पंचकूला में जातिगत समीकरण तय करेगा टिकट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विधानसभा चुनाव के लिए इनेलो प्रत्याशी की घोषणा होने के बाद अब दूसरी पार्टियों ने भी टिकट बंटवारे पर माथापच्ची तेज कर दी है। इनेलो छोड़कर बाकी दलों के नेता अभी जनता का मूड भांप रहे हैं कि इस चुनाव में उन्हें स्थानीय उम्मीदवार रिझा सकेंगे या पैराशूट उम्मीदवार।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सभी पार्टियां विधानसभा चुनाव में स्थानीय उम्मीदवार को अधिक तवज्जो देगी और जातिगत समीकरण के आधार पर टिकट तय किए जाएंगे। वर्ष 2009 तक पंचकूला का क्षेत्र कालका विधानसभा क्षेत्र के तहत आता था। अब पंचकूला विधानसभा क्षेत्र भी जुड़ गया।
अलग-अलग पार्टी के नेताओं का मानना है कि दूसरे जिलों के प्रत्याशियों को टिकट देने से नुकसान यह होता है कि उन्हें स्थानीय मुद्दों के बारे में जानकारी ही नहीं होती है। ऐसे में चुनावी मैदान में भी दिक्कत और चुनाव जीतने के बाद भी, क्योंकि उन्हें अपने क्षेत्र को समझने में समय लग जाता है।
पंजाबी प्रत्याशी को टिकट देने पर जोर
जिले में जातिगत आधार पर वोटरों की संख्या को देखते हुए कांग्रेस और भाजपा के कुछ नेता पंजाबी समुदाय के उम्मीदवार को ही टिकट देने की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ इसके पक्ष में नहीं हैं। यह राजनीति का मैदान हो तो समर्थन और विरोध का खेल तो चलता ही रहेगा, लेकिन टिकट किसे देना है, किसे नहीं, इस पर अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान का ही होगा।
पंचकूला विस क्षेत्र में कुल वोटर
एक लाख, 93 हजार, 681
जातिगत वोट
पंजाबी---------41 हजार
ब्राह्मण---------18 हजार
बानिया--------37-38 हजार
एससी----------22 हजार
गुर्जर----------आठ हजार
राजपूत---------7-8 हजार
सैनी-----------5-6 हजार
जाट----------7-8 हजार