वोटों के सहारे... दलित निर्णायक; सीएम समेत इनको कड़ी टक्कर
Sat, 05 Oct 2024 08:03 AM IST
शाहरुख खान
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 05 Oct 2024 08:03 AM IST
सार
हरियाणा में भाजपा ने ओबीसी और अगड़ों को साधा है। कांग्रेस ने जाट, मुस्लिम और सिखों को साधा है। दलित वोटर निर्णायक भूमिका निभाएंगे। भाजपा को तीसरी बार सत्ता में लौटने और कांग्रस को दस साल बाद चौधर पाने की आस है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आखिर वह घड़ी आ गई है, जिसका राजनीतिक दल व मतदाता कई महीनों से इंतजार कर रहे थे। मतदान का मुहूर्त पांच अक्तूबर शनिवार सुबह छह से शाम सात बजे का है। भाजपा ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में और दस साल से विपक्ष में बैठी कांग्रेस ने सत्ता में लौटने के लिए पूरी ताकत लगा दी है।
हरियाणा के चुनाव में जाति के साथ तीसरे दल के समीकरण की अहम भूमिका रही है। जो भी इन समीकरणों को साधने में कामयाब होगा, वही सरकार बनाने की ओर अग्रसर होगा।
लिहाजा भाजपा और कांग्रेस ने अपने अनुकूल जातियों के समीकरणों को साधने की कोशिश की है। भाजपा ने ओबीसी व सामान्य वर्ग और कांग्रेस ने जाट, मुस्लिम, सिखों को लामबंद कर सत्ता हासिल करने की रणनीति तैयार की है। वहीं, दलित वर्ग को दोनों ही दलों ने लुभाने की कोशिश की।
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ये वर्ग ही इस बार निर्णायक साबित होने वाला है। जिस तरफ भी दलितों का झुकाव हुआ, उस राजनीतिक दल का पलड़ा भारी हो सकता है। फिलहाल दलितों के एक वर्ग हरिजन का कांग्रेस की ओर और धानक व वाल्मीकि का भाजपा की ओर झुकाव देखा जा रहा है।
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हरियाणा के चुनाव में जाति के साथ तीसरे दल के समीकरण की अहम भूमिका रही है। जो भी इन समीकरणों को साधने में कामयाब होगा, वही सरकार बनाने की ओर अग्रसर होगा।
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लिहाजा भाजपा और कांग्रेस ने अपने अनुकूल जातियों के समीकरणों को साधने की कोशिश की है। भाजपा ने ओबीसी व सामान्य वर्ग और कांग्रेस ने जाट, मुस्लिम, सिखों को लामबंद कर सत्ता हासिल करने की रणनीति तैयार की है। वहीं, दलित वर्ग को दोनों ही दलों ने लुभाने की कोशिश की।
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ये वर्ग ही इस बार निर्णायक साबित होने वाला है। जिस तरफ भी दलितों का झुकाव हुआ, उस राजनीतिक दल का पलड़ा भारी हो सकता है। फिलहाल दलितों के एक वर्ग हरिजन का कांग्रेस की ओर और धानक व वाल्मीकि का भाजपा की ओर झुकाव देखा जा रहा है।
हरियाणा में 21 फीसदी दलित हैं। सूबे की 17 विधानसभा सीटें दलितों के लिए आरक्षित हैं और राज्य की 20 से 25 सीटों पर दलित वोट बैंक प्रभाव रखता है। हरियाणा की कुल आबादी में से 40 फीसदी पिछड़ों की हैं। इनमें 78 जातियां शामिल हैं। भाजपा की राजनीति का मुख्य आधार ओबीसी रहा है।
करीब छह महीने पहले भाजपा ने अपने सीएम मनोहर लाल को बदल कर पिछड़ी जाति के नायब सिंह सैनी को सीएम बनाया। भाजपा ने सबसे ज्यादा 22 ओबीसी समुदाय के नेताओं को उम्मीदवार बनाया। राज्य की करीब 18 से 20 सीटों पर ओबीसी समुदाय प्रभाव रखता है।
राज्य की सबसे ज्यादा 35 से 40 सीटों पर जाटों का प्रभाव है। यदि वह लामबंद होकर किसी भी पार्टी के पक्ष में वोट डालते हैं तो उसकी सरकार बनना तय है। कांग्रेस जाटों के ही सहारे है और इस बार कांग्रेस खासकर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जाटों वोटों को एकजुट करके रखा है।
भाजपा के दस सीटों और कांग्रेस के 11 सीटों पर बागी बिगाड़ रहे खेल
इस बार बागी भाजपा-कांग्रेस के लिए सिरदर्द बनकर उभरे हैं। भाजपा के दस सीटों पर बड़े बागी हैं, जो पार्टी का खेल बिगाड़ने में लगे हैं। इनमें महम, रानियां, गन्नौर,असंध, पृथला, गुड़गांव, रेवाड़ी, सोहाना, सफीदो, हिसार की सीट शामिल हैं। वहीं, 11 सीटों पर बागियों ने कांग्रेस को मुश्किल में डाल दिया है। इसमें गोहाना, कोसली, बाढड़ा, पुंडरी, तिगांव, पानीपत शहर, पानीपत ग्रामीण, कलायत, अंबाला कैंट, बरौदा व बहादुरगढ़ की सीटें शामिल हैं।
इस बार बागी भाजपा-कांग्रेस के लिए सिरदर्द बनकर उभरे हैं। भाजपा के दस सीटों पर बड़े बागी हैं, जो पार्टी का खेल बिगाड़ने में लगे हैं। इनमें महम, रानियां, गन्नौर,असंध, पृथला, गुड़गांव, रेवाड़ी, सोहाना, सफीदो, हिसार की सीट शामिल हैं। वहीं, 11 सीटों पर बागियों ने कांग्रेस को मुश्किल में डाल दिया है। इसमें गोहाना, कोसली, बाढड़ा, पुंडरी, तिगांव, पानीपत शहर, पानीपत ग्रामीण, कलायत, अंबाला कैंट, बरौदा व बहादुरगढ़ की सीटें शामिल हैं।
सीएम समेत सात मंत्रियों को कड़ी टक्कर
भाजपा के सीएम नायब सिंह सैनी और राज्य के छह मंत्रियों को कड़ी टक्कर मिल रही है। कुरुक्षेत्र की लाडवा सीट नायब सिंह सैनी, अंबाला सिटी से असीम गोयम, हिसार से कमल गुप्ता, लोहारू से जेपी दलाल, नांगल चौधरी से अभे सिंह यादव, नूंह से संजय सिंह और जगाधरी से कंवर पाल गुज्जर मैदान में हैं। इन सभी मंत्रियों को उनके प्रतिद्वंद्वी कांटे की टक्कर दे रहे हैं। वहीं, महिपाल ढांडा व मूलचंद शर्मा की स्थिति फिलहाल ठीक चल रही है।
भाजपा के सीएम नायब सिंह सैनी और राज्य के छह मंत्रियों को कड़ी टक्कर मिल रही है। कुरुक्षेत्र की लाडवा सीट नायब सिंह सैनी, अंबाला सिटी से असीम गोयम, हिसार से कमल गुप्ता, लोहारू से जेपी दलाल, नांगल चौधरी से अभे सिंह यादव, नूंह से संजय सिंह और जगाधरी से कंवर पाल गुज्जर मैदान में हैं। इन सभी मंत्रियों को उनके प्रतिद्वंद्वी कांटे की टक्कर दे रहे हैं। वहीं, महिपाल ढांडा व मूलचंद शर्मा की स्थिति फिलहाल ठीक चल रही है।
कांग्रेस ने मुकाबले को आमने-सामने रखा, तीसरे की नहीं होने दी एंट्री
इस बार कांग्रेस ने मुकाबले को त्रिकोणीय के बजाय आमने-सामने रखा है। दरअसल चुनावी मैदान में तीसरी पार्टी के आते ही कांग्रेस का जाट वोट बंट जाता है और इस वजह से कांग्रेस दो बार से सत्ता में आने से चूकी भी है। 2014 में जब भाजपा ने बहुमत हासिल किया था, तो उस दौरान इनेलो को 19 सीटें आईं और इस वजह से कांग्रेस तीसरी बार सत्ता बनाने में चूक गई। कांग्रेस के पास सिर्फ 15 सीटें आईं। वहीं, 2019 में जजपा ने दस सीटें जीतकर कांग्रेस को फिर से सत्ता में आने में रोका। इसलिए इस बार कांग्रेस ने इस चुनाव को सीधे मुकाबले में रखा, ताकि इनेलो, जजपा की वजह से जाट वोटों का बंटवारा न हो सके।
इस बार कांग्रेस ने मुकाबले को त्रिकोणीय के बजाय आमने-सामने रखा है। दरअसल चुनावी मैदान में तीसरी पार्टी के आते ही कांग्रेस का जाट वोट बंट जाता है और इस वजह से कांग्रेस दो बार से सत्ता में आने से चूकी भी है। 2014 में जब भाजपा ने बहुमत हासिल किया था, तो उस दौरान इनेलो को 19 सीटें आईं और इस वजह से कांग्रेस तीसरी बार सत्ता बनाने में चूक गई। कांग्रेस के पास सिर्फ 15 सीटें आईं। वहीं, 2019 में जजपा ने दस सीटें जीतकर कांग्रेस को फिर से सत्ता में आने में रोका। इसलिए इस बार कांग्रेस ने इस चुनाव को सीधे मुकाबले में रखा, ताकि इनेलो, जजपा की वजह से जाट वोटों का बंटवारा न हो सके।
इनकी प्रतिष्ठा दांव पर
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी : सैनी को भाजपा ने सीएम का चेहरा घोषित किया हुआ है। पार्टी ने छह महीने पहले ही उन्हें सीएम की कुर्सी पर बैठाया था। पूरा चुनाव उनके ही चेहरे पर लड़ा गया है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी : सैनी को भाजपा ने सीएम का चेहरा घोषित किया हुआ है। पार्टी ने छह महीने पहले ही उन्हें सीएम की कुर्सी पर बैठाया था। पूरा चुनाव उनके ही चेहरे पर लड़ा गया है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा: कांग्रेस ने किसी को भी सीएम का चेहरा घोषित नहीं किया है, लेकिन पूरा चुनाव पूर्व सीएम हुड्डा की अगुवाई में ही लड़ा गया है। हुड्डा के 72 समर्थकों को विधानसभा के टिकट मिले हैं।
अरविंद केजरीवाल : आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के लिए हरियाणा का यह चुनाव काफी अहम है। आगे दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने हैं। केजरीवाल हरियाणा में पार्टी का खाता खोलने की जद्दोजहद कर रहे हैं। देखना यह है कि हरियाणा में झाड़ू चलता है या नहीं।
दुष्यंत चौटाला : पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के लिए यह चुनाव अपने वर्चस्व को बचाने का है। अधिकतर विधायक और संगठन के पदाधिकारियों के जाने के बाद अब दुष्यंत पर पार्टी को बचाने की बड़ी जिम्मेदारी है।
अभय चौटाला : इनेलो के लिए यह चुनाव वजूद बचाने का है। इसलिए इनेलो ने इस बार बसपा के साथ गठबंधन किया। पिछले 20 साल से सत्ता से दूर इनेलो किसी भी सूरत में सत्ता में भागीदारी चाह रही है। अभय चौटाला की साख दांव पर है।
इन चेहरों पर रहेगी नजर
विनेश फोगाट : पेरिस ओलंपिक में पदक से चूकीं विनेश फोगाट जुलाना सीट से कांग्रेस की उम्मीदवार हैं। वह अपनी सीट पर मजबूत स्थिति में हैं। यदि जाट वोट बंटे और गैर जाट वोट एक तरफ गए तो उनकी राह मुश्किल हो सकती है।
विनेश फोगाट : पेरिस ओलंपिक में पदक से चूकीं विनेश फोगाट जुलाना सीट से कांग्रेस की उम्मीदवार हैं। वह अपनी सीट पर मजबूत स्थिति में हैं। यदि जाट वोट बंटे और गैर जाट वोट एक तरफ गए तो उनकी राह मुश्किल हो सकती है।
अनिल विज : राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल विज छह बार विधायक रह चुके हैं। वह अंबाला कैंट से भाजपा के उम्मीदवार हैं। यदि वह जीते तो उनकी सातवीं जीत होगी। फिलहाल इस बार के चुनाव में उन्हें टक्कर मिल रही है।
श्रुति चौधरी : पूर्व सीएम बंसीलाल की पोती व राज्य सभा सांसद किरण चौधरी की बेटी श्रुति चौधरी तोशाम सीट से भाजपा के उम्मीदवार हैं। वह कांग्रेस से पूर्व सांसद हैं। वह पहली बार भाजपा के टिकट से विधानसभा का चुनाव लड़ रही हैं।
आरती राव : केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत की बेटी आरती राव भाजपा के टिकट से अटेली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं। चुनाव में उनके साथ उनके पिता की भी प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। वह इस चुनाव के साथ राजनीति में डेब्यू करने जा रही हैं।
रघुबीर कादियान : हरियाणा चुनाव में सबसे वयोवद्ध उम्मीदवार 80 वर्षीय रघुबीर कादियान हैं। वह झज्जर की बेरी विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं। इस बार वह सातवीं बार चुनाव लड़ रहे हैं। उनका 24 साल से बेरी सीट पर कब्जा है।
सावित्री जिंदल : देश की सबसे अमीर महिला सावित्री जिंदल हिसार सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं। वह भाजपा से टिकट मांग रही थी, मगर भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया।
चित्रा सरवारा : कांग्रेस की बागी चित्रा सरवारा अंबाला कैंट से निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं। वह अपना चुनाव काफी मजबूती से लड़ रही हैं। वह भाजपा के अनिल विज को कड़ी टक्कर दे रही हैं।